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September 16, 2026
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CM पुष्कर सिंह धामी जन्मदिन विशेष: पहाड़ से लखनऊ और फिर सत्ता के शिखर तक धामी का सफर –

September 15, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

पिथौरागढ़ के टुंडी गांव में जन्मे पुष्कर सिंह धामी का सफर उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकलकर लखनऊ की सियासत और फिर देहरादून के मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा। मुख्यम…

पिथौरागढ़ के टुंडी गांव में जन्मे पुष्कर सिंह धामी का सफर उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकलकर लखनऊ की सियासत और फिर देहरादून के मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा। मुख्यमंत्री की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक धामी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 2002 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। यानी आज उत्तराखंड की कमान संभाल रहे धामी के राजनीतिक और वैचारिक सफर में लखनऊ विश्वविद्यालय की भी अहम भूमिका रही है।लखनऊ में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ाव ने उनके राजनीतिक सफर को दिशा दी। आगे चलकर उन्होंने संगठन में जिम्मेदारियां संभालीं और फिर विधानसभा की राजनीति में कदम रखा।

2012 में पहली बार विधायक बने धामी लगातार तीन बार विधानसभा के लिए चुने गए। वर्तमान में वह चंपावत से विधायक हैं।इसके बाद 4 जुलाई 2021 को धामी ने पहली बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मार्च 2022 में दोबारा मुख्यमंत्री बने और तब से लगातार इस पद पर हैं।“लखनऊ विश्वविद्यालय की कक्षाओं से निकला एक छात्र आज देवभूमि की सरकार चला रहा है,पढ़ाई से राजनीति और संगठन से सत्ता के शिखर तक पुष्कर सिंह धामी का सफर किसी राजनीतिक कहानी से कम नहीं।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। 16 सितंबर 1975 को जन्मे पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2021 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद से उनका कार्यकाल उत्तराखंड में कई बड़े और चर्चित फैसलों के लिए जाना गया है। धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी UCC, सख्त भू-कानून, नकल विरोधी कानून और निवेश को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल का सबसे बड़ा फैसला समान नागरिक संहिता यानी UCC को माना जाता है। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से UCC लागू किया गया। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां राज्य स्तर पर समान नागरिक संहिता लागू हुई।उत्तराखंड की जमीन और पहचान को लेकर भी धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाया। पहाड़ी जिलों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि और बागवानी भूमि की खरीद पर प्रतिबंध से जुड़े प्रावधान लागू किए गए। सरकार का तर्क रहा है कि इससे राज्य की जमीन और स्थानीय हितों की रक्षा होगी।युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी धामी सरकार ने सख्त कानून का रास्ता अपनाया।

भर्ती परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए। नकल विरोधी कानून में दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया।निवेश के मोर्चे पर भी सरकार बड़े आंकड़े पेश करती है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उत्तराखंड को 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले। सरकार के अनुसार इनमें से करीब एक लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।महिला सशक्तिकरण को लेकर भी धामी सरकार ने कई योजनाओं पर जोर दिया। राज्य में एक लाख से अधिक लखपति दीदी बनने का आंकड़ा पार होने का दावा किया गया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पांच लाख रुपये तक के ब्याजमुक्त ऋण की सुविधा भी दी जा रही है।विकास के दूसरे पैमानों पर भी सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती है।

नीति आयोग के SDG इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड 79 के स्कोर के साथ देश में पहले स्थान पर रहा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान योजना के तहत लाखों लोगों को लाभ मिलने का दावा है। वहीं जल संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए हजारों जल स्रोतों और सैकड़ों नदियों पर काम किए जाने की बात सरकार कहती है।ईज ऑफ लिविंग और डिजिटल सेवाओं के मोर्चे पर भी राज्य में बदलाव की कोशिश हुई है। ‘अपणी सरकार’ पोर्टल के जरिए 900 से ज्यादा सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। जमीन के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से लेकर सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता तक सरकार तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रही है।मुख्यमंत्री धामी के जन्मदिन के मौके पर अब सरकार ‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए जनसंवाद और जनभागीदारी को भी आगे बढ़ाने जा रही है।

यानी धामी के 51वें जन्मदिन पर जहां उनके राजनीतिक सफर और फैसलों की चर्चा हो रही है, वहीं उनके सामने उत्तराखंड की विकास यात्रा को और तेज करने की चुनौती भी है।UCC से लेकर भू-कानून, नकल विरोधी कानून से लेकर निवेश और महिला सशक्तिकरण तक धामी सरकार के फैसलों ने उत्तराखंड की राजनीति को नई दिशा दी है। अब सवाल यही है कि इन फैसलों का असर आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की जमीन, रोजगार, निवेश और आम आदमी की जिंदगी पर कितना दिखाई देता है।

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Source: Filmitics

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