कानपुर में गर्लफ्रेंड का मर्डर परिवार को गुमराह किया सूटकेस में लाश यमुना में फेंकी 3 दिन से 6 जिलों के 200 पुलिसवाले ढूंढ रहे

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कानपुर में आकांक्षा (19) मर्डर केस में चौंकाने वाले फैक्ट सामने आए हैं। हत्या के बाद बॉयफ्रेंड सूरज आकांक्षा के मोबाइल से उसके परिवार को गुमराह करता रहा। मां और बहन से चैट करते हुए कभी लिखा- मैं लखनऊ में हूं, तुम लोग मेरी चिंता मत करो, डोंट वरी। कभी लिखा- सूरज के खिलाफ पुलिस में शिकायत क्यों कर दी। उससे मेरा कोई लेनादेना नहीं।

इधर मां विजयश्री अपनी बेटी आकांक्षा को ढूंढती रहीं। 23 जुलाई को कानपुर शहर आने के बाद वह रेस्टोरेंट और आकांक्षा के किराए के घर पहुंचीं, जहां वह सूरज के साथ लिव इन में रहती थी। मगर न आकांक्षा मिली, न ही उसका बॉयफ्रेंड सूरज।

दूसरी तरफ पुलिस मान रही थी कि आकांक्षा अपने बॉयफ्रेंड के साथ कहीं भाग गई है। मगर कानपुर पुलिस कमिश्नर के आदेश पर 8 अगस्त को हनुमंत विहार थाने में आकांक्षा की मिसिंग दर्ज हुई। इसके बाद बॉयफ्रेंड सूरज ने 5 सितंबर को घर खाली कर दिया। मकान मालिक ने विजयश्री को बताया कि जब सूरज घर से सामान बाहर निकाल रहा था, उस वक्त आपकी बेटी उसके साथ नहीं थी।

उन्होंने बेटी के सामान के बारे में भी पूछा। तब पता चला कि जब वो किराए पर मकान लेने आई थी, उसके साथ काले रंग का सूटकेस था, मगर बॉयफ्रेंड ने जब घर खाली किया, तब वो सूटकेस नहीं दिखा। यही वो पहला मौका था, जब मां को बॉयफ्रेंड पर शक गया। ये बात विजयश्री ने पुलिस को बताई।

आकांक्षा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मां विजयश्री के साथ तस्वीरें पोस्ट की थी।
आकांक्षा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मां विजयश्री के साथ तस्वीरें पोस्ट की थी।

मोबाइल लोकेशन में बॉयफ्रेंड फंसा, हत्या कबूल की

15 सितंबर को पुलिस ने सूरज को हिरासत में लिया। 4 घंटे की पूछताछ में सूरज लगातार यही बताता रहा- मेरा आकांक्षा से झगड़ा हुआ, इसके बाद वह घर से चली गई। मुझसे दोबारा बात नहीं हुई। वो कहां है, ये मुझे नहीं पता।

दूसरी तरफ पुलिस ने अपना होमवर्क पूरा कर लिया था। सूरज की लोकेशन 21 जुलाई की रात को कानपुर से बांदा की तरफ मूवमेंट दिखाई दे रही थी। खास बात ये थी कि आकांक्षा के मोबाइल की लोकेशन भी इस दरम्यान बांदा तक गई थी। फिर फोन स्वीच ऑफ हो गया।

जब सर्विलांस रिपोर्ट सूरज के सामने टेबल पर रखी गई, तो वह जवाब नहीं दे सका। उसने स्वीकार किया कि 21 जुलाई की रात मैंने आकांक्षा को मारकर काले रंग के सूटकेस में बांदा के पास चिल्ला घाट ले जाकर यमुना नदी में फेंका था। इसके बाद पुलिस ने 16 सितंबर को आकांक्षा को किडनैप करके मर्डर करने की FIR लिखी।

इस मामले में मां विजयश्री का कहना है कि पुलिस पहले एक्टिव हुई होती, तो मेरी बेटी की लाश मिलने में इतनी दिक्कत न हो रही होती। अब सूरज के कबूलनामा के बावजूद हमारा केस कमजोर हो गया है।

