
विवाद सदन में हुए मुद्दों पर चर्चा से शुरू हुआ था। मेयर ने 4 और 9 सितंबर के पास हुए सदन के मिनट्स पर साइन नहीं किए। यहीं से विवाद बढ़ गया। निगम प्रशासन ने पुनरीक्षित बजट की कार्यकारिणी के लिए समय मांगा तो मेयर ने सामान्य कार्यकारिणी बुलाई।
कार्यकारिणी पुराने मुद्दों पर चर्चा और पुष्टि नहीं करने के कारण रद्द हो गई। इस बीच दोनों के बीच अधिकारों को लेकर लड़ाई भी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर राजनीतिक हस्तक्षेप के साथ में शासन से जुड़े अधिकारियों ने भी अपने रसूख से शांत करने की कोशिश की।
इसमें प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने भी कई बार हस्तक्षेप किया लेकिन मेयर और नगर आयुक्त के बीच सुलह नहीं हुई। मेयर ने तो पार्षदों से बात कर अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली थी। इसी बीच CM योगी ने दखल दिया तब जाकर मामला शांत हुआ।

1- पीएम मोदी और रक्षा मंत्री का लखनऊ दौरा
पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का लखनऊ दौरा इसी महीने प्रस्तावित है। रक्षा मंत्री 16 नवंबर को लखनऊ में होंगे और कई परियोजना का लोकार्पण और शिलान्यास सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी स्काउट-गाइड के जम्हूरी में हिस्सा लेने के लिए लखनऊ इसी महीने आ सकते हैं। इन सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने की जिम्मेदारी नगर निगम भी संभाल रहा है। ऐसे में इसके दो शीर्ष पदाधिकारियों के बीच चल रहे विवाद से कामकाज पर असर पड़ता। जिसके चलते मन मसोसकर दोनों को समझौता करना पड़ा।
2- प्रभारी मंत्री ने सबको साथ बुलाया, कोई हल नहीं
एक हफ्ते पहले प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने मेयर के साथ नगर निगम के अधिकारियों की बैठक ली। इसमें विधायकों को भी बुलाया। कोशिश थी कि विकास कार्यों पर बात कर मेयर और नगर आयुक्त के बीच विवाद बंद कराया जाए। बैठक में विधायकों ने अपना दर्द सुनाया तो यह साढ़े तीन घंटे तक चली। विधायकों ने यह तक आरोप लगा दिया कि मेयर उनके विधायकी क्षेत्र के कार्यों के उद्घाटन में भी नहीं बुलाती हैं। नए पनप रहे विवाद की वजह से बीच मेयर और नगर आयुक्त के बीच सुलह का मुद्दा रखा रह गया।

3- विधायकों ने सीएम से मिलकर दिया फीडबैक
विधायक योगेश शुक्ला और ओपी श्रीवास्तव ने सीएम से मिलकर लखनऊ नगर निगम से जुड़ा फीडबैक दिया। विधायक राजेश्वर सिंह पहले भी नगर निगम से जुड़ी शिकायत सीएम से कर चुके हैं। इसी के बाद वित्त मंत्री की कोआर्डिनेशन बैठक हुई। इसमें विधायकों को भी बुलाया गया। हालांकि इसमें विधायक योगेश शुक्ला, MLC मुकेश शर्मा और राम चंद्र प्रधान ही शामिल हुए। राजेश्वर सिंह के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इसके अलावा अन्य विधायकों ने बैठक से किनारा किया था। सूत्र बताते हैं कि बैठक में ही वित्त मंत्री ने कहा था कि विधायक और पार्षद तक असंतुष्ट हैं। इसे देखा जाना चाहिए।
4- शासन के जुड़े अधिकारियों ने कोशिश की
सूत्र बताते हैं कि मेयर और नगर आयुक्त में विवाद बढ़ने पर राजनीतिक हस्तक्षेप के साथ में शासन से जुड़े अधिकारियों ने भी अपने रसूख से मामले को शांत करने की कोशिश की। लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। मेयर ने भाजपा पार्षद के साथ में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की। पार्षदों को एकजुट किया। इसके बाद 13 नवंबर को कार्यकारिणी और 14 नवंबर को सदन बुलाने को कहा। नगर आयुक्त ने नियमों के तहत बोला कि सदन पुराने मुद्दे जिसपर फैसला कर चुका है। उनपर दोबारा से सदन नहीं हो सकता। इसपर मेयर ने विशेष सदन बुलाने को कहा, जिसपर भी नियमों का पेच फंसा।

5- मुख्यमंत्री योगी के हस्तक्षेप से सुलझी बात
मेयर और नगर आयुक्त के बीच विवाद 9 सितंबर को नगर निगम के सदन बैठक के बाद ही शुरू हो गया था। प्रेसवार्ता में हालात ये बन गई थी कि मेयर ने कहा कि इन मुद्दों पर फिर से चर्चा होगी। इसपर नगर आयुक्त ने कहा था कि चर्चा हो चुकी है। मेयर ने कहा था कि कई मुद्दे ऐसे रहे जिनके बारे में मुझे जानकारी नहीं तो नगर आयुक्त ने कहा था यह आपकी ही फाइल से निकला है। इसी बीच दोनों को सुलह करने का निर्देश शासन स्तर से मिला। उसके बाद तीसरी कार्यकारिणी बैठक में मेयर-नगर आयुक्त एकजुट दिखे। अब मेयर भी सदन के मिनट्स भी साइन करने को तैयार हैं।
विवाद का क्या असर होने लगा था
शहर में विकास कार्य ठप होने
विवाद के बीच शहर के कामकाज दो शीर्ष पदों के बीच में फंस गया था। इससे स्ट्रीट लाइट, पैच वर्क के लिए बढ़ा बजट, साफ सफाई सहित कई काम लटक गए थे। 15 वें वित्त और अवस्थापना का काम भी अटका पड़ा था। इस बीच पुनरीक्षित बजट नहीं होने से भी नया काम करने में दिक्कत नगर निगम को आ रही थी।

पार्षदों के बीच खींचतान मची
9 नवंबर को विवाद के बीच में मेयर ने अपने सरकारी आवास पर बीजेपी पार्षदों की बैठक बुलाई। इसमें पार्षदों ने विकास कार्य शुरू कराने का मुद्दा उठाया। करीब आधे पार्षदों ने बैठक से किनारा किया तो खींचतान मची। मेयर पार्षदों को एकजुट करने का प्रयास कर रही थीं। पार्षदों ने साथ होने की बात कही लेकिन विकास कार्य फिर से शुरू कराने के मुद्दे पर दबाव भी डाला। ऐसे में मेयर ने फिर से कार्यकारिणी और सदन के लिए पत्र नगर आयुक्त को इसके बाद भेजा था।
लखनऊ से रोहिंग्या-बांग्लादेशी निकाले जाएंगे : 5 नए वेंडिंग जोन बनेंगे, हाउस टैक्स पर 10% छूट; सीएम के समझाने पर सुलझा विवाद
CM योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच 2 महीने बाद सुलह हो गई। इसका असर कार्यकारिणी की बैठक में देखने को मिला, जहां 10 से ज्यादा विकास कार्यों को आम सहमति से पास कर दिया गया। इनमें सोलर पैनल लगाने वाले लोगों को हाउस टैक्स में 10% की छूट, रोहिंग्या-बांग्लादेशियों का सर्वे कर शहर से निकालने और पांच जोनों में मॉडल वेंडिंग जोन बनाने के महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।

