लखनऊ: 19 अगस्त, 2026
डा0 हृषिकेश भास्कर यशोद, चकबन्दी आयुक्त, ने चकबन्दी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, किसानों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचाने तथा कार्यों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने हेतु दो महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए-
1. चकबन्दी अधिकारी या बन्दोबस्त अधिकारी अथवा उप संचालक द्वारा चकबन्दी स्तर पर बिना किसी पर्याप्त कारण या आधार के प्रारम्भिक चकबन्दी योजना अथवा परिष्कृत योजना को निरस्त कर दिया जाता है और ग्रामों को पुनः शुरुआती स्तर पर भेज दिया जाता है। इस प्रक्रिया से किसानों की समस्याएं बढ़ती हैं, चकबन्दी प्रक्रिया विलम्बित होती है तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी और विधिक विसंगतियाँ उत्पन्न होती हैं। इस स्थिति के निवारण हेतु चकबन्दी प्राधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अधिकारी आपत्ति अथवा अपील की सुनवाई के समय स्वयं अपने स्तर पर योजना के पुनरीक्षण का प्रयास करेंगे। यदि योजना में अधिनियम की धारा-19 की शर्तों से अत्यधिक विचलन हो और सुधार संभव न हो, तभी प्रत्यावर्तन पर विचार किया जाएगा। इसके लिए समस्त सम्बद्ध खातेदारों को सुनना अनिवार्य होगा तथा जिलाधिकारी/जिला उप संचालक चकबन्दी की संस्तुति सहित प्रस्ताव भेजकर चकबन्दी आयुक्त कार्यालय से लिखित पूर्वानुमति प्राप्त करने के बाद ही प्रत्यावर्तन का आदेश पारित किया जाएगा।
2. कब्जा परिवर्तन पूर्ण ग्रामों की चक निगरानियों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया गया है। वर्तमान सत्र में प्रदेश के कुल 267 ग्रामों में कब्जा परिवर्तन का कार्य पूर्ण कराया जा चुका है। धारा-27 के अन्तर्गत अन्तिम अभिलेखों की तैयारी और धारा-52 के निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करने के लिए धारा-48 के अधीन प्राप्त चक निगरानियों का निस्तारण समय से किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इस हेतु समस्त उप संचालक चकबन्दी, उत्तंर प्रदेश को निर्देशित किया गया है कि वर्तमान सत्र के 267 ग्रामों तथा पूर्व से उपलब्ध कब्जा परिवर्तन पूर्ण ग्रामों की चक निगरानियों का निस्तारण विशेष अभियान चलाकर सितम्बर, 2026 तक हर हाल में पूरा कराते हुए निदेशालय को अवगत कराया जाए। इस कार्य हेतु समस्त बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी को संबंधित ग्रामों की सूची एवं कार्यवाही पुस्तक उपलब्ध कराकर समन्वय स्थापित करते हुए चक निगरानियों का निस्तारण समयबद्ध रूप से कराये जाने के निर्देश दिये गये हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य चकबन्दी प्रक्रिया में तेजी लाना, जवाबदेही तय करना तथा किसानों के हितों की रक्षा करते हुए अभिलेखों को समय पर अंतिम रूप देना है।






