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अंतराष्ट्रीय

17 जनवरी 1977। देश में आपातकाल का आखिरी दौर था। इंदिरा गांधी ने लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा कर दी। तब के रक्षामंत्री बाबू जगजीवन राम ने ?

By admin · May 2, 2024 · 1 min read

21 अगस्त 1978 को बाहरी दिल्ली के मोहन नगर इलाके में मोहन मीकिन प्लांट के गेट के सामने एक एक्सीडेंट हुआ। मर्सिडीज कार ने एक व्यक्ति को कुचल दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी अपनी किताब ‘हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में लिखती हैं कि उस मर्सिडीज कार के भीतर सिर्फ दो लोग थे- एक लड़का और एक लड़की। दोनों को आशंका की थी कि भीड़ उन्हें पीटने लगेगी।

ड्राइविंग कर रहे लड़के ने गाड़ी मोहन मीकिन प्लांट के अंदर दौड़ा दी। चौकीदार ने इंटरकॉम से प्लांट के मैनेजर अनिल बाली को सूचना दी कि एक कार एक्सीडेंट करके प्लांट में घुस रही है। अनिल ने मर्सिडीज से उतरते लड़के को झट से पहचान लिया। वो तत्कालीन रक्षामंत्री बाबू जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम थे। कार में बैठी लड़की सुरेश राम की गर्लफ्रेंड थी।

इसी मर्सिडीज कार से सुरेश राम का एक्सीडेंट हुआ था, जिसे बाद में जगजीवन राम के आवास से बरामद किया गया।
इसी मर्सिडीज कार से सुरेश राम का एक्सीडेंट हुआ था, जिसे बाद में जगजीवन राम के आवास से बरामद किया गया।

इस घटना के बाद खुली सेक्स स्कैंडल की एक कहानी। पॉलिटिकिल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर बेटे सुरेश राम का ये सेक्स स्कैंडल सामने नहीं आता, तो शायद 1980 के दशक में ही जगजीवन राम के रूप में देश को पहला दलित प्रधानमंत्री मिल गया होता।

इमरजेंसी के बाद इंदिरा से नाता तोड़ा, PM की रेस में थे जगजीवन राम

17 जनवरी 1977। देश में आपातकाल का आखिरी दौर था। इंदिरा गांधी ने लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा कर दी। तब के रक्षामंत्री बाबू जगजीवन राम ने 25 जनवरी 1977 को इंदिरा से मिलने का समय मांगा। 1 फरवरी की शाम 5 बजे PMO से बुलावा आया और इंदिरा और बाबू जगजीवन राम की मीटिंग हुई।

बाबूजी के नाम से मशहूर बाबू जगजीवन राम ने इंदिरा से कहा कि अगर हमें चुनाव जीतना है तो इमरजेंसी के दाग को मिटाना होगा। इसके लिए दमनकारी पाबंदियां हटा लेना चाहिए। प्रेस काे लिखने की आजादी देना चाहिए। इतना ही नहीं, हमें इमरजेंसी में बंद सारे राजनैतिक कैदियों को रिहा कर देना चाहिए।

किताब ‘जगजीवन अभिनंदन ग्रंथ’ के संपादक डीएन तिवारी लिखते हैं कि इंदिरा गांधी ने बाबूजी की नहीं सुनी। इस मीटिंग के तीन दिन बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

जगजीवन राम इंदिरा के आपातकाल के धुर विरोधी थे। जानकारों का मानना है कि 1977 में इंदिरा को हराने में उनकी बड़ी भूमिका थी।
जगजीवन राम इंदिरा के आपातकाल के धुर विरोधी थे। जानकारों का मानना है कि 1977 में इंदिरा को हराने में उनकी बड़ी भूमिका थी।

प्रधानमंत्री बनने की रेस में आगे थे बाबू जगजीवन राम

इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव के नतीजे आने से पहले एक ज्योतिष ने इंदिरा गांधी से कहा- मैडम ग्रह-नक्षत्र कहते हैं कि आप दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगी। एक ज्योतिष ऐसी ही एक भविष्यवाणी चौधरी चरण सिंह के बारे में भी कर चुके थे। उधर जनता पार्टी के कई नेता अपनी जन्मपत्री पंडितों को दिखा चुके थे।

जब नतीजे आए तो जनता पार्टी जीत गई। इसमें सबसे बड़ा गुट भारतीय जनसंघ का था, जिसने 93 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जनसंघ ने कहा था कि PM पद के लिए उसकी पहली पसंद बाबू जगजीवन राम हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे बेहद अनुभवी हैं। उन्होंने कांग्रेस के साथ हर विभाग में काम किया है। वे सभी सहयोगियों को मनाकर पांच साल तक सरकार चला लेंगे।

ये बात मोरारजी देसाई को खटकी तो उन्होंने भी जयप्रकाश नारायण के सामने PM पद का दावा ठोंक दिया। उधर दूसरे सबसे बड़े दल भारतीय लोक दल (बीएलडी) की 71 सीटें थीं, जिसमें से अधिकांश नेता चौधरी चरण सिंह की मुट्‌ठी में थे। यही कारण था कि चरण सिंह को लगता था कि वो PM बन जाएंगे।

जब कुर्सी के लिए झगड़ा हुआ तो सभी सहयोगी दलों के नेताओं ने जेपी से कहा कि आप जिसे चुनेंगे हम उसे नेता मान लेंगे। 1977 में बनी जनता सरकार पर किताब लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार जर्नादन ठाकुर अपनी किताब ‘ऑल जनता मैन’ में लिखते हैं कि जेपी व्हील चेयर पर आए और उन्होंने कहा कि संविधान में दो PM बनाने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई तो मेरी सलाह पर काम करने का वादा कर रहा है। ये बोलते हुए जेपी भावुक हो गए और अपना चश्मा उतारकर आंसू पोंछते हुए उन्होंने मोरारजी देसाई को जनता सरकार PM घोषित कर दिया।

जनता पार्टी सरकार में PM पद के तीन दावेदार थे मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम (सबसे दाएं), लेकिन PM बने मोरारजी।
जनता पार्टी सरकार में PM पद के तीन दावेदार थे मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम (सबसे दाएं), लेकिन PM बने मोरारजी।

ये खबर जब बाबू जगजीवन राम तक पहुंची तो वे अपने घर 6 कृष्ण मेनन मार्ग पर घायल शेर की तरह इधर से उधर घूम रहे थे। जर्नादन ठाकुर लिखते हैं कि इस बीच जगजीवन राम फर्नीचर को गुस्से से लात मार रहे थे। नौकरों पर चिल्ला रहे थे। बार-बार जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि ये विश्वासघात है…ये धोखा है।

जनता पार्टी के कई नेता उन्हें मनाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपी ने कहलवाया है कि वे जो भी मंत्रालय चाहेंगे उन्हें दे दिया जाएगा। गुस्से से लगभग चीखते हुए जगजीवन राम ने कहा जेपी कौन होते हैं मुझे कुछ देने वाले। जेपी ने पटना से दिल्ली संदेश भेजा कि आपके सहयोग के बिना भारत निर्माण नहीं हो पाएगा।

आखिरकार चार दिन की नाराजगी के बाद जगजीवन राम मान गए। इस तरह से 1977 में पहली बार PM पद उनके पास आकर चला गया। जब मोराजी देसाई सरकार नहीं चला पाए तो चरण सिंह को PM बनाया गया। इसके बाद चरण सिंह को भी भरोसा नहीं था कि वे बहुमत साबित कर पाएंगे। ऐसे में जगजीवन राम को पक्का विश्वास था कि अब उनका समय आ गया है। वे PM होंगे और आसानी से बहुमत साबित कर देंगे। कुल मिलाकर वे PM पद की कुर्सी के बेहद नजदीक थे।

बाबू जगजीवन राम जो PM पद के नजदीक चार बार पहुंच गए थे। चौथी बार बेटे के स्कैंडल ने उनका सपना तोड़ दिया था।
बाबू जगजीवन राम जो PM पद के नजदीक चार बार पहुंच गए थे। चौथी बार बेटे के स्कैंडल ने उनका सपना तोड़ दिया था।

जगजीवन राम के बेटे सुरेश राम का सेक्स स्कैंडल, न्यूड फोटो की 3 थ्योरी

ऊपर हमने एक मर्सिडीज कार के एक्सीडेंट का किस्सा सुनाया, जिसमें सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड सवार थे। इसके अगले ही दिन सुरेश राम ने दिल्ली के कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई। इसके बाद देश के सामने उस सेक्स स्कैंडल की कहानी सामने आई, जिसने बाबू जगजीवन राम के PM पद की दावेदारी को बट्टा लगा दिया।

