जौनपुर। प्रतिबंधित चाइनीज और सिंथेटिक मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। जौनपुर में मोटरसाइकिल से घर लौट रहे एक युवक का प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से गल…
जौनपुर। प्रतिबंधित चाइनीज और सिंथेटिक मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। जौनपुर में मोटरसाइकिल से घर लौट रहे एक युवक का प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से गला गंभीर रूप से कट गया। हादसे के बाद जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान युवक के गले में 12 टांके लगाए गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं होने पर वह 10 सितंबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा।
पुराना पान दरीबा, मिसिरपुर निवासी सुजल मौर्य पुत्र संतोष कुमार मौर्य छह सितंबर को अपने भाई सानू मौर्य के साथ मोटरसाइकिल से घर जा रहे थे। सद्भावना पुल पर भारत इलेक्ट्रॉनिक के सामने अचानक प्रतिबंधित मांझा सुजल के गले में फंस गया। मांझे से उनका गला बुरी तरह कट गया। उन्हें तत्काल जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान गले में 12 टांके लगाए गए। हादसे में उनके भाई सानू के हाथ में भी गंभीर चोटें आईं।
घटना के बाद सुजल ने थाना कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन FIR दर्ज नहीं होने पर 10 सितंबर को वह पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। पीड़ित ने अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की मांग की है। मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई है और डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र भेजा गया है।पीड़ित के साथ अधिवक्ता विकास तिवारी और अतुल सिंह भी मौजूद रहे। अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि 14 जनवरी 2026 को जिलाधिकारी जौनपुर की ओर से चाइनीज और सिंथेटिक मांझे की खरीद, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांझे से लगातार हादसे होना प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
विकास तिवारी ने कहा कि पहले शिक्षक संदीप तिवारी और चिकित्सक डॉ. समीर हाशमी की जान जा चुकी है और अब सुजल मौर्य जैसे राहगीर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिलाधिकारी के आदेश को कागजों तक सीमित न रखते हुए जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लगी तो भविष्य में किसी और परिवार को भी अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ सकता है।वहीं, अतुल सिंह ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभावी रोक लगाने के साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पतंग उड़ाना खुशी का माध्यम हो सकता है, लेकिन किसी की गर्दन काटने वाला मांझा मनोरंजन नहीं, बल्कि मौत का सामान है। इस दौरान डॉ. अब्बासी, अंकित यादव, रंजीत यादव, देवेश मौर्य और नीरज पाठक समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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Source: Filmitics