मां बोलीं- हम गरीब हैं, दोनों बेटियां जॉब करने कानपुर शहर गईं

लव स्टोरी में मर्डर की पूरी कहानी को समझने के लिए UPLIVE NEWS ने आकांक्षा की मां विजयश्री से बातचीत की। हमने पहले उनके परिवार के बारे में पूछा- उन्होंने कहा कि मेरे पति सुरेश उर्फ बच्चन लाल की 3 साल पहले मौत हो चुकी है। हमारा परिवार कानपुर देहात रूरा के सुजनीपुर गांव में रहता है।

घर में 4 बच्चे हैं, सबसे बड़ा बेटा सूरज, बेटियां प्रतीक्षा, आकांक्षा उर्फ माही और आदर्श थीं। पति की मौत के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। चूंकि हम बहुत गरीब थे, इसलिए मेरी दोनों बेटियां प्रतीक्षा और आकांक्षा कानपुर में किराए पर मकान लेकर रहने लगीं और बर्रा में गुड फूड रेस्टोरेंट में प्राइवेट जॉब करने लगीं।

फिर आकांक्षा की सूरज से दोस्ती कैसे हुई? वह कहती हैं- आकांक्षा ने मुझे बताया था कि इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती हुई थी। सूरज फतेहपुर बिंदकी के हरिखेड़ा गांव का रहने वाला है।

हमने पूछा- फिर वो बहन का घर छोड़कर सूरज के पास क्यों गई? वह कहती हैं- वो सूरज के बहकावे में पूरी तरह से थी। कहती थी कि उसी से शादी भी करूंगी। मैंने भी कभी मना नहीं किया। वो 11 जुलाई को सूरज के पास हनुमंत विहार इलाके में किराए का कमरा लेकर लिव इन में रहने लगी।

आकांक्षा अपने इंस्टाग्राम पर लगातार अपनी तस्वीरें पोस्ट करती रही थीं। हालांकि अब उसका अकाउंट ब्लॉक है।
आकांक्षा अपने इंस्टाग्राम पर लगातार अपनी तस्वीरें पोस्ट करती रही थीं। हालांकि अब उसका अकाउंट ब्लॉक है।

बॉयफ्रेंड सूरज ने पुलिस को क्या बयान दिया

मेरी दूसरी गर्लफ्रेंड की कॉल उसने देख ली

पुलिस कस्टडी में हुई पूछताछ में सूरज ने भी मर्डर की कहानी सुनाई। उसने कहा- ये 21 जुलाई की बात है। हम दोनों रेस्टोरेंट पर काम कर रहे थे। इस दौरान मेरी दूसरी गर्लफ्रेंड का VIDEO कॉल आया था। माही ने वीडियो कॉल देख लिया। वो नाराज हो गई और हम दोनों का पहले रेस्टोरेंट में ही झगड़ा हुआ। फिर घर आने पर भी काफी तू-तू, मैं-मैं हुई थी। झगड़ा इतना बढ़ गया कि उस दिन उसने मेरे ऊपर हाथ छोड़ दिया। मेरे सिर पर खून सवार हो गया। मैंने उसको पकड़कर गर्दन दबा दी। 2 मिनट बाद ही उसकी सांस टूट गई।

इसके बाद मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूं। फिर मैंने यह सब अपने दोस्त आशीष को बताई। उसने ही मुझसे कहा कि यमुना में बाढ़ आई हुई है। तुम सूटकेस में उसकी बॉडी को रख लो, फिर बाइक पर हम लोग चलते हैं, बॉडी को नदी में फेंक देंगे।

घर में ही काले रंग का सूटकेस रखा हुआ था। उसमें बॉडी को रखकर हम लोग 135 Km दूर बांदा के चिल्ला घाट पहुंचे। यहां यमुना की धारा में ट्राली बैग फेंक दिया।