सूर्या मैगजीन ने सुरेश राम के सेक्स स्कैंडल को कवर स्टोरी बनाया था। उनकी कई न्यूड तस्वीरें भी प्रकाशित की गई थीं।
सूर्या मैगजीन ने सुरेश राम के सेक्स स्कैंडल को कवर स्टोरी बनाया था। उनकी कई न्यूड तस्वीरें भी प्रकाशित की गई थीं।

न्यूड फोटो की पहली कहानी,

सुरेश राम ने FIR में लिखवाया कि 20 अगस्त 1978 को दर्जनभर बदमाशों ने उन्हें किडनैप कर लिया था। नई दिल्ली में दो टैक्सी बहुत देर से उनकी मर्सिडीज बेंज कार का पीछा कर रही थीं। जब निगम बोध घाट का सुनसान इलाका आया तो दोनों टैक्सियों ने मर्सिडीज को ओवरटेक कर रोक लिया। सामने आते ही टैक्सी में सवार लोगों ने रिवॉल्वर अड़ा दी।

बदमाशों ने कार का दरवाजा खोला। सामने बैठी लड़की को पीछे बैठा लिया। वो सुरेश को जबरदस्ती दिल्ली से सटे UP के मोदी नगर इलाके में ले गए। इसके बाद सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड को एक स्कूल के कमरे में ले जाया गया। उन्हें तब तक पीटा गया जब तक वे बेहोश नहीं हो गए। इसके बाद बदमाशों ने सुरेश को बताया कि उनकी और लड़की की नग्न अवस्था में फोटो ली गई हैं।

न्यूड फोटो की दूसरी कहानी नीरजा चौधरी अपनी किताब में लिखती हैं कि राजनारायण के आदमी ओम पाल सिंह को पता था कि सुरेश की गर्लफ्रेंड दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट थी। वह जाट कम्युनिटी से आती थी। सुरेश राम जब भी उसके साथ अंतरंग पलों में होते थे, अपने पोलरॉइड कैमरे से उसकी न्यूड फोटोज लेते थे। पोलरॉइड कैमरा वह होता है, जिसमें हाथोंहाथ प्रिंट बाहर आ जाता है। ओम पाल को पता था कि सुरेश की कार के ग्लव बॉक्स में वो नग्न तस्वीरें हैं। जब पीछा करने के दौरान टैक्सी अड़ाकर जैसे ही सुरेश राम की कार ओम पाल ने रोकी, उसने तुरंत सुरेश की कार से वो न्यूड तस्वीरें निकाल लीं।

न्यूड फोटो की तीसरी कहानी, 23 अगस्त 1978 को राजनारायण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आपके दोनों आदमी जेल में हैं। यह तस्वीरें उनको कैसे मिलीं। राजनारायण ने बताया कि ओम पाल जब सुरेश से मिले तो उन्होंने सिगरेट मांगी। सिगरेट कार के आगे वाले ग्लव बॉक्स में रखी थी। जैस ही सुरेश ने बॉक्स खोला, सिगरेट के पैकेट के साथ कई तस्वीरें नीचे गिर गईं। उन्हें ओम पाल ने तुरंत उठा लिया।

घबराए सुरेश ने इसके बदले में ओम पाल को पैसे देने का लालच दिया। ओम पाल लालच में नहीं आए और उन्होंने तस्वीरें नहीं लौटाईं। राजनारायण ने पत्रकारों से कहा कि अगर आप सड़क पर नंगे दौड़ रहे हैं तो ये नहीं कह सकते हैं कि ये आपका निजी मामला है।

चौधरी चरण सिंह के साथ उनके करीबी राजनारायण की तस्वीर। कहा जाता है कि चरण सिंह किसी भी तरह जगजीवन राम को PM नहीं बनने देना चाहते थे।
चौधरी चरण सिंह के साथ उनके करीबी राजनारायण की तस्वीर। कहा जाता है कि चरण सिंह किसी भी तरह जगजीवन राम को PM नहीं बनने देना चाहते थे।

