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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी सड़क को लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंप देने मात्र से नगर निगम की उस पर से अतिक्रमण हटाने की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। यह टिप्पणी सरोजनीनगर क्षेत्र में सड़क पर अतिक्रमण से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गई।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने विशाल सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सड़क के रखरखाव और मरम्मत के लिए PWD को सौंपे जाने के बावजूद, लखनऊ नगर निगम की अतिक्रमण हटाने की विधिक जिम्मेदारी बनी रहती है।
मामले की सुनवाई के दौरान, नगर निगम की ओर से न्यायालय को बताया गया था कि संबंधित सड़क को PWD को हस्तांतरित कर दिया गया है। इस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि PWD को सड़क सौंप देने से नगर निगम की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
खंडपीठ ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे पहले यह जांच करें कि कथित अतिक्रमण को हटाने की उनकी क्या जिम्मेदारी है। इसके बाद, वे आवश्यक कार्रवाई करें।
न्यायालय ने आगे कहा कि यदि नगर आयुक्त यह पाते हैं कि अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी PWD की है, तो वे पूरे मामले को PWD को भेज दें ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।




