Ghazipur News: देश में सामाजिक समानता और विकास की चर्चा के बीच गाजीपुर में बासफोर, मुसहर और अन्य वंचित-महादलित समुदायों के लोगों ने अपने अधिकारों, सम्मान, जमीन…
Ghazipur News: देश में सामाजिक समानता और विकास की चर्चा के बीच गाजीपुर में बासफोर, मुसहर और अन्य वंचित-महादलित समुदायों के लोगों ने अपने अधिकारों, सम्मान, जमीन और पक्के आवास की मांग को लेकर आवाज उठाई। सोमवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग गाजीपुर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद शिक्षा, जागरूकता और जानकारी के अभाव में उनके समुदाय के कई परिवार आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। लोगों ने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव खत्म करने की मांग भी उठाई।
समाज के प्रदेश अध्यक्ष सोनू बासफोर ने कहा कि उनके समुदाय के बड़ी संख्या में परिवारों के पास अपनी जमीन और पक्का मकान नहीं है। कई परिवार सड़क किनारे झोपड़ियों या गांवों से अलग बस्तियों में रहने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि परिवारों की आजीविका का बड़ा हिस्सा बांस-बल्लियों से सामान बनाने और श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यों से चलता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समाज के लिए जरूरी कार्य करने के बावजूद उन्हें कई जगहों पर कथित तौर पर सम्मान नहीं मिलता और छुआछूत जैसी सामाजिक समस्या का सामना करना पड़ता है।
सोनू बासफोर ने सड़क किनारे रहने वाले परिवारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि झोपड़ियों के पास से तेज रफ्तार वाहन गुजरते हैं, जिससे कई बार हादसे का खतरा बना रहता है।
समाज की ओर से मांग की गई कि गांवों में उपलब्ध बंजर या सरकारी भूमि का चिन्हांकन किया जाए और पात्र परिवारों को आवासीय पट्टा देकर पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएं। इससे गरीब परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास मिल सकेगा।
प्रदर्शनकारियों ने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनका समुदाय हिंदू समाज के धार्मिक और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, तो उन्हें बराबरी का सम्मान क्यों नहीं दिया जाता?
उन्होंने सवाल किया कि किसी व्यक्ति या समुदाय को सिर्फ उसकी सामाजिक स्थिति के आधार पर अछूत की नजर से देखना आखिर कब तक जारी रहेगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रद्युम्न पहलवान ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि किसी समुदाय को अपने अस्तित्व, सम्मान और बुनियादी अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, तो यह सामाजिक समानता के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनकी मांग सम्मान, बराबरी, शिक्षा, जमीन और सुरक्षित आवास के अधिकार को लेकर है।
प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने धर्म परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि यदि उन्हें हिंदू समाज में बराबरी और सम्मान नहीं मिलता, तो वे ऐसे धर्म पर विचार कर सकते हैं जहां उन्हें सम्मान और समानता मिले।
यह बयान प्रदर्शनकारियों की ओर से सामाजिक भेदभाव के खिलाफ दबाव बनाने और अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाने के संदर्भ में सामने आया। समाज के लोगों ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग अपने समुदाय के लोगों को सम्मान, सुरक्षा, जमीन, आवास और शिक्षा का अधिकार दिलाना है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार की ओर से गरीब और वंचित वर्गों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जागरूकता और जानकारी की कमी के कारण कई पात्र परिवार उनका लाभ नहीं उठा पाते।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि महादलित और वंचित बस्तियों में विशेष जागरूकता अभियान चलाकर पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही जमीन, आवास, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
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Source: Filmitics







