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अंतराष्ट्रीय

ट्रम्प की भारतीय दवाओं पर 250% टैरिफ लगाने की धमकी:बोले- दवाइयां अमेरिका में ही बनाई जाएं; US में 40% दवाएं भारत से जाती हैं

By admin · August 5, 2025 · 1 min read

ट्रम्प ने कहा- हम चाहते हैं कि दवाइयां हमारे देश में ही बनाई जाएं। इस टैरिफ से भारतीय फार्मा सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है। - Dainik Bhaskar
ट्रम्प ने कहा- हम चाहते हैं कि दवाइयां हमारे देश में ही बनाई जाएं। इस टैरिफ से भारतीय फार्मा सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स पर 250% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ट्रम्प ने CNBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे शुरू में फार्मास्युटिकल्स पर छोटा टैरिफ लगाएंगे, लेकिन फिर इसे एक से डेढ़ साल में बढ़ाकर 150% और फिर 250% कर देंगे।

ट्रम्प ने कहा- हम चाहते हैं कि दवाइयां हमारे देश में ही बनाई जाएं। उनका मानना है कि अमेरिका फार्मा प्रोडक्ट्स के लिए बहुत ज्यादा विदेशों पर निर्भर है, खासकर भारत और चीन पर। इस टैरिफ से भारतीय फार्मा सेक्टर पर बुरा असर पड़ सकता है।

अमेरिका भारत से जेनेरिक दवाइयां, वैक्सीन और एक्टिव इंग्रेडिएंट्स खरीदता है। 2025 में अमेरिका को भारत का फार्मास्युटिकल निर्यात 7.5 अरब डॉलर (करीब 65 हजार करोड़ रुपए) से ज्यादा रहा।

अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं की लगभग 40% भारत से आती हैं।

दवाओं पर टैरिफ से भारतीय कंपनियों को नुकसान

अगर ट्रम्प दवाओं पर टैरिफ को 250% तक बढ़ाते हैं, तो भारतीय कंपनियों को अमेरिका में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें दोगुनी करनी पड़ेंगी। इससे कंपनियों के मुनाफे में भारी कमी आएगी। नुकसान से बचने के लिए भारतीय फार्मा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

टैरिफ बढ़ने से अमेरिका को भी नुकसान

अमेरिका में ज्यादातर सस्ती जेनेरिक दवाएं भारत और चीन से आती हैं। महंगी दवा मिलने का नुकसान मरीजों को उठाना पड़ेगा जिससे अमेरिका के लोगों की ही मुश्किलें बढ़ेंगी।

भारत से निर्यात होने वाली दवाओं में एंटीबायोटिक्स, एंटीडिप्रेसेंट्स और हृदय रोग की दवाएं होती हैं। भारत जेनेरिक दवाएं सस्ते में बनाता है, जिससे अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम को हर साल अरबों डॉलर की बचत होती है।

अप्रैल में भी दे चुके दवाओं पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी

इससे पहले अप्रैल में ट्रम्प ने कहा था कि हम जल्द ही दवाइयों पर भारी टैरिफ लगाएंगे। ट्रम्प ने कहा कि उनका मकसद विदेश में दवा बना रही कंपनियों को अमेरिका में वापस लाना और घरेलू दवा इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है।

ट्रम्प ने कहा कि दूसरे देश दवाओं की कीमतों को कम रखने के लिए बहुत ज्यादा दबाव बनाते हैं। वहां ये कंपनियां सस्ती दवा बेचती हैं, लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं होता है। एक बार जब इन दवा कंपनियों पर टैरिफ लग जाएगा तो ये सारी कंपनियां अमेरिका वापस आ जाएंगी।

अमेरिका अभी दवाओं पर टैरिफ नहीं लगाता

ट्रम्प ने 2 अप्रैल को टैरिफ की घोषणा की थी। इसके तहत अमेरिका ने हर देश पर 10% बेसलाइन टैरिफ लगा दिया था। इस टैरिफ में दवा इंडस्ट्री को छूट दी गई थी। इसके बाद टैरिफ को 90 दिन के लिए 1 अगस्त तक टाल दिया गया था।

फिर 30 जुलाई को ट्रम्प ने भारत पर 26% टैरिफ लगाने का ऐलान किया जो 7 अगस्त से लागू होगा। इसमें फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स पर कितना टैरिफ लगेगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई। अभी तक भारत से आने वाली दवाओं पर ट्रम्प प्रशासन कोई टैरिफ नहीं लगाता है।

कोरोना के दौरान भारत से दवाएं मांग चुके ट्रम्प

कोरोना महामारी के दौरान 6 अप्रैल 2020 को ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी से बात की थी। तब ट्रम्प ने कहा था मैंने आज प्रधानमंत्री मोदी से बात की। वे हमें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की बड़ी मात्रा में सप्लाई करेंगे। यह बहुत उदारता है। हम इसके बहुत आभारी हैं और मुझे लगता है कि यह गेम चेंजर साबित होगा।

हालांकि बाद में उन्होंने कहा था कि अगर भारत किसी कारण से हमें दवा नहीं देता, तो मुझे नहीं लगता कि यह दोस्ताना कदम होगा। अगर दवा नहीं आती तो मैं आपको बता सकता हूं, मैं प्रतिशोध लूंगा।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। कोविड के शुरुआती समय में इसका इस्तेमाल कोरोना के इलाज के लिए किया जा रहा था।

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