India in UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में भारत पिछले कई साल से स्थायी सदस्यता और वीटो पावर के मजबूत दावेदारी ठोक रहा है. हालांकि चीन के अड…
India in UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में भारत पिछले कई साल से स्थायी सदस्यता और वीटो पावर के मजबूत दावेदारी ठोक रहा है. हालांकि चीन के अड़ंगे के चलते अभी तक ये संभव नहीं हो पाई है, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि पूरी दुनिया को भारत की ताकत और संभावनाओं का अंदाजा लग चुका है
यही कारण है कि चीन नहीं चाहता कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बन सके. बता दें कि फिलहाल अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास ही वीटो पावर हैं. इस बीच यूरोप के चार देशों ने भारत की स्थायी सदस्यता के लिए जोरदार समर्थन दिया है. इन चार देशों में स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक शामिल हैं
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के दौरान भारत के साथ हुई पहली विदेश मंत्रियों की बैठक में, विसेग्राड ग्रुप (V4) के चारों सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट के लिए भारत की कोशिश का समर्थन किया. इसे लेकर स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य भारत की दावेदारी का समर्थन करने में एकजुट हैं
‘We all agree as V4 countries that India as a part of the Global South, upcoming superpower in the Indo-Pacific region, must be at the table as the permanent member of the UN Security Council’ – Foreign Minister Juraj Blanár of Slovakia after the first V4 + India FMM #UNGA81… pic.twitter.com/QwFsjlXWYC
विसेग्राड ग्रुप (V4) + भारत के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक के बाद, स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा, “V4 देशों के तौर पर हम सभी इस बात से सहमत हैं कि ‘ग्लोबल साउथ’ का हिस्सा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती हुई महाशक्ति होने के नाते, भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए.”
बता दें कि जुराज ब्लानार का बयान चार मध्य यूरोपीय देशों की ओर से समर्थन का स्पष्ट संकेत है, क्योंकि भारत संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था में बड़ी भूमिका निभाने की लगातार कोशिश कर रहा है
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली V4-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक को “एक नया ऐतिहासिक अवसर” बताया. जिन देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, रक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, उन्होंने अपने विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठकें आयोजित करने और एक वार्षिक व्यापार मंच बनाने पर भी सहमति जताई है
इस बारे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और V4 देश प्रौद्योगिकी और नवाचार में अधिक सहयोग की संभावना तलाशेंगे, साथ ही मौजूदा रक्षा संबंधों को मजबूत करने का भी प्रयास करेंगे. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “रक्षा के क्षेत्र में V4 देशों के साथ हमारा इतिहास बहुत मजबूत रहा है. हम उस रिकॉर्ड और सहयोग को नया रूप देना और आगे बढ़ाना चाहते हैं.”
UNSC में भारत की स्थायी सीट के लिए तर्क सीधा है- सुरक्षा परिषद के गठन के बाद से दुनिया बदल गई है, लेकिन इसकी स्थायी सदस्यता में कोई बदलाव नहीं आया है. इसके अलावा, 1945 में एशिया और अफ्रीका का अधिकांश हिस्सा औपनिवेशिक शासन के अधीन था. कई देश जिनकी आबादी, अर्थव्यवस्था और राजनयिक प्रभाव अब बहुत अधिक है, वे या तो स्वतंत्र नहीं थे या संप्रभु देशों के रूप में अस्तित्व में नहीं थे
यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत ने सुरक्षा परिषद के निर्वाचित सदस्य के रूप में आठ बार काम किया है, जिसमें हाल ही में 2021 और 2022 शामिल हैं. यह मामला कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि इसकी आबादी, आर्थिक ताकत, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान और बढ़ता राजनयिक प्रभाव. इसके अलावा, भारत ने आतंकवाद-रोधी, विकास, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति पर चर्चा में सक्रिय भूमिका निभाई है. नई दिल्ली के लिए, सुरक्षा परिषद में सुधार का मतलब केवल भारत को स्थायी सदस्यता में शामिल करना नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली बहुपक्षीय सुरक्षा संस्था के ढांचे को बदलना है ताकि यह आज की दुनिया को बेहतर ढंग से चला सके
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Source: NewsNationTV






