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एक तरफ यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बिजली अफसरों को निशाने पर लिए हुए हैं। तो दूसरी तरफ बिजली कर्मचारी भी मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोले हैं। बिजली कर्मचारी दक्षिणांचल और पूर्वांचल बिजली कंपनियों के निजीकरण और बेपटरी हुई बिजली व्यवस्था को लेकर खफा हैं। धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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इस बीच अब शर्मा के समर्थकों ने अपनी ही सरकार पर बड़ा सियासी हमला किया है। एके शर्मा ऑफिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट की गई है। इसमें लिखा है- निजीकरण जैसे बड़े फैसले अकेले ऊर्जा मंत्री के नहीं हो सकते। मंत्री जब एक जूनियर इंजीनियर (JE) का ट्रांसफर तक नहीं करता, तो इतना बड़ा फैसला कैसे कर सकता है?
निजीकरण का फैसला मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स और राज्य सरकार की इजाजत के तहत हुआ है। फिर भी कुछ लोग जान-बूझकर एके शर्मा को निशाना बना रहे हैं।
पोस्ट में आगे लिखा गया है- जलनखोर लोग एके शर्मा के खिलाफ एकजुट हो गए हैं, लेकिन ईश्वर और जनता उनके साथ है। ऊर्जा मंत्री का एकमात्र लक्ष्य बिजली की बेहतर व्यवस्था और जनता की सेवा है। पोस्ट में अंत में लिखा गया, “जाको राखे साइयां…।
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div class=”f46ba790″सोशल मीडिया X पर किए गए इसी पोस्ट से सियासी बवाल मचा है।div
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बिजली कर्मचारी के वेश में अराजक तत्व बदनाम कर रहे
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अपने ऑफिस की पोस्ट को अपने X हैंडल पर रि-पोस्ट किया है। इसमें लिखा गया है कि ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की सुपारी लेने वालों में विद्युत कर्मचारी के वेश में कुछ अराजक तत्व भी हैं। कुछ विद्युत कर्मचारी नेता काफी दिनों से परेशान घूम रहे। क्योंकि, उनके सामने ऊर्जा मंत्री झुकते नहीं। ये वही लोग हैं, जिनकी वजह से बिजली विभाग बदनाम हो रहा है। ज्यादातर विद्युत अधिकारियों और कर्मियों के दिन-रात की मेहनत पर ये लोग पानी फेर रहे हैं।
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3 साल के कार्यकाल में 4 बार की हड़ताल
पोस्ट में आगे लिखा गया है कि एके शर्मा के 3 साल के कार्यकाल में ये लोग 4 बार हड़ताल कर चुके हैं। पहली हड़ताल तो उनके मंत्री बनने के 3 दिन बाद ही होने वाली थी। बाहर से प्रेरित हड़ताल की इनकी शृंखला पर हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। अन्य विभागों में हड़ताल क्यों नहीं हो रही? वहां यूनियन नहीं है क्या? वहां समस्या या मुद्दे नहीं हैं क्या?
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div class=”f46ba790″बिजली कर्मचारी निजीकरण के विरोध में बीते 7 महीने से लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।div
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मिठाई खिलाकर पानी पिलाया, फिर भी ऊर्जा मंत्री को निशाना बना रहे
मंत्री की सुपारी लेने वालों ने ही कुछ दिन पहले उनके सरकारी निवास पर आकर प्रदर्शन किया। निजीकरण के विरोध के नाम पर 6 घंटे तक चले इस प्रदर्शन में कई तरह की अभद्रता की। ऊर्जा मंत्री और उनके परिवार के खिलाफ असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया गया।
एके शर्मा ऐसे हैं, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को मिठाई खिलाई और पानी पिलाया। मिलने के लिए ढाई घंटे तक इंतजार भी किया, लेकिन ये बातचीत करने की बजाय हंगामा करते रहे। मंत्री एके शर्मा ने अपनी पोस्ट में सवाल भी दागे।
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div class=”f46ba790″कर्मचारियों के घेराव प्रदर्शन के दौरान ऊर्जा मंत्री एके शर्मा हाथ जोड़कर इस तरह घर से निकले थे।div
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1- टोरेंट कंपनी आने के समय विदेश पर्यटन कर रहे थे
अपनी पोस्ट में मंत्री ने कहा- जहां तक निजीकरण का सवाल है, इनसे कोई पूछे कि जब 2010 में टोरेंट कंपनी को निजीकरण करके आगरा दिया गया, तब भी तुम लोग यूनियन लीडर थे। कैसे हो गया यह निजीकरण? सुना है वो शांति से इसलिए हो गया क्योंकि ये बड़े कर्मचारी नेता लोग हवाई जहाज से विदेश पर्यटन पर चले गए थे।
2- UPPCL की कार्यशैली स्वतंत्र, निजीकरण शर्मा कैसे कर सकते हैं
दूसरा सवाल है- जब तुम लोग सारी बातें बारीकी से जानते हो, तो यह भी जानते ही होगे कि निजीकरण का इतना बड़ा निर्णय अकेला एके शर्मा का नहीं हो सकता। जब एक JE तक का ट्रांसफर ऊर्जा मंत्री नहीं करता। जब UPPCL प्रबंधन की सामान्य कार्यशैली स्वतंत्र है। तो इतना बड़ा निर्णय कैसे ऊर्जा मंत्री अकेले कर सकता है?
तुम यह भी जानते हो कि वर्तमान में यह पूरा निर्णय चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनाई गई टास्क फोर्स ले रही है। उसके तहत ही सारी कार्रवाई हो रही है।
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div class=”f46ba790″संयुक्त मोर्चा ने 27 जुलाई को बैठक की थी। इसमें सीएम से खुद ऊर्जा विभाग संभालने की अपील की थी।div
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बिजलीकर्मियों ने सीएम से ऊर्जा विभाग संभालने की मांग की थी
वहीं, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 27 जुलाई को लखनऊ में एक बैठक की थी। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की थी कि वे ऊर्जा विभाग का प्रभार खुद लें। साथ ही निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करें।
संघर्ष समिति ने कहा था कि भीषण गर्मी और महाकुंभ जैसे आयोजनों के दौरान बिजलीकर्मियों ने रात-दिन मेहनत कर आपूर्ति को सुचारु बनाए रखा। 2017 में जहां लाइन लॉस 41% था, अब 15% से नीचे है। यह जल्द राष्ट्रीय मानक के नीचे आ जाएगा।
समिति ने आरोप लगाया था कि निजीकरण समर्थक अफसर सरकारी बकाया और सब्सिडी की राशि को घाटा बताकर झूठे तर्क दे रहे हैं। पूर्वांचल और दक्षिणांचल की एक लाख करोड़ की संपत्ति को मात्र 6500 करोड़ में बेचने और जमीनें एक रुपए में लीज पर देने जैसे कदम जनता और राज्य सरकार के साथ विश्वासघात हैं।
कर्मचारियों के इस अपील के बाद एके शर्मा ऑफिस की ओर से ये पोस्ट किया गया। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस साजिश में कई लोग शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री को बदनाम कर उन्हें हटाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
अधिकारियों के दुर्व्यवहार वाले ऑडियो को खुद किया था पोस्ट
ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर रविवार को ही बस्ती SE प्रशांत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था l ये कार्रवाई बिजली उपभोक्ता की शिकायत के प्रति असंवेदनशीलता एवं अमर्यादित व्यवहार की घटना के चलते की गई थी। इसमें एसई ने एक उपभोक्ता से बातचीत में अपने राजनीतिक संबंधों की बात कही थी। उनकी बातचीत का ऑडियो मंत्री ने खुद सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया था।
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div class=”f46ba790″ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान एके शर्मा के बनिया शब्द ने तूल पकड़ लिया था।div
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बनिया शब्द पर भी घिर चुके हैं ऊर्जा मंत्री
23 जुलाई, 2025 को बिजली विभाग की एक अहम बैठक में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा था- हम कोई बनिया की दुकान नहीं चला रहे कि पैसा नहीं दिया तो सामान नहीं मिलेगा। हमें बिजली सेवा देनी ही होगी। इसे तूल देते हुए लोगों ने वैश्य समुदाय की भावनाओं से जोड़ दिया।
इसके बाद मंत्री को दो बार सफाई देनी पड़ी। उन्होंने X पर लिखा था- उनकी बात का आशय सिर्फ यह था कि बिजली विभाग एक पब्लिक यूटिलिटी है, न कि व्यापारिक प्रतिष्ठान। 24 जुलाई को उन्होंने खुले मंच से यह साफ कर दिया था कि “बनिया” शब्द किसी वर्ग विशेष को लेकर नहीं कहा गया। यह सेवा और व्यापार के फर्क को समझाने के लिए था।
उन्होंने कहा था- वैश्य समुदाय समाज का अत्यंत सम्मानित वर्ग है, मैं उनका पूरा आदर करता हूं। मंत्री ने कहा कि बयान को पूरे संदर्भ में समझा जाए। उन्होंने दुष्प्रचार से सावधान रहने को कहा और जोड़ा कि बिजली विभाग केवल बिल वसूली नहीं, जनसेवा के संकल्प से चलता है।
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गृह जिले मऊ में बीच कार्यक्रम बिजली गुल हुई थी
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पिछले दिनों मुरादाबाद एक कार्यक्रम में गए थे। बीच कार्यक्रम में 10 मिनट के लिए बिजली गुल हो गई थी। शर्मा की नाराजगी के बाद 5 अफसरों पर कार्रवाई हुई थी। इसी तरह 27 मार्च को मऊ में भी बीच कार्यक्रम में बिजली गुल हो गई थी।
तब टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में कार्यक्रम करना पड़ा था। ऊर्जा मंत्री को अपना जूता खोजने के लिए भी मोबाइल की रोशनी से मदद लेनी पड़ी थी। तब 4 अफसरों पर कार्रवाई हुई थी। दोनों घटनाओं को लेकर ऊर्जा मंत्री की ओर से माना गया था कि ये शरारतपूर्ण व्यवधान डाला गया था।




