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अंतराष्ट्रीय

सहायक निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर अभी भी दस्तावेज को लेकर सस्पेंस बरकरार।

By admin · February 13, 2026 · 1 min read

एसआईआर में उलझी ‘रोटी-बेटी’ की परंपरा

मिहीपुरवा (बहराइच)भारत नेपाल की खुली सीमा और पीढ़ियों से चली आ रही ‘रोटी-बेटी’ की परंपरा पर विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसने नेपाल सीमा से सटे सीमा क्षेत्र तथा आदिवासी इलाकों को झकझोर कर रख दिया है। सीमा क्षेत्र तथा थारू बहुल गांवों में एसआईआर नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा दफ्तरों के सामने फूट पड़ा है। लोगों का कहना है।

कई जगह सहायक निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर दिन भर अफरा-तफरी का माहौल रहा। अशिक्षित और सीमांत ग्रामीण बार बार दफ्तरों के चक्कर काटते दिखे। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो एसआईआर की स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि किन हालात में कौन-से दस्तावेज मान्य होंगे।

ग्रामीणों के मुताबिक, नोटिस में महिलाओं से विवाह से पूर्व वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम, नागरिकता से जुड़े प्रमाण और अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि इन गांवों में बड़ी संख्या में शादियां नेपाल में हुई हैं, जहां ऐसे भारतीय अभिलेखों का होना स्वाभाविक ही नहीं है।

ग्रामीण महेश कुमार ने बताया कि बीएलओ ने साफ कहा है दिल्ली से नागरिकता प्रमाण पत्र लाओ, तभी नाम जुड़ेगा।वहीं अमरपाल ने कहा कि उनकी शादी करीब 40 वर्ष पहले नेपाल में हुई थी। “भारत और नेपाल का रिश्ता हमेशा रोटी-बेटी का रहा है, लेकिन अब वही रिश्ता संदेह के घेरे में डाल दिया गया है। नेपाल से ब्याही गई पम्मी देवी का मामला भी सवाल खड़े करता है।

उनकी शादी वर्ष 2013 में हुई थी। वे पिछले पंचायत चुनाव में वार्ड नंबर 45 से क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनी गईं और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में मतदान भी कर चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें एसआईआर की नोटिस थमा दी गई। पम्मी देवी ने बताया कि वे नेपाल से पिता की नागरिकता और नेपाली मतदाता पहचान पत्र लेकर आई थीं, लेकिन इन्हें अमान्य बताया जा रहा है। अब और कौन-सा प्रमाण दें? यह सवाल हज़ारों महिलाओं की चिंता बन गया है।

सीमा से सटे इन आदिवासी गांवों में एसआईआर अब केवल मतदाता सूची का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि पहचान, सम्मान और पीढ़ियों पुराने सामाजिक रिश्तों की परीक्षा बन गया है। स्पष्ट नीति और मानवीय दृष्टिकोण के बिना यह अभियान ग्रामीणों के लिए डर और असमंजस का कारण बनता जा रहा है।

इस विशेष सधन पुनरीक्षण एस आई आर की भाग दौड़ से नेपाल से ब्याह कर आई महिलाओं में भारी आक्रोश है। सभी को यह समझ नहीं आ रहा है की कौन से दस्तावेज उपलब्ध करायें जिससे उनका नाम एस आई आर में शामिल हो सके। अभी उन महिलाओं के लिए भी बड़ी समस्या उत्पन्न हो रही है। जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है।

जिनकी शादियां भारत में 30 ,40 साल पहले हो चुकी और उनके माता-पिता का दस्तावेज न मिलने से परेशान हैं। उन महिलाओं से भी उनके माता-पिता का दस्तावेज मांगा जा रहा है। जबकि उन सबका आधार परिवार रजिस्टर नकल निवास आय जाति जैसे कई दस्तावेज उपलब्ध है। उनके परिवार के बच्चे भी बड़े हो चुके हैं। किंतु मायके के माता-पिता का रिपोर्ट न मिलने के कारण अभी उनके लिए भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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