Skip to content
September 29, 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
मां को गालियां दीं, लेकिन मैं उन्हें माफ करता हूं… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी की देश से बड़ी अपील, राष्ट्रपति ने पेपर लीक कानून संशोधन को दी मंजूरी, राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतों का रास्ता साफ *RBI का नया नियम : अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर देना होगा एकसमान ब्याज, चाहे सरकारी हो या प्राइवेट… अब चढ़ावा आठ सदस्यीय निगरानी टीम के हवाले, नई व्यवस्था 25 जुलाई से लागू विदिशा ट्रस्ट ने ‘वाइब्रेंट विदिशा’ के 15वें संस्करण का आयोजन किया; लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र स्थित हुसड़िया चौराहे के पास एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल कम डालने के आरोप को लेकर विवाद हिंसक हो गया। बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में मोहर्रम का जुलूस देख रहे एक युवक पर पुरानी रंजिश के चलते चाकू से हमला किया गया। विश्व योग दिवस पर प्रेरणा वाटिका पार्क में हुआ भव्य योग कार्यक्रम।
desh

संभल हिंसा केस में मुल्ला अफरोज को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया NSA

September 29, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को दरकिनार करते…

संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को दरकिनार करते हुए अफरोज पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने गैर-कानूनी और मनमाने तरीके से हिरासत में रखने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर दस लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अफरोज की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य प्रशासन की कानूनी कार्रवाई की शैली पर सख्त सवाल उठाए

नवंबर 2024 में संभल स्थित शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में पुलिस ने मुल्ला अफरोज को मुख्य साजिशकर्ता बताया था. मूल मामलों में जमानत मिल जाने के बाद सरकार ने शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए उन पर एनएसए तामील कर दोबारा हिरासत में ले लिया था. राज्य सरकार ने अपनी दलील में कहा था कि रिहाई के बाद सार्वजनिक सौहार्द बिगड़ने का भारी अंदेशा था, इसलिए निवारक नजरबंदी अपरिहार्य हो गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से दो-टूक सवाल किया कि पुलिस हिरासत में लिए गए जिस बयान की कानूनी तौर पर कोई साक्ष्य मान्यता नहीं होती, उसे किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनने का आधार कैसे बनाया जा सकता है

इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का एक बेहद दुर्लभ और मर्मस्पर्शी अध्याय भी जुड़ गया. पीठ ने इस फैसले को अपने युवा लॉ क्लर्क रित्विक देसवाल की स्मृति को समर्पित किया, जिनका कुछ ही दिन पहले असामयिक निधन हो गया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता ने फैसला सुनाते हुए बेहद भावुक होकर कहा कि आज दिवंगत रित्विक का जन्मदिन भी है. उन्होंने कहा कि नश्वर मानव जीवन कितना क्षणभंगुर है, इसका अहसास हमें आम दिनों में मुश्किल से होता है. जस्टिस दत्ता ने उल्लेख किया कि फैसले की रूपरेखा और कानूनी शोध में रित्विक ने अथक सहयोग दिया था और उनके अंतिम कार्य की छाप इस दस्तावेज में स्पष्ट दिखती है. अदालत ने रित्विक की बौद्धिक ईमानदारी, कानून के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और समर्पण को नमन करते हुए यह फैसला उनके नाम किया, जो न्यायिक परिपाटी में अपने शोध सहयोगियों के प्रति सम्मान की एक अनूठी मिसाल बन गया

div

Source: NewsNation TV

शेयर करें:

संबंधित खबरें

और खबरें

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *