Skip to content
September 6, 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
मां को गालियां दीं, लेकिन मैं उन्हें माफ करता हूं… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी की देश से बड़ी अपील, राष्ट्रपति ने पेपर लीक कानून संशोधन को दी मंजूरी, राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतों का रास्ता साफ *RBI का नया नियम : अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर देना होगा एकसमान ब्याज, चाहे सरकारी हो या प्राइवेट… अब चढ़ावा आठ सदस्यीय निगरानी टीम के हवाले, नई व्यवस्था 25 जुलाई से लागू विदिशा ट्रस्ट ने ‘वाइब्रेंट विदिशा’ के 15वें संस्करण का आयोजन किया; लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र स्थित हुसड़िया चौराहे के पास एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल कम डालने के आरोप को लेकर विवाद हिंसक हो गया। बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में मोहर्रम का जुलूस देख रहे एक युवक पर पुरानी रंजिश के चलते चाकू से हमला किया गया। विश्व योग दिवस पर प्रेरणा वाटिका पार्क में हुआ भव्य योग कार्यक्रम।
anya

स्वरा भास्कर के बयान पर पूर्व MLC बृजेश सिंह का पलटवार, बोले- इतिहास को उस दौर के संदर्भ में समझना जरूरी –

September 5, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

जौहर को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर के बयान के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज होती नजर आ रही है। स्वरा भास्कर के बयान पर पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने तीखी प्रति…

जौहर को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर के बयान के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज होती नजर आ रही है। स्वरा भास्कर के बयान पर पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने जौहर को आज के नैतिक और सामाजिक नजरिए से देखने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मध्यकालीन इतिहास को समझने के लिए उस समय की सामाजिक, राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

बृजेश सिंह ने अपने पोस्ट में जौहर के साथ राजपूतों की ‘साका’ परंपरा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब किसी युद्ध में हार तय हो जाती थी, तब महिलाओं और पुरुषों के सामने परिस्थितियां बेहद कठिन होती थीं। ऐसे में उस दौर में लिए गए फैसलों को केवल आज की सोच के आधार पर परखना उचित नहीं होगा।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जौहर का महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उनके मुताबिक उस दौर की महिलाओं के फैसले को केवल कायरता, अंधविश्वास या पितृसत्तात्मक सोच का परिणाम बताना भी इतिहास को एकतरफा नजरिए से देखने जैसा है। बृजेश सिंह ने अपने पोस्ट में मध्यकालीन युद्धों और चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युद्ध में हार के बाद महिलाओं के सामने कैद, अपहरण, जबरन विस्थापन और हिंसा जैसे संभावित खतरे मौजूद रहते थे।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां रही होंगी, जिनमें कुछ महिलाओं को दुश्मन की कैद में जाने के बजाय मौत को बेहतर विकल्प मानना पड़ा। उनके मुताबिक जौहर की चर्चा में इस सवाल और उस समय की परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है। पूर्व एमएलसी ने कहा कि किसी ऐतिहासिक घटना को उसके संदर्भ में समझने का मतलब उसका समर्थन या महिमामंडन करना नहीं है। जौहर को उन्होंने एक भयावह और दुखद घटना बताया, लेकिन साथ ही कहा कि उस घटना को समझने के लिए तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।उन्होंने यह भी कहा कि जौहर की चर्चा करते समय महिलाओं के फैसले के साथ-साथ उस दौर के युद्धों और हिंसा को भी समान रूप से समझना चाहिए।

उनके मुताबिक इतिहास को केवल आज के नजरिए से देखने के बजाय उस समय की परिस्थितियों और लोगों की मानसिकता को समझने की कोशिश करनी चाहिए। स्वरा भास्कर के बयान और अब बृजेश सिंह की प्रतिक्रिया के बाद जौहर को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एक तरफ जहां जौहर को लेकर आधुनिक नजरिए से सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे मध्यकालीन परिस्थितियों और ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की बात कही जा रही है। फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है।

div

Source: Filmitics

शेयर करें:

संबंधित खबरें

और खबरें

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *