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भारत-नेपाल रूपईडीहा सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 42वीं वाहिनी ने मानव तस्करी के एक संदिग्ध प्रयास को विफल कर दिया है।

March 26, 2026 · admin · 1 मिनट पढ़ें

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भारत-नेपाल रूपईडीहा सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 42वीं वाहिनी ने मानव तस्करी के एक संदिग्ध प्रयास को विफल कर दिया है। इस कार्रवाई में एक नाबालिग लड़की को सुरक्षित बचाया गया। यह सफलता कमांडेंट श्री गंगा सिंह उदावत के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे मानव तस्करी विरोधी अभियान के तहत मिली।

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घटना 25 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 12:30 बजे की है। 42वीं वाहिनी की विशेष खुफिया इकाई को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि चकिया मोड़ बस स्टैंड पर एक संदिग्ध लड़का और एक नाबालिग लड़की मौजूद हैं। सूचना मिलते ही सहायक उप निरीक्षक तपन बरुआ के नेतृत्व में एक टीम को तुरंत बस स्टैंड भेजा गया।

टीम ने चकिया मोड़ (प्राइवेट) बस स्टैंड पर पहुंचकर दोनों संदिग्धों की पहचान की और उनसे पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने खुद को भाई-बहन बताया, लेकिन अलग-अलग गांवों का नाम बताने पर एसएसबी जवानों को संदेह हुआ।

संदेह गहराने पर दोनों को आगे की पूछताछ के लिए कैंप लाया गया। रुपैडिहा के समवाय प्रभारी के निर्देश पर मानव तस्करी रोधी इकाई (AHTU) और एनजीओ “देहात इंडिया” की मौजूदगी में उनसे गहन पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान उनके बयान लगातार बदलते रहे और वे एक-दूसरे के परिवार के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाए। बाद में लड़के ने बताया कि वह लड़की को पुणे में अपने माता-पिता के पास ले जा रहा था।

जांच के दौरान लड़की के परिजनों से संपर्क किया गया, जिन्होंने बताया कि वह घर से बिना बताए किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई थी। लड़के के परिजनों ने भी लड़की के बारे में किसी भी जानकारी से इनकार किया।

बयानों में विरोधाभास और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर एसएसबी ने इसे मानव तस्करी का संदिग्ध मामला मानते हुए नाबालिग लड़की को सुरक्षित बचा लिया।

बचाई गई नाबालिग लड़की को बाद में नेपाल स्थित एनजीओ “शांतिपूर्ण स्थापना गृह” को सौंप दिया गया। संदिग्ध युवक को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए नेपाल पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

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