स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामला अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके समर्थन और विरोध की तस्वीर भी सा…
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामला अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके समर्थन और विरोध की तस्वीर भी सामने आने लगी है। अगर स्वतंत्र भारद्वाज को हाथ भी लगाया… तो हम चुप नहीं बैठेंगे, घरों से बाहर निकल आएंगे!” ये वो खुली चेतावनी है, जिसने दिल्ली से लेकर सोशल मीडिया तक खलबली मचा दी है। जंतर-मंतर पर हुए विवाद और निशु आजाद केस के बाद, जब दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज पर शिकंजा कसा, तो उनके समर्थन में सबसे बड़ी और आक्रामक आवाज बनकर उभरे हैं हिंदूवादी नेता अभिषेक ठाकुर। अभिषेक ठाकुर ने साफ-साफ कह दिया है कि स्वतंत्र भारद्वाज ने जो कुछ भी किया, वो सिर्फ आत्मरक्षा यानी ‘Self-defence’ में किया था । लेकिन पुलिस राजनीतिक दबाव में एकतरफा कार्रवाई कर रही है। सिर्फ इतना ही नहीं, अभिषेक ने तो विरोधियों को “कीड़े-मकोड़े” तक कह डाला और एक ऐसी बात कह दी, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है!
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अभिषेक ठाकुर का कहना है कि—”अगर सरकार बिना वर्दी के भी सिर्फ एक दिन का मौका दे दे, तो हम इन विरोधियों से ठीक से निपटना जानते हैं।” उन्होंने साफ किया कि वो और स्वतंत्र कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं और इस लड़ाई में वो पीछे नहीं हटेंगे।अब एक तरफ जहां कुछ संगठन स्वतंत्र भारद्वाज पर SC-ST Act के तहत सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं अभिषेक ठाकुर के इस बयान ने माहौल को और गरमा दिया है। और अब ये मामला दलित बनाम ब्राह्मण होता जा रहा है ,,,वहीं आरक्षण हटाओ आंदोलन से जुड़े शुभम सिंह भी स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में उतरते दिखाई दे रहे हैं। उनके बयान के मुताबिक, अगर स्वतंत्र के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है, तो दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। यानी सवाल अब ये है कि क्या स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी आने वाले दिनों में किसी बड़े आंदोलन की वजह बन सकती है? वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद में निशु आजाद के परिवार की भूमिका और स्वतंत्र भारद्वाज पर हुई कार्रवाई को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अभिषेक ठाकुर का कहना है कि अगर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ मुकदमे बढ़ाए जाते हैं, तो निशु आजाद के पिता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी सिर्फ एक कानूनी मामला है, या फिर इसके पीछे एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक टकराव आकार ले रहा है? क्या एससी-एसटी एक्ट को लेकर शुरू हुई बहस अब सामान्य जाति बनाम दलित की राजनीति में बदलने जा रही है? क्या दिल्ली की सड़कों पर फिर बड़ी भीड़ दिखाई देगी? और क्या सरकार इस बढ़ते तनाव को रोकने के लिए कोई बड़ा कदम उठाएगी? फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में जिस तरह से आवाजें तेज हो रही हैं, उसने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे पुलिस और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और क्या वाकई दिल्ली में कोई बड़ा प्रदर्शन आकार लेता है।
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Source: Filmitics

