केन्द्र सरकार ने रद्द किया डीजल में एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोजेक्ट
New Delhi…
केन्द्र की मोदी सरकार की E20 पेट्रोल नीति को लेकर देश में छिड़े विवाद के बीच सरकार ने डीजल में एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है. टेस्ट में एथनॉल मिलाने के बाद डीजल का फ्लैश पॉइंट काफी कम पाया गया जो कि सुरक्षा मानकों के विपरीत है. इसलिए अब ये प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. हालांकि केन्द्र सरकार अब डीजल में इथेनॉल के बजाय बायोफ्यूल के रूप में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) के उपयोग और उसके परीक्षण पर विचार कर रही है.
केन्द्रीय मंत्री द्वारा राज्यसभा में दिये बयान के अनुसार देश में पेट्रोल के बाद डीजल में भी एथनॉल मिलाने के प्लान पर सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से किए गए टेस्ट में एथनॉल को डीजल में मिलाने के बाद एक अहम सुरक्षा मानक प्रभावित होता पाया गया. इसके बाद सरकार ने एथनॉल-डीजल ब्लेंडिंग को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है. अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस फैसले की वजह से आने वाले समय में डीजल महंगा हो सकता है ?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में बताया कि सरकारी तेल कंपनियों ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर के जरिए डीजल में अलग-अलग मात्रा में एथनॉल मिलाकर टेस्ट किए थे. इन टेस्ट में ऑयल कंपनियों के साथ लैब और ऑटोमोबाइल कंपनियां भी शामिल थीं. टेस्ट के दौरान पाया गया कि डीजल में एथनॉल मिलाने से उसका फ्लैश पॉइंट काफी कम हो जाता है. ब्लेंडेड डीजल जरूरी फ्लैश पॉइंट मानकों पर खरा नहीं उतर पाया है.
इथेनॉल और डीजल का रासायनिक स्वभाव अलग होने के कारण यह आपस में आसानी से स्थिर नहीं रहते और अलग होने लगते हैं. कम फ्लैश पॉइंट के कारण वाहन, स्टोरेज टैंक और परिवहन के दौरान जरा सी चिंगारी से आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसी वजह से सरकार ने इस योजना को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया.
*फ्लैश पॉइंट क्या होता है ?”
फ्लैश पॉइंट वो तापमान है जिस पर किसी ईंधन से इतनी वाष्प निकल सकती है कि वो आग पकड़ सके. अगर किसी ईंधन का फ्लैश पॉइंट काफी कम हो जाता है तो उसके स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और हैंडलिंग के दौरान आग लगने का रिस्क बढ़ सकता है. यही कारण है कि सरकार डीजल के मामले में किसी तरह का सुरक्षा को लेकर किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है.
क्या अब डीजल होगा महंगा?
सरकार ने एथनॉल को डीजल में मिलाना इसलिए रद्द किया है क्योंकि टेस्ट में सुरक्षा से जुड़ी परेशानी सामने आई है. इस फैसले का मतलब ये नहीं है कि डीजल के दाम तुरंत बढ़ने वाले हैं. डीजल की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है. इसमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन लागत, टैक्स और तेल कंपनियों की कीमत नीति जैसी चीजें शामिल हैं…














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