सूरज ने बताया कि इसके बाद मैं घर वापस आ गया। आकांक्षा का मोबाइल मेरे पास था, उस पर उसकी बहन और मां के कॉल आ रहे थे। मैं डरा हुआ था, इसलिए सोचा कि आकांक्षा बनकर उन्हें मैसेज कर दूंगा, तो वह लोग अपनी बेटी को ढूंढेंगे नहीं।

इसलिए मैंने लिखकर भेजा कि मैं लखनऊ आ गई हूं। चिंता मत करना। रक्षाबंधन तक वापस आ जाऊंगी। मगर उसकी मां लगातार फोन किए जा रही थीं। फिर मैंने लिखकर भेजा कि बात नहीं कर सकती हूं। तब शायद उन्हें शक हो गया।

इस स्पॉट पर जब पुलिस जांच करने पहुंची, तो 2 चैलेंज सामने 

पहला – इस स्पॉट पर नदी की धारा 2 दिशा में आगे बढ़ती है। एक धारा बांदा, चित्रकूट होकर आगे बढ़ती हैं। दूसरी धारा प्रयागराज, भदोही की तरफ जाती है।

दूसरा- मर्डर 21 जुलाई को हुआ। सर्च ऑपरेशन 17 सितंबर से शुरू हुआ। पानी ज्यादा होने की वजह से बॉडी नहीं मिल सकी।

इसके बाद कानपुर पुलिस ने प्रयागराज, भदोही, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट पुलिस के साथ केस की डिटेल शेयर कीं। अब 6 जिलों के 200 पुलिसकर्मी नदी के किनारे-किनारे बॉडी की तलाश कर रहे हैं।

साथ ही, 21 जुलाई के बाद इन जिलों के थानों में मिली महिलाओं की बॉडी की डिटेल भी इकट्‌ठा की जा रही है। अभी तक पुलिस को आकांक्षा के हुलिये से मिलती जुलती कोई बॉडी नहीं मिली है। पोस्टमॉर्टम हाउस से भी डिटेल ली जा रही है। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी कहते हैं- 5 टीमों को अलग-अलग जिलों में भेजा गया है। वहां के लोकल पुलिस वालों के साथ मिलकर हम बॉडी को जल्द ढूंढ लेंगे।

मां ने कहा- मैंने सपने में उसे नदी के पास बैठे देखा

मां विजयश्री कहती हैं- 22 जुलाई की रात मैंने सपना देखा। उसमें अपनी बेटी को नदी के किनारे बैठे हुए देखा। मैं बहुत घबरा गईं। सुबह बेटी को कॉल किया तो लगातार फोन स्विच ऑफ जा रहा था। इसके बाद मैंने कानपुर में रहने वाली दूसरी बेटी प्रतीक्षा को कॉल किया। उसने भी आकांक्षा को कॉल किया। लेकिन बात नहीं हो सकी। उसे भी नहीं पता था कि वह कहां पर कमरा लेकर रहती है।

23 जुलाई को मैं कानपुर पहुंची। बर्रा थाने में बेटी के लापता होने की शिकायत दी। क्योंकि बेटी बर्रा थाना क्षेत्र के ही कान्हा फूड रेस्टोरेंट में काम करती थी। बर्रा पुलिस ने मुझे नौबस्ता थाने भेज दिया। वहां भी कोई रिस्पांस नहीं मिला। 24 जुलाई को मैंने पुलिस कमिश्नर के पास बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। वहां से मामले की जांच नौबस्ता थाने को भेज दी गई।

जब मैं नौबस्ता थाने पहुंची, तब पता चला कि रेस्टोरेंट हनुमंत विहार थाना क्षेत्र में आता है। इसके बाद मैं वहां गईं, बेटी के लापता होने की शिकायत दी। 8 अगस्त को हनुमंत विहार थाने में मेरी बेटी की गुमशुदगी दर्ज की गई।

पुलिस कमिश्नर ऑफिस के बाहर बैठी मां विजयश्री अपनी बेटी के लिए इंसाफ चाहती हैं।
पुलिस कमिश्नर ऑफिस के बाहर बैठी मां विजयश्री अपनी बेटी के लिए इंसाफ चाहती हैं।

