Gorakhpur-Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से से लेकर पूर्वांचल तक सड़क कनेक्टिविटी का नक्शा आने वाले वर्षों में बदल सकता है। वजह है करीब 740 किल…
Gorakhpur-Shamli Expressway: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से से लेकर पूर्वांचल तक सड़क कनेक्टिविटी का नक्शा आने वाले वर्षों में बदल सकता है। वजह है करीब 740 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, जिसे तैयार होने के बाद उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे में शामिल किया जा सकता है। इसकी प्रस्तावित लंबाई मौजूदा गंगा एक्सप्रेसवे के 594 किलोमीटर से भी अधिक है।
कल्पना कीजिए, पश्चिमी यूपी के शामली से निकलकर सीधे पूर्वांचल के गोरखपुर तक पहुंचने वाला एक हाई-स्पीड कॉरिडोर। परियोजना से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे बनने के बाद शामली से गोरखपुर की यात्रा करीब 7.5 घंटे में पूरी हो सकती है। वहीं दिल्ली से गोरखपुर का सफर करीब 8 घंटे और शामली से लखनऊ की यात्रा लगभग 5 से 6 घंटे में पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा उद्देश्य उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को एक तेज और एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क नेटवर्क से जोड़ना है। शामली की तरफ यह कॉरिडोर दिल्ली-देहरादून और अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे जैसे नेटवर्क से जुड़ सकता है।
दूसरी तरफ गोरखपुर से आगे यह पूर्वी भारत की ओर जाने वाले सड़क नेटवर्क के साथ कनेक्टिविटी मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है। इससे दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब की ओर से आने वाले ट्रैफिक को पूर्वांचल और आगे बिहार-पश्चिम बंगाल की दिशा में तेज सड़क संपर्क मिल सकता है।
इस मेगा एक्सप्रेसवे को लेकर सबसे बड़ा अपडेट निर्माण बिड से जुड़ा है। NHAI ने पैकेज 9, 10, 11 और 12 के लिए निर्माण बिड आमंत्रित की हैं। इन पैकेजों की तकनीकी और वित्तीय बोलियां 6 नवंबर 2026 को खोले जाने का कार्यक्रम है।
इससे पहले पैकेज 5, 6, 7 और 8 के लिए भी निर्माण बिड की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। यानी परियोजना के कई हिस्से अब टेंडर प्रक्रिया के चरण में पहुंच चुके हैं। इससे एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ती प्रक्रिया का संकेत मिलता है।
प्रस्तावित परियोजना को दो प्रमुख चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में शामली से शाहजहांपुर के पुवायां तक करीब 348 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है। इसके बाद दूसरे चरण में पुवायां से गोरखपुर तक करीब 392 किलोमीटर का हिस्सा तैयार किया जाना प्रस्तावित है।दोनों चरणों को मिलाकर कॉरिडोर की लंबाई करीब 740 किलोमीटर बैठती है। परियोजना पूरी होने के बाद यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच एक नया हाई-स्पीड परिवहन मार्ग उपलब्ध करा सकता है।
इस एक्सप्रेसवे का प्रभाव सिर्फ यूपी के जिलों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। शामली की तरफ से अंबाला-शामली और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-NCR से कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है।वहीं गोरखपुर की तरफ से बिहार और पश्चिम बंगाल की दिशा में सड़क नेटवर्क को गति मिल सकती है। इससे माल ढुलाई, कृषि उत्पादों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स और कारोबार को भी फायदा मिलने की संभावना है।यानी गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे सिर्फ करीब 740 किलोमीटर की सड़क परियोजना नहीं, बल्कि यूपी के पश्चिम से पूर्व तक कनेक्टिविटी को बदलने वाला संभावित मेगा कॉरिडोर है। अब नजर टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होने और परियोजना की वास्तविक समयसीमा पर रहेगी।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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Source: Filmitics







