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हमीरपुर में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 की शुरुआत, कारीगरों को मुफ्त ट्रेनिंग और टूलकिट के साथ मिलेगा ऋण का लाभ –

September 18, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

हमीरपुर: जिले में पारंपरिक हुनर से जुड़े कारीगरों और श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 को लेकर जागरूकता अभियान चलाया…

हमीरपुर: जिले में पारंपरिक हुनर से जुड़े कारीगरों और श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। योजना के तहत इस बार 14 नए ट्रेडों को शामिल किया गया है, जिसके बाद कुल 25 ट्रेडों से जुड़े कारीगरों को योजना का लाभ दिए जाने की जानकारी दी गई है।

इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को उनके हुनर के अनुरूप प्रशिक्षण, उपकरण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर देना है।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 के तहत पारंपरिक और आधुनिक कार्यों से जुड़े कारीगरों को शामिल किया गया है। योजना में इस बार 14 नए ट्रेड जोड़े गए हैं। इससे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कारीगरों के लिए योजना का दायरा बढ़ गया है।योजना के तहत पात्र कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण, टूलकिट और मानदेय उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।

योजना के प्रमुख लाभों में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शामिल है। प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को उनके कार्य से संबंधित तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा प्रशिक्षण से जुड़े लाभार्थियों को 5 हजार रुपये मानदेय दिए जाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण अवधि के दौरान कारीगरों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 के तहत पात्र कारीगरों को उनके ट्रेड के अनुसार 15 हजार रुपये तक की टूलकिट उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। टूलकिट मिलने से कारीगर अपने पारंपरिक कार्य को बेहतर तरीके से कर सकेंगे और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

योजना के तहत कारीगरों को अपना काम बढ़ाने के लिए बिना गारंटी और बिना ब्याज के ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। पोस्टर में 10 लाख रुपये तक के ऋण और ऋण पर 15 प्रतिशत की छूट का भी उल्लेख किया गया है।

इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य कारीगरों को कारोबार शुरू करने या अपने मौजूदा काम को विस्तार देने में मदद करना है।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हुनर से जुड़े लोगों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। प्रशिक्षण और टूलकिट की मदद से कारीगर अपने काम की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार कर सकते हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से योजना को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक पात्र कारीगर योजना की जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ उठा सकें।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 के तहत प्रशिक्षण, मानदेय, टूलकिट और ऋण जैसी सुविधाएं कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर को आय के साधन में बदलने में मदद कर सकती हैं। योजना का व्यापक उद्देश्य कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और पारंपरिक व्यवसायों को बढ़ावा देना है।

नोट: ऋण, ब्याज/छूट और अन्य वित्तीय लाभों की वास्तविक पात्रता एवं शर्तें संबंधित विभाग के नवीनतम आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होंगी।

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Source: Filmitics

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