गोशालाओं से जैव ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा नया विस्तार

लखनऊ: 11 अगस्त, 2026
गोशालाओं में उपलब्ध गोबर, कृषि अवशेष एवं अन्य पशुधन जैव-अवशेषों के वैज्ञानिक एवं आर्थिक उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में आज उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता से भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (ठच्ब्स्) की टीम ने मुलाकात कर प्रदेश में ब्वउचतमेेमक ठपव.ळंे (ब्ठळ) के उत्पादन एवं उपयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में ठच्ब्स् से श्री हेमंत पाटील, हेड-कार्यनीति गैस, श्री विवेक प्रताप सिंह विसेन, प्रादेशिक प्रबंधक-गैस तथा श्री विपुल अरोड़ा, प्रबंधक-कार्यनीति गैस उपस्थित रहे। सिनर्जी फोरकास्ट इंडिया की ओर से डॉ. संतोष सहाणे, ब्म्व् ने भी सहभागिता की।
बैठक में ठच्ब्स् की टीम ने बलरामपुर जनपद के तुलसीपुर ग्राम में ब्ठळ प्लांट स्थापित करने में रुचि व्यक्त की। प्रस्तावित संयंत्र में गोशालाओं से उपलब्ध गोबर के साथ स्थानीय कृषि अवशेष एवं अन्य जैव-अवशेषों का उपयोग कर बायोगैस तैयार कर उसे शुद्धिकरण के माध्यम से ब्ठळ में परिवर्तित किया जा सकेगा।
टीम ने बताया कि तुलसीपुर में उत्पादित गैस का स्थानीय उपयोग करते हुए आसपास के क्षेत्र के लगभग 1,000 परिवारों को पाइपलाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा सकता है। इससे स्थानीय जैव-अवशेषों का उपयोग सुनिश्चित होने के साथ ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।
बैठक में डॉ. संतोष सहाणे ने अपनी कंपनी की पेटेंटेड तकनीक के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मोबाइल यूनिट के माध्यम से गोशालाओं में स्थापित बायोगैस संयंत्रों से प्राप्त गैस का शुद्धिकरण कर ब्ठळ के रूप में सिलेंडरों में भरा जा सकता है। इस तकनीक के माध्यम से विभिन्न गोशालाओं में स्थापित बायोगैस संयंत्रों को एक साझा जैव-ऊर्जा नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उत्पादित ब्ठळ का उपयोग वाहनों में ब्छळ के रूप में तथा उपयुक्त माध्यम से पेट्रोल पंपों के जरिए विपणन किए जाने पर भी चर्चा हुई।
इस मॉडल में बायोगैस उत्पादन के साथ स्लरी के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से जैविक खाद एवं अन्य जैव-इनपुट तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इन जैव-इनपुट का उपयोग आसपास के किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे मृदा में जैविक कार्बन एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर एवं कृषि अवशेषों को अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय उन्हें ऊर्जा एवं आर्थिक संसाधन में परिवर्तित करने की दिशा में तकनीक आधारित प्रयास महत्वपूर्ण हैं। गोशालाओं को जैव-ऊर्जा एवं जैव-इनपुट उत्पादन से जोड़ने से गोवंश संरक्षण के साथ उनकी आत्मनिर्भरता, किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
बैठक के उपरांत ठच्ब्स् की टीम ने अपर मुख्य सचिव, पशुधन विभाग श्री मुकेश मेश्राम से भी मुलाकात कर प्रस्तावित ब्ठळ परियोजना के संबंध में जानकारी साझा की। अपर मुख्य सचिव ने बलरामपुर के तुलसीपुर में प्रस्तावित परियोजना के लिए आवश्यक सहयोग एवं समन्वय का आश्वासन दिया तथा गोशालाओं एवं कृषि क्षेत्र से उपलब्ध जैव-अवशेषों के बेहतर उपयोग के लिए ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने की बात कही।














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