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October 4, 2026
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एमएसएमई क्षेत्र के लिए बड़ा सुधार: संसद ने पारित किया एमएसएमईडी संशोधन विधेयक 2026

August 13, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

लखनऊ: 12 अगस्त, 2026

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सरल, पारदर्शी और अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा ने 7 अगस्त 2026 को पारित कर दिया। इससे पहले 3 अगस्त 2026 को इसे राज्यसभा की मंजूरी मिल चुकी है।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2006 में लागू एमएसएमई विकास अधिनियम के करीब दो दशक बाद इसमें व्यापक बदलाव किए गए हैं। तकनीकी प्रगति, डिजिटल प्रणालियों के विस्तार और एमएसएमई क्षेत्र में तेजी से आए बदलावों को देखते हुए अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

9.16 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई की संख्या 1 अप्रैल 2023 के 1.65 करोड़ से बढ़कर अब 9.16 करोड़ हो गई है। यह क्षेत्र देश में 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है और भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नए संशोधनों के प्रमुख बिंदु
1. एमएसएमई वर्गीकरण में बदलाव – प्लांट एवं मशीनरी में निवेश तथा टर्नओवर के दोहरे मानदंड को कानून में शामिल किया गया है। उद्यम पंजीकरण पोर्टल को डिजिटल, निरूशुल्क और स्वैच्छिक पंजीकरण मंच के रूप में स्थायी वैधानिक दर्जा दिया गया है।

2. भुगतान विवादों के समाधान को मिलेगी रफ्तार – ऑनलाइन विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत किया गया है। यदि किसी मध्यस्थता निर्णय को रद्द करने संबंधी आवेदन छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो न्यायालय को एमएसएमई सप्लायर के पक्ष में तय राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान कराने का आदेश देना होगा। पहली उपस्थिति की तारीख से 90 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान किया गया है।

3. बकाया राशि की वसूली के अधिकार मजबूत – देय राशि की वसूली के लिए जिला कलेक्टर, उपायुक्त अथवा अधिसूचित प्राधिकारी के माध्यम से भूमि राजस्व के बकाये की तरह राशि की वसूली का प्रावधान किया गया है।

4. सरकारी खरीद में डिजिटल भुगतान – केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के चालानों के निपटारे के लिए ज्त्मक्ै (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) को बढ़ावा दिया गया है। ज्त्मक्ै पर संसाधित चालानों का मूल्य 2022-23 में करीब 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

5. राज्यों को अधिक अधिकार – राज्य अपने स्तर पर एक से अधिक एमएसएमई सुविधा परिषद स्थापित कर सकेंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर विवादों का तेजी से निपटारा किया जा सके।

6. अपराधीकरण में कमी – कुछ प्रावधानों में दोषसिद्धि एवं जुर्माने की जगह नागरिक दंड और चरणबद्ध चेतावनी व्यवस्था लाई गई है। पंजीकरण अथवा जानकारी उपलब्ध कराने से जुड़े उल्लंघनों में पहली बार चेतावनी, दूसरी बार दंड तथा उसके बाद जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

केंद्र सरकार ने इन संशोधनों को ‘विकसित भारत/2047’ की परिकल्पना से जोड़ते हुए कहा है कि मजबूत, जीवंत और टिकाऊ एमएसएमई क्षेत्र देश के आर्थिक विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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