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अंतराष्ट्रीय

लखनऊ में मेयर और नगर आयुक्त विवाद योगी तक पहुंचा 2 साल में पहली बार मेयर नगर निगम मुख्यालय पर लगा रहीं जनता दरबार

By admin · October 29, 2025 · 1 min read

लखनऊ नगर निगम में कार्यकारिणी के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार में अधिकारों पर चर्चा के दौरान विवाद हो गया। इसके बाद दोनों के बीच में तल्खी बढ़ गई है। मेयर सुषमा खर्कवाल ने अपने कार्यकाल में पहली बार लालबाग मुख्यालय में जनता दरबार लगाने का फैसला किया है।

अब इस विवाद की चर्चा लखनऊ के राजनीतिक गलियारे में होने लगी है। इसके साथ ही ब्यूरोक्रेसी में भी अब यह विवाद चर्चा का विषय बन गया है। नगर निगम में खुलकर यह विवाद सामने आने के बाद अधिकारी और कर्मचारी भी सावधानी बरत रहे कि कहीं इस विवाद में उनका न नुकसान हो जाए।

सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलते भाजपा विधायक योगेश शुक्ला।
सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलते भाजपा विधायक योगेश शुक्ला।

सीएम तक विधायकों ने भी दिया फीडबैक

नगर निगम की समस्याओं और विवाद को लेकर लखनऊ के विधायकों ने भी अपना फीडबैक सीएम तक दिया है। लखनऊ उत्तर से भाजपा विधायक नीरज बोरा और बक्शी का तालाब से विधायक योगेश शुक्ला ने भी नगर निगम से जुड़े विषयों पर शिकायत की है।

सरोजनीनगर से बीजेपी विधायक राजेश्वर सिंह भी बीते दिनों सीएम से मिलकर क्षेत्र की समस्याओं को सीएम से बता चुके हैं। चर्चा है कि मेयर और नगर आयुक्त के बीच में चल रहे विवाद में विधायकों ने भी नगर निगम से जुड़ा अपना फीडबैक शासन तक पहुंचाया है।

मेयर और नगर आयुक्त ने सोमवार को अकेले-अकेले निरीक्षण किया।
मेयर और नगर आयुक्त ने सोमवार को अकेले-अकेले निरीक्षण किया।

मेयर और नगर आयुक्त में सीमित बातचीत

रविवार को छठ घाटों के निरीक्षण के दौरान भी मेयर और नगर आयुक्त अलग-अलग पहुंचे, इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि निगम के शीर्ष पदों के बीच अभी स्थिति सामान्य नहीं हुई है। रविवार सुबह नगर आयुक्त गौरव कुमार ने सबसे पहले कई छठ घाटों का निरीक्षण किया। उनके साथ कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इसके कुछ घंटे बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी घाटों का निरीक्षण किया, लेकिन इस दौरान न तो नगर आयुक्त उपस्थित रहे और न ही अन्य वरिष्ठ अधिकारी नजर आए।

अधिकारियों के साथ में निरीक्षण करते नगर आयुक्त गौरव कुमार।
अधिकारियों के साथ में निरीक्षण करते नगर आयुक्त गौरव कुमार।

मेयर और नगर आयुक्त में पहले भी हुई है अनबन

मेयर और नगर आयुक्त में पहले भी दोनों के बीच में अनबन हुई है। इसमें सबसे पहले सेवानिवृत कर्मचारियों से जुड़े कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने पर मेयर सुषमा खर्कवाल भड़क गईं थी। पहले तो वे बिना बुलाए कार्यक्रम में शामिल हुईं। वहां नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को नहीं पाकर गुस्सा और बढ़ गया।

मेयर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर उनको प्रोटोकॉल का उलाहना दिया। वहीं लगे हाथों कार्यक्रम में गैरहाजिर रहने का कारण भी पूछ लिया था। सूत्र बताते हैं कि झूलेलाल पार्क में मेला लगाने के लिए नगर निगम को किराए पर जमीन देनी थी। इसमें देरी होने पर मेयर ने 3.5 लाख रुपए का नुकसान नगर निगम को कराने की बात कह दी थी। इसपर भी दोनों के बीच में अनबन हुई थी।

पूर्व नगर आयुक्त से भी रही तनातनी

मेयर सुषमा खर्कवाल का पूर्व नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह के साथ मतभेद चर्चा में रहे थे। उस समय भी मामला मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा था। हालांकि, इंद्रजीत सिंह ने स्थिति को संभालने में संतुलन रखा था और बिना दबाव के काम किया था।

गौरव कुमार भी अब उसी रास्ते पर चलते हुए नियम-कानून के मुताबिक काम कर रहे हैं, जबकि महापौर अपनी जिम्मेदारी और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश में लगी हैं। निगम के अंदर अब यह चर्चा जोरों पर लखनऊ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर इन शीर्ष लोगों के बीच बीच बढ़ती तल्खी का असर साफ तौर पर दिखने लगा है। इससे काम काज प्रभावित हो रहा है।

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