बेटे की तस्वीरें खरीदने के लिए राजनारायण से मिले जगजीवन राम

खैर हम आपको आगे की कहानी बताते हैं, जब वो तस्वीरें ओम पाल के पास आईं तो आगे क्या हुआ। लगभग 40 तस्वीरें लेकर ओम पाल सीधे राजनारायण के पास पहुंचे। उसी रात राजनारायण और बाबू जगजीवन राम की एक मीटिंग कपिल मोहन के घर पर फिक्स हुई। कपिल मोहन वो उद्योगपति थे, जिनकी इंदिरा गांधी ही नहीं जगजीवन राम, अटल बिहारी वाजपेयी और PM मोरारजी देसाई सहित सभी नेताओं से अच्छी बनती थी।

अनिल बाली, कपिल मोहन के भतीजे थे। अनिल ने कहा, ‘बाबूजी राजनारायण को मनाने आए थे।’ दरअसल ये मनाने-रूठने की बात नहीं थी। जगजीवन राम अपने बेटे सुरेश और उनकी गर्लफ्रेंड की न्यूड फोटोज का सौदा करने आए थे। जैसे ही जगजीवन राम कपिल मोहन के बंगले पर पहुंचे, उन्हें चाय-कॉफी ऑफर किया गया। जगजीवन राम का मूड खराब था। उन्होंने कुछ नहीं लिया। रात पौने बारह बजे तक चली मीटिंग में राजनारायण और जगजीवन राम की अकेले में बीस मिनट बातचीत हुई।

बेटे सुरेश के साथ जगजीवन राम की तस्वीर।
बेटे सुरेश के साथ जगजीवन राम की तस्वीर।

जगजीवन राम को छोड़ने के बाद जब कपिल मोहन लौटकर आए तो राजनारायण ने कहा, ‘ये आज काबू में आए।’ जगजीवन राम ने राजनारायण से कहा- मैं आपको कुछ भी देने को तैयार हूं। आप चाहे जितना पैसा मांग लीजिए। चाहें तो किसी राज्य का CM बना सकता हूं। मैं PM बनने वाला हूं किसी को मंत्री बनाना है तो बताना। बस वो तस्वीरें मुझे वापस कर दीजिए। जगजीवन राम के खुले ऑफर के बाद भी राजनारायण पिघले नहीं और दोनों के बीच कोई डील नहीं हो सकी।

संजय गांधी ने कहा- आधी रात को आप मुझे पोर्नोग्राफ दिखाने आए हैं

इसके बाद राजनारायण ने कुछ फोटो कपिल मोहन को दीं और बाकी अपने पास रख लीं और वे निकल गए। रात के साढ़े 12 बज रहे थे। कपिल ने अपने भतीजे अनिल बाली को बुलाया और कहा कि इन फोटो को तुरंत संजय गांधी के पास ले जाओ। रात एक बजे अनिल इंदिरा गांधी के घर पहुंचे। संजय गांधी को जगाया। नाराज संजय गांधी चिल्लाते हुए अनिल से बोले- ये कोई आने का वक्त है? फिर अनिल ने संजय को सुरेश राम के एक्सीडेंट और न्यूड फोटो वाली बात बताई।

संजय गांधी ने कहा- तो क्या आप मुझे पोर्नोग्राफी दिखाने आए हैं। अनिल ने कहा- ये पोर्नोग्राफी नहीं सुरेश राम हैं। ये सुनते ही संजय गांधी चुप हो गए। वो अंदर गए और उन्होंने अपनी मां इंदिरा गांधी को उठाया। इंदिरा अपने कमरे से बाहर आईं। उन्होंने अनिल से पूछा- इन तस्वीरों के बारे में और कौन-कौन जानता है? अनिल बोले- ओम पाल सिंह और केसी त्यागी। संजय ने अनिल से कहा कि दोनों को सुरक्षित जगह पर ले जाओ। आखिरकार उस समय जगजीवन राम रक्षा मंत्री थे। वे चाहते तो इंदिरा गांधी के घर पर छापा मारकर तस्वीरें जब्त भी कर सकते थे, हालांकि उन्होंने ऐसा नहीं किया।

इंदिरा गांधी के साथ जगजीवन राम। दावा किया जाता है कि जगजीवन राम न्यूड फोटो सार्वजनिक न करने के बदले कांग्रेस जॉइन करने को तैयार हो गए थे।
इंदिरा गांधी के साथ जगजीवन राम। दावा किया जाता है कि जगजीवन राम न्यूड फोटो सार्वजनिक न करने के बदले कांग्रेस जॉइन करने को तैयार हो गए थे।
और बाबूजी ने टोपी कृष्णकांत के पैरों में रख दी

लेखक और राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी अपनी किताब “हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में लिखती हैं कि अगले दिन 22 अगस्त 1978 को सुबह 9 बजे पुराने कांग्रेसी और उस समय जनता पार्टी के सांसद कृष्णकांत परिवार के साथ अपने सरकारी बंगले पर नाश्ता कर रहे थे। इतने में टेलीफोन की घंटी बजी। फोन रक्षा मंत्री के घर से था। वो बात करने के लिए बेडरूम में गए। उधर से आवाज जानी पहचानी थी। ये आवाज बाबू जगजीवन राम की थी। कृष्णकांत उनके पुराने दोस्त थे। ये वो थे जिन पर जगजीवन राम आंख बंद करके भरोसा करते थे। जगजीवन राम ने फोन पर कृष्णकांत से कहा, ‘एक और बेटे ने अपने बाप को डुबो दिया।’

10 मिनट बाद कृष्णकांत के घर पर रक्षा मंत्री के घर से कार आई और वो उसमें बैठकर जगजीवन राम के घर 6, कृष्ण मेनन मार्ग चले गए। जैसे ही कृष्णकांत पहुंचे, जगजीवन राम ने रूम में बैठे हर शख्स से कहा कि यहां से चले जाइए। जब रूम में दोनों अकेले थे तो जगजीवन राम उठे और अपनी गांधी टोपी को उतारकर कृष्णकांत के पैरों में रख दिया और कहा, ‘अब मेरी इज्जत आपके हाथों मे है।’ उन्हें जगजीवन राम ने सुरेश का पूरा किस्सा बताया।

मीडिया को सेट कर लिया, लेकिन मेनका गांधी ने छाप दी तस्वीरें

कृष्णकांत ने मीडिया को मैनेज करने में जगजीवन राम की मदद की। दरअसल, अब तक सभी अखबार के दफ्तरों में सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड की न्यूड तस्वीरों की कॉपी भेजी जा चुकी थीं। केवल इंडियन एक्सप्रेस ने एक पीस लिखा, बाकी मीडिया मैनेज हो गया था। ये वो समय था जब संजय गांधी की पत्नी मेनका ने ‘सूर्या’ नाम की मैगजीन शुरू की थी।

सूर्या मैगजीन ने सुरेश राम और उनकी गर्लफ्रेंड की खबर को कवर पेज पर तो जगह दी ही, पूरी खबर आठ पेजों में छापी। इसमें दो पेज में न्यूड तस्वीरें थीं। राजनारायण के अलावा सुरेश राम की पत्नी कमलजीत कौर का इंटरव्यू भी छापा। सूर्या मैगजीन ने इस खबर को सनसनीखेज बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मैगजीन में लिखा था कि सुरेश राम एक शादीशुदा 42 वर्षीय पब्लिक फिगर हैं। उनकी पत्नी है। एक बढ़ती बेटी है और उनकी गर्लफ्रेंड की उम्र केवल 20 साल है।

1978 में प्रिंट मीडिया में इस तरह की सामग्री आने से सूर्या मैगजीन का यह एडिशन ब्लैक में बिका था।
1978 में प्रिंट मीडिया में इस तरह की सामग्री आने से सूर्या मैगजीन का यह एडिशन ब्लैक में बिका था।

इस स्कैंडल के छपने के बाद सूर्या मैगजीन की कॉपियां ब्लैक में बिकीं। मैगजीन की बिक्री बढ़ गई, लेकिन बाबू जगजीवन राम का सार्वजनिक जीवन बैठ गया। स्कैंडल के छपते ही बाबू जगजीवन राम का PM बनने का सपना भी टूट गया।

हालांकि, इससे पहले बाबू जगजीवन राम ने इंदिरा गांधी के पास खुशवंत सिंह के मार्फत संदेश भी भिजवाया था कि उनके राजनीतिक करियर को बचाने के लिए सुरेश की तस्वीरें सूर्या मैगजीन और नेशनल हेराल्ड में न छापी जाएं।

खुशवंत सिंह अपनी जीवनी ‘ट्रुथ, लव एंड लिटिल मेलिस’ में लिखते हैं- दोपहर में मेरी टेबल पर एक लिफाफा आया, जिसमें सुरेश राम और उसकी प्रेमिका के न्यूड फोटो थे। उसी शाम को जगजीवन राम का एक आदमी मेरे पास आया और बोला कि ये तस्वीरें अगर सूर्या और नेशनल हेराल्ड में नहीं छापी गईं तो बाबूजी इंदिरा गांधी के खेमे में आ सकते हैं। खुशवंत लिखते हैं कि मैं ये संदेश लेकर इंदिरा गांधी के पास गया। इंदिरा ने कहा कि मेरा उस आदमी पर जरा सा भी भरोसा नहीं है। वो पहले जनता पार्टी छोड़कर हमारी तरफ आए तब मैं फोटो छपने से रोकूंगी। हालांकि, इंदिरा ने ऐसा कुछ नहीं किया और वो तस्वीरें सूर्या मैगजीन में छप गईं।

सूर्या मैगजीन की संपादक मेनका गांधी, संजय गांधी की पत्नी और इंदिरा की बहू थीं। ये तस्वीर संजय और मेनका की शादी की है।
सूर्या मैगजीन की संपादक मेनका गांधी, संजय गांधी की पत्नी और इंदिरा की बहू थीं। ये तस्वीर संजय और मेनका की शादी की है।

क्या साजिश में शामिल थे चरण सिंह, राजनारायण और इंदिरा गांधी

न्यूड फोटो स्कैंडल का उद्देश्य बाबू जगजीवन राम को PM बनने से रोकना था। इसमें चौधरी चरण सिंह, राजनारायण और इंदिरा गांधी शामिल थे। चौधरी चरण सिंह और इंदिरा गांधी दोनों जानते थे कि PM पद के अगले उम्मीदवार बाबू जगजीवन राम ही थे। बाबू जगजीवन राम की दलित नेता की छवि और प्रशासनिक क्षमता से इंदिरा बहुत डरती थीं। इंदिरा जानती थीं कि यदि एक बार बाबूजी PM बन गए तो हटेंगे नहीं।

इंदिरा ने 1946 से अपने पिता जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बाबूजी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में देखा था। वे 31 साल से केंद्र में मंत्री थे। संचार, खाद्य, कृषि और रक्षा जैसे कई मंत्रालयों को वे संभाल चुके थे। जब 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया। तब भी जगजीवन राम का नाम PM पद के रूप में चर्चा में आया था। तब भी इंदिरा को उनके कुछ विश्वास पात्रों ने सलाह दी थी कि बाबू जगजीवन राम को केयर टेकर PM तो बनाया ही जा सकता है।

फिर भी इंदिरा ने बाबूजी को PM बनाने का जोखिम नहीं लिया था। वो जानती थीं कि राजनीति में अस्थायी व्यवस्था जैसा कुछ नहीं होता है। इंदिरा ये बात जानती थीं कि दलितों के मसीहा को एक बार PM बनाकर कुर्सी से उतारना मुश्किल होगा। यदि ऐसा किया तो कांग्रेस से सदा के लिए दलित वोट छिटक जाएगा।

1977 में जब जनता पार्टी सत्ता में आई तब भी PM पद के तीन उम्मीदवार मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम थे। तब भी जनता पार्टी के ज्यादातर लोग बाबूजी को PM बनता हुआ देखना चाहते थे, लेकिन जेपी के वीटो के आगे मोरारजी PM आवास की दौड़ जीत चुके थे।

अब लौटते हैं 1978 पर। जनता सरकार के एक साल बाद ही उसमें जबरदस्त कलह शुरू हो गई थी। जगजीवन राम को लग रहा था कि अब उनका वक्त शुरू हो गया है। वे जल्द ही PM बन जाएंगे। ये बात उन्होंने राजनारायण से न्यूड फोटोज की सौदेबाजी करते हुए भी कही थी। राजनारायण नहीं माने और उन्होंने चौधरी चरण सिंह के कहने पर बाबूजी का सपना तोड़ दिया

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