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September 16, 2026
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कारागार विभाग के एक्स-रे स्कैनर टेंडर पर गंभीर सवाल, तकनीकी मूल्यांकन को लेकर शिकायत –

September 16, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

जेम पोर्टल की निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल, अपर मुख्य सचिव और डीजीपी तक पहुंचा मामला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कारागार विभाग में एक्स-रे सामान जांच मशीनों की खरीद के लिए जेम (GeM) पोर्टल पर चल रही निविदा प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। इंडेलिबल टेक्नोलॉजी नाम की फर्म ने उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं को शिकायत भेजकर निविदा प्रक्रिया और तकनीकी मूल्यांकन की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है।शिकायतकर्ता फर्म ने तकनीकी पात्रता, अनुभव और दस्तावेजों के मूल्यांकन में अनियमितता का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कुछ कंपनियों अथवा मूल उपकरण निर्माताओं को अनुचित लाभ मिलने की आशंका है। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता फर्म की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

तकनीकी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद अयोग्यता का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार उसने निविदा