मां ने खुद जांच करके साक्ष्य जुटाया

विजयश्री ने बताया- इधर हनुमंत विहार थाने की पुलिस 8 सितंबर को गुमशुदगी लिखकर शांत बैठ गई। दरोगा सुशील ने कहा कि किसी बॉयफ्रेंड के साथ चली गई होगी, वापस आ जाएगी। पुलिस के रवैये से झल्लाकर मैंने खुद ही कान्हा फूड रेस्टोरेंट में पूछताछ की। उन्होंने बताया कि माही ने उन्हें मैसेज भेजा था कि वह अब नौकरी नहीं करेगी, लखनऊ में दूसरी जॉब कर ली है।

मां ने कहा- फिर मैं अपनी बेटी के किराए के घर की जानकारी जुटाते हुए वहां पहुंची। दूसरे किराएदारों ने बताया कि 21 जुलाई के बाद से उन्होंने आकांक्षा को नहीं देखा था। 5 सितंबर को उसका बॉयफ्रेंड सूरज माही का पूरा सामान उठाकर ले गया और कमरा खाली कर दिया था।

मां कहती हैं- सूरज के कमरा खाली करने की बात से मेरा माथा ठनक गया। मैंने पूछा- मेरी बेटी का काले रंग का ट्रॉली बैग था कि नहीं, किराएदार ने बताया कि जब वह आई तो ट्रॉली बैग था, लेकिन जब कमरा खाली हुआ तो ट्रॉली बैग नहीं था।

मां कमरे के भीतर पहुंची तो अलमारी पर एक दीपक जल रहा था। मां को शक हो गया कि किसी के मौत के बाद ही कमरे में कोई बुरी आत्मा नहीं रहे, इस वजह से लोग दीपक जलाते हैं।

आकांक्षा जिस काले सूटकेस पर बैठी है, उसी सूटकेस में उसके बॉयफ्रेंड ने हत्या करके लाश रखी और नदी में फेंक दी थी।
आकांक्षा जिस काले सूटकेस पर बैठी है, उसी सूटकेस में उसके बॉयफ्रेंड ने हत्या करके लाश रखी और नदी में फेंक दी थी।

आकांक्षा के मोबाइल में बड़ी बहन का नाम ‘भइया’ सेव, बॉयफ्रेंड ने यही गलती की

इसके साथ ही विजयश्री ने बताया कि माही के मोबाइल में बड़ी बहन का नंबर भइया नाम से सेव था, जब इधर से आकांक्षा को मैसेज किया तो सूरज को पता नहीं था कि यह नंबर किसका है। भइया देखकर जवाब दिया कि भइया मैं लखनऊ में हूं। इससे शक और गहरा गया कि दीदी को अचानक भइया क्यों बोल रही है?

विजयश्री ने इन सभी तथ्यों के साथ अपनी शिकायत लखनऊ के 1076 पर दर्ज कराई। वहां से मामले में सख्ती बरती गई और हनुमंत विहार थाने को जांच का आदेश हुआ, तब जाकर 15 सितंबर को हनुमंत विहार थाने से कॉल आई।

इसके बाद वह थाने पहुंची और मामले में साक्ष्यों के साथ जानकारी दी। पुलिस कमरे पर पहुंची तब उसे पूरा मामला समझ आ गया कि यह कोई लव अफेयर में भागने का मामला नहीं, बल्कि मर्डर की ओर इशारा लग रहा है। इसके बाद पुलिस ने सूरज को कॉल करके पूछताछ करने के लिए बुलाया।

उधर पुलिस ने कॉल डिटेल और लोकेशन समेत अन्य तथ्य जुटा लिए थे। पुलिस ने एविडेंस के साथ पूछताछ शुरू की तो सूरज टूट गया और मर्डर केस का खुलासा कर दिया। 16 सितंबर को मां विजयश्री की शिकायत पर अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद माही की हत्या करने वाले सूरज और उसके दोस्त आशीष कुमार को भी अरेस्ट किया गया। 20 सितंबर को दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

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