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अंतराष्ट्रीय

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर प्रशासन ने यह कार्रवाई की। मस्जिद बक्शी का तालाब (बीकेटी) के अस्ती गांव में बनी थी।

By admin · April 2, 2026 · 1 min read
लखनऊ में गुरुवार तड़के 4 बजे मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया गया। एडीएम और एसडीएम प्रशासन की टीम और 3 बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे। एक घंटे के अंदर मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया। इसके बाद मलबा हटाया गया। इस दौरान पीएसी की 2 टुकड़ियों समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर प्रशासन ने यह कार्रवाई की। मस्जिद बक्शी का तालाब (बीकेटी) के अस्ती गांव में बनी थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि मस्जिद 60 साल पहले बनी थी। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई गई थी।

इस मामले की शुरुआत 2024 में हुई थी। सबसे पहले तहसीलदार कोर्ट में प्रशासन ने याचिका लगाई थी। तहसीलदार कोर्ट ने 2025 में मस्जिद हटाने और 36 हजार रुपए जुर्माने का आदेश दिया था।

तहसीलदार कोर्ट के आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष एडीएम कोर्ट पहुंच गया। वहां से भी मामला खारिज हो गया। इसके बाद मुस्जिद पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। 6 दिन पहले यानी 26 मार्च को हाईकोर्ट ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था।

रात में एक्शन की जानकारी पर कब्जेदारों की ओर से विरोध की सूचना मिली। मौके पर जाकर एसडीएम के साथ निरीक्षण किया। चेतावनी दी कि अवैध कब्जा हर हाल में हटाया जाएगा। कानून व्यवस्था में बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीएसी बल की मौजूदगी में 3 बुलडोजर लगा दिए गए। करीब 1 घंटे तक चली कार्रवाई में पूरी मस्जिद जमींदोज कर दी गई।

मस्जिद गिराए जाने के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पीएसी के जवान भी तैनात रहे।
मस्जिद गिराए जाने के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पीएसी के जवान भी तैनात रहे।
एक्शन से पहले नोटिस भी चस्पा किया गया था।
एक्शन से पहले नोटिस भी चस्पा किया गया था।
कार्रवाई की फोटो-वीडियोग्राफी की गई।
कार्रवाई की फोटो-वीडियोग्राफी की गई।

  1. बीकेटी तहसीलदार दफ्तर से जारी नोटिस के मुताबिक, अस्ती गांव में 0.300 हेक्टेयर खलिहान की जमीन है। इसमें से 0.0300 हेक्टेयर जमीन पर एक मस्जिद थी, जिसे अवैध तरीके से बनाया गया था। स्थानीय निवासी मो. साहिबाद पुत्र जन्नू और लाल मोहम्मद पुत्र सरदार ने नोटिस को चुनौती दी थी।
  2. 19 अक्टूबर 2024 को लेखपाल ने तहसील कोर्ट में कब्जे की जानकारी दी। 21 अक्टूबर 2024 को मामले में नोटिस जारी किया गया। 28 फरवरी 2025 को सरकारी भूमि से कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया। मो. साहिबाद और लाल मोहम्मद ने आदेश को ADM कोर्ट में चुनौती दी।
  3. ADM कोर्ट में 31 अक्टूबर को याचिका खारिज कर दी गई। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 25 मार्च 2026 को याचिका को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। प्रशासन की ओर से 31 मार्च को नोटिस जारी कर कब्जा हटाने का निर्देश दिया।
  4. अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद को हटाने का नोटिस दीवार पर चिपका दिया गया था। तय समय में अवैध रूप से बनी संरचना नहीं हटी तो इसे प्रशासन ने हटवा दिया।
पीएस बल की मौजूदगी में 3 बुलडोजर खलिहान में पहुंचे। करीब 1 घंटे में पूरी संरचना जमींदोज कर दी गई।
पीएस बल की मौजूदगी में 3 बुलडोजर खलिहान में पहुंचे। करीब 1 घंटे में पूरी संरचना जमींदोज कर दी गई।

तहसील के आदेश को हाईकोर्ट ने सही माना

सरकारी खलिहान पर मस्जिद बनाई गई थी। अवैध संरचना को वहां से हटाने का आदेश दिया गया था। 36 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। तब ये लोग आदेश न मानकर हाईकोर्ट पहुंचे। वहां से भी इन्हें राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने भी तहसील स्तर का आदेश बरकरार रखा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद तहसीलदार ने यह नोटिस मस्जिद की दीवार पर लगाया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तहसीलदार ने यह नोटिस मस्जिद की दीवार पर लगाया था।

प्रशासन ने कब्जे का आरोप लगाया था

जमीन पर दावा करने वाले पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण करीब 60 साल पहले स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने कराया था। उन्होंने दलील दी कि वे सिर्फ नमाज पढ़ने के लिए वहां जाते हैं। मस्जिद के प्रबंधन से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें गवाहों से जिरह का अवसर नहीं दिया गया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूपी राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत इस प्रकार के मामलों में कार्यवाही संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें शपथ पत्रों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। हर मामले में गवाहों की जिरह अनिवार्य नहीं है।

धारा-67 के तहत ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जे को रोकने का प्रावधान है। तहसीलदार या उपजिलाधिकारी (SDM) अवैध कब्जा करने वाले को नोटिस जारी कर, जुर्माना लगाकर और सरकारी भूमि से बेदखल कर अवैध कब्जे का हर्जाना भू-राजस्व की तरह वसूल सकते हैं।

रात में 3 बुलडोजर से एकसाथ एक्शन शुरू किया गया।
रात में 3 बुलडोजर से एकसाथ एक्शन शुरू किया गया।

हाईकोर्ट ने 6 दिन पहले दिया था आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ग्राम सभा की जमीन पर बनी मस्जिद से तहसीलदार के बेदखली के आदेश को सही मानते हुए उसे बरकरार रखा था। न्यायालय ने कहा था कि न तो तहसीलदार के आदेश में और न ही अपर जिलाधिकारी द्वारा अपील खारिज किए जाने के आदेश में कोई गलती है।

हालांकि, न्यायालय ने याचियों पर लगा 36 हजार रुपए का जुर्माना निरस्त कर दिया। कोर्ट ने पाया कि खलिहान के तौर पर दर्ज इस जमीन पर मस्जिद का निर्माण करने में याचियों की कोई भूमिका नहीं पाई गई। यह निर्णय न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने शाहबान व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया।

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