कानपुर, 2 सितंबर। उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPD…
कानपुर, 2 सितंबर। उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अगले चरण को गति देने के लिए कानपुर में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हुई ‘कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ में रक्षा उद्योग, शोध, कौशल विकास और एमएसएमई को एक साथ जोड़कर कानपुर को बड़े रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर मंथन हुआ।
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि कानपुर में केवल रक्षा उत्पादन से जुड़ी फैक्ट्रियां स्थापित करने पर ही जोर नहीं होगा, बल्कि यहां रिसर्च, इनोवेशन, स्किल डेवलपमेंट और एमएसएमई का मजबूत नेटवर्क भी तैयार किया जाएगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल नई तकनीक और ड्यूल-यूज तकनीक विकसित करने में किया जाएगा।जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहे जाने वाले कानपुर में मजबूत इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग आधार मौजूद है। ऐसे में शहर में देश के प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में विकसित होने की पूरी क्षमता है। सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से इस क्षमता को नई दिशा दी जा सकती है।ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि ORF की ‘स्ट्रैटेजिक उत्तर प्रदेश’ पहल के तहत रक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाने, निवेश बढ़ाने और अलग-अलग शहरों में रक्षा क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कानपुर की कार्यशाला भी इसी पहल का हिस्सा है।सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर प्रदेश को हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे संस्थानों के सहयोग से कॉरिडोर में रिसर्च, विज्ञान और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। सरकार, उद्योग जगत, रक्षा विशेषज्ञों, शोध संस्थानों, नीति निर्माताओं और एमएसएमई को साथ लाकर कानपुर के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जा रहा है।डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने कहा कि कानपुर में रक्षा उद्योग के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने के साथ युवाओं को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देना जरूरी है।
आईआईटी कानपुर और बीएचयू में होने वाली रिसर्च का लाभ आईटीआई और स्थानीय तकनीकी संस्थानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा। उद्योगों के सहयोग से ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के अवसर बढ़ने से युवाओं को रोजगार मिलने के साथ ही प्रदेश में रक्षा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार होगा।कार्यशाला में स्थानीय एमएसएमई के सामने आने वाली टेस्टिंग, क्वालिटी चेक, ट्रायल और सर्टिफिकेशन जैसी चुनौतियों को कम करने पर भी चर्चा हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पी.के. सैनी ने कहा कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए रक्षा क्षेत्र में भागीदारी के अवसर बढ़ेंगे। ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाते हुए देश में डिजाइन, बौद्धिक संपदा, सॉफ्टवेयर और आधुनिक तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया।यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने कहा कि निवेशकों और उद्योग जगत में कानपुर को लेकर काफी उत्साह है। वहीं टीकेएमएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने कहा कि भारत में काम कर रही विदेशी रक्षा कंपनियां देश के बड़े बाजार और रक्षा उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाना चाहती हैं।कार्यशाला में ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया गया। आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से विकसित होने वाली कई तकनीकों का इस्तेमाल रक्षा के साथ नागरिक उद्योगों में भी किया जा सकेगा। इससे कानपुर के औद्योगिक और कारोबारी क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।कार्यशाला में कानपुर में बेहतर समन्वय के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी। अब इसी क्रम में झांसी में अगली कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसके बाद साल के अंत में लखनऊ में बड़े डिफेंस कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है। इन बैठकों और कार्यशालाओं से मिले सुझावों के आधार पर उत्तर प्रदेश को वैश्विक रक्षा उत्पादन के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
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Source: Filmitics

