Chandrashekhar Azad News: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया है। मंगलवार देर…
Chandrashekhar Azad News: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ा दावा किया है। मंगलवार देर रात जारी वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि एक फार्म हाउस में उनकी हत्या की साजिश रचने की योजना बनाई गई थी। सांसद ने कहा कि उनके पास इस संबंध में जो जानकारी पहुंची है, वह गलत नहीं है और सरकार को पूरे मामले की जांच करानी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो कथित साजिश की सच्चाई सामने आ सकती है। हालांकि, उन्होंने अपने वीडियो में किसी व्यक्ति या संगठन का नाम कथित साजिश के पीछे नहीं बताया है। इसलिए फिलहाल फार्म हाउस में कथित बैठक या हत्या की योजना के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
अपने वीडियो संदेश में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मौत से डरकर जीवन नहीं जिया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक जीवन है, वह संघर्ष करते रहेंगे।सांसद ने सरकार से मांग की कि उनके पास पहुंची कथित जानकारी की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि अगर वास्तव में किसी तरह की साजिश हुई है तो उसमें कौन लोग शामिल थे।उन्होंने अपने समर्थकों से भी एकजुट रहने की अपील की और कहा कि जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने वीडियो संदेश में कमजोर और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाने का भी जिक्र किया। उन्होंने आरक्षण, UGC से जुड़े मामलों और विभिन्न आपराधिक घटनाओं में पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने की बात कही।उन्होंने राम लखन मौर्य, विनोद साहनी और ललिता हत्याकांड जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां भी उन्हें अन्याय या अत्याचार की जानकारी मिली, उन्होंने पीड़ित पक्ष की आवाज उठाने की कोशिश की।इसी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता के संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें राजनीतिक तौर पर रोकने में असफल होने के बाद किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। यह चंद्रशेखर आजाद का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।
यह बयान उस घटनाक्रम के कुछ दिन बाद आया है, जब चंद्रशेखर आजाद गोंडा में विनोद साहनी के परिवार से मिलने जा रहे थे। 13 सितंबर को बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में पुलिस ने उनके काफिले को रोक दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, वह बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ गोंडा जा रहे थे।पुलिस ने कार्रवाई के पीछे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कारण बताए। चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों ने इसका विरोध किया। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच बहस तथा धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। बाद में सांसद को पुलिस निरीक्षण भवन/गेस्ट हाउस की ओर ले जाया गया, जहां उन्होंने कुछ समय धरना भी दिया।
बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद को रोके जाने के दौरान रोहिणी घावरी के समर्थक भी मौके पर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ नारेबाजी की और रोहिणी घावरी के लिए न्याय की मांग की।दोनों पक्षों के समर्थकों के आमने-सामने आने के बाद बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम की रिपोर्टिंग में काफिले पर जूते-चप्पल और पत्थर फेंके जाने के आरोप भी सामने आए हैं, लेकिन इन आरोपों पर अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष अलग से स्पष्ट होना बाकी है।
गोंडा के कारोबारी विनोद साहनी पर हमले के बाद उनकी हालत गंभीर हुई थी। उन्हें इलाज के लिए लखनऊ स्थित KGMU ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है और 16 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार एक और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कुल चार आरोपियों को जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हुई हैं। चंद्रशेखर आजाद के अलावा अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी पीड़ित परिवार से मिलने और कार्रवाई की मांग की है।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने वीडियो संदेश में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि एक निर्वाचित सांसद की सुरक्षा के बावजूद इस तरह की स्थिति बन सकती है तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते हैं।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोग उन्हें तलाशते हुए वहां पहुंचे थे और उनके पास कथित तौर पर ज्वलनशील पदार्थ था। इस दावे की भी फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे सांसद के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने सरकार से दो घटनाओं की जांच की मांग की है। पहली, उनके मुताबिक फार्म हाउस में उनकी हत्या की कथित साजिश और दूसरी, बाराबंकी में उनके काफिले को रोके जाने के दौरान हुई घटना।सांसद ने कहा कि निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि उन्हें मिली जानकारी कितनी सही थी और कथित साजिश के पीछे कौन लोग थे।
चंद्रशेखर आजाद के दावे के बाद कई सवाल उठ रहे हैं कि कथित फार्म हाउस बैठक कहां हुई, उसमें कौन लोग शामिल थे और क्या वास्तव में उनकी हत्या की कोई योजना बनाई गई थी।फिलहाल सांसद ने किसी कथित साजिशकर्ता का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और उपलब्ध रिपोर्टों में भी इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति या संगठन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।अब इस मामले में सरकार या पुलिस की ओर से किसी जांच अथवा कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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Source: Filmitics







