Skip to content
September 28, 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
मां को गालियां दीं, लेकिन मैं उन्हें माफ करता हूं… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी की देश से बड़ी अपील, राष्ट्रपति ने पेपर लीक कानून संशोधन को दी मंजूरी, राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतों का रास्ता साफ *RBI का नया नियम : अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर देना होगा एकसमान ब्याज, चाहे सरकारी हो या प्राइवेट… अब चढ़ावा आठ सदस्यीय निगरानी टीम के हवाले, नई व्यवस्था 25 जुलाई से लागू विदिशा ट्रस्ट ने ‘वाइब्रेंट विदिशा’ के 15वें संस्करण का आयोजन किया; लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र स्थित हुसड़िया चौराहे के पास एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल कम डालने के आरोप को लेकर विवाद हिंसक हो गया। बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में मोहर्रम का जुलूस देख रहे एक युवक पर पुरानी रंजिश के चलते चाकू से हमला किया गया। विश्व योग दिवस पर प्रेरणा वाटिका पार्क में हुआ भव्य योग कार्यक्रम।
khel

Pitru Paksha 2026 Dwitiya Shradh: आज पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है, जानें पिंडदान करने का सही समय और विधि

September 28, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

Pitru Paksha 2026 Dwitiya Shradh: पितृपक्ष का आज यानी 28 सितंबर 2026 को द्वितीया तिथि का श्राद्ध है. इस श्राद्ध के दिन उन सभी मृतकों का तर्पण व पिंडदान किया जा…

Pitru Paksha 2026 Dwitiya Shradh: पितृपक्ष का आज यानी 28 सितंबर 2026 को द्वितीया तिथि का श्राद्ध है. इस श्राद्ध के दिन उन सभी मृतकों का तर्पण व पिंडदान किया जाएगा, जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार, किसी माह की द्वितीया को हुआ था. यह तिथि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों की हो सकती है. पूर्वजों या पितरों की शांति के लिए आज के दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा. ये सभी धार्मिक अनुष्ठान कुतुप काल में किए जाते हैं. इतना ही नहीं, ये सभी कार्य आपको किसी योग्य ब्राह्मण की देख-रेख में करना होता है. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण प्राप्त होने से हमारे पितृ शांत होते हैं तथा उनकी कृपा बनी रहती है

आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया है. इस तिथि का प्रारंभ 27 सितंबर को रात 8:58 पर हुआ था और 28 सितंबर को शाम 7:13 तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक, द्वितीया तिथि का श्राद्ध सोमवार को यानी आज किया जा रहा है

बता दें कि पूर्वजों का पिंडदान हमेशा दोपहर के समय किया जाता है. इसलिए, शास्त्रों के अनुसार, पितरों का तर्पण और श्राद्ध कुतुप वेला में किया जाए तो सबसे उत्तम होता है. आज यानी 28 सितंबर को कुतुप काल दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रहा है और 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. हालांकि, कुतुप वेला का समय अलग-अलग शहरों में अलग भी हो सकता है. इसलिए, अपने शहर के पंचांग के अनुसार, समय सुनिश्चित करें

द्रिक पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि के श्राद्ध में चावल, आटे या जौ से पिंड बनाए जाते हैं. इन पिंडों को ही पितरों को अर्पित किया जाता है. पिंडदान करने के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का तर्पण करना होता है. पितरों का तर्पण करते समय हाथ में कुशा जरूर रखनी चाहिए. इसकी अंगूठी बनाकर दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना होता है. श्रााद्ध के बाद जरूरतमंद ब्राह्मणों की सेवा करें, उन्हें भोजन करवाएं और दक्षिणा दें. अंत में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें

श्राद्ध करते समय आपको गाय, कुत्तों, कौवों और चींटियों के लिए भी भोजन निकालना होता है. इनका एक अंश निकालकर अलग रख दें. धार्मिक मान्यता है कि इन जीवों के माध्यम से ही हमारे पितृ भोजन प्राप्त करते हैं और प्रसन्न होते हैं. इससे पितृ दोष भी नहीं लगता है और उनकी आत्मा तृप्त होती है

पितृपक्ष में श्राद्ध के दिन कुछ बातों का खास ख्याल रखना होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखना चाहिए और किसी भी तरह के विवाद, क्रोध या अपशब्दों को बोलने से बचना चाहिए. श्राद्ध कर्म श्रद्धा और शांत मन से करना शुभ माना जाता है

मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन

श्राद्ध के दिन मांसाहारी भोजन, शराब और अन्य तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, खाने में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल भी न करने की परंपरा कई परिवारों में मानी जाती है. पितरों के निमित्त बनाए गए भोजन को पहले भगवान और पितरों को अर्पित करने के बाद ही ग्रहण करने की मान्यता है

इस दिन बाल और नाखून काटने, अनावश्यक खरीदारी करने और शुभ मांगलिक कार्यों को करने से भी कई धार्मिक परंपराओं में परहेज किया जाता है. हालांकि, इन नियमों में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है

श्राद्ध कर्म के दौरान पिंडदान और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों का अपमान या अनादर बिल्कुल नहीं करना चाहिए. साथ ही, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करने की परंपरा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्राद्ध कर्म दिखावे के बजाय श्रद्धा, सम्मान और पितरों के स्मरण के साथ किया जाए

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

div

Source: NewsNation TV

शेयर करें:

संबंधित खबरें

और खबरें

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *