Navratri 2026: हिंदू धर्म में एक वर्ष में कई पर्व मनाए जाते हैं. ये सभी सिर्फ व्रत या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता है. सनातन धर्म में हर पर्व की अपनी विशेष मान्…
Navratri 2026: हिंदू धर्म में एक वर्ष में कई पर्व मनाए जाते हैं. ये सभी सिर्फ व्रत या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता है. सनातन धर्म में हर पर्व की अपनी विशेष मान्यता है. इनकी धार्मिक परंपराएं भी अलग होती है. उन्हीं में से एक पितृपक्ष भी होता है. हिंदू धर्म में पितरों को समर्पित यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसमें खुशियां भले ही नहीं मनाई जाती लेकिन इसका महत्व किसी पर्व से कम नहीं होता है. पितृपक्ष हमेशा शारदीय नवरात्र से पहले ही होते हैं और इसके अगले दिन से ही नवरात्र का प्रारंभ होता है
इस वर्ष 26 सितंबर 2026 से पितृपक्ष शुरू हुआ था और 10 अक्टूबर को समाप्त हो रहे हैं. इसके ठीक अगले दिन यानी कि 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ हो जाएगा. नवरात्र 11 अक्टूबर से लेकर 19 अक्टूबर तक चलेंगी. इसके बाद 20 अक्टूबर को विजय दशमी मनाई जाएगी. इसका मतलब हुआ कि एक ओर पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का समय समाप्त होता और दूसरी ओर शक्ति का पर्व शुरू हो जाता है. आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों यानी कि पूर्वजों का भी हमारे जीवन में विशेष स्थान होता है. पितृपक्ष में अपने परिवार के दिवंगत जनों का पिंडदान करना सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि उन्हें प्रसन्न करने का भी उपाय होता है. माना जाता है कि किसी भी देव कार्य से पूर्व पितरों को याद करना जरूरी होता है. इसी मान्यता के चलते पितृपक्ष में पहले पितरों का तर्पण करना होता है और फिर पितृपक्ष समाप्त होते हैं और देवी अराधना का प्रारंभ होता है
इसके पीछे हिंदू पंचांग की तिथियों का भी गहरा संबंध है. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितरों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. इसकी अमावस्या पर ही पितृपक्ष की समाप्ति होती है. इसके बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है. पंचांग की दृष्टि से देखा जाएं तो पहले कृष्ण पक्ष आता है, जिसमें पितरों का श्राद्ध करना उचित माना जाता है. इसके बाद शुक्ल पक्ष शुरू होता है, जिसमें देवी-देवताओं से जुड़े शुभ कार्यों को करना सही माना जाता है. इसलिए, पितृपक्ष पहले मनाया जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना गया है. ऐसी मान्यता भी है कि इस अवधि में पितरों का पृथ्वी लोक से संबंध होता है और लोग उनके लिए तर्पण करते हैं और दान करते हैं. ये सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है. अमावस्या के साथ इसका समापन हो जाता है और फिर शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है. इसके साथ वातावरण में भी नई ऊर्जा और सकारात्मकता के आगमन की धार्मिक कल्पना करते हैं. नवरात्रि को इसी की शुरुआत का पर्व माना जाता है, जिसमें आदिशक्ति धरती पर आती हैं
द्रिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 11 अक्टूबर 2026 को रविवार के दिन हो रहा है. यह नवरात्रि का पहला दिन है, जिसमें घटस्थापना की जाएगी. इसके बाद 19 अक्टूबर को अष्टमी है और 20 अक्टूबर को महानवमी के साथ दशहरा का पर्व भी मनाया जाएगा
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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Source: NewsNation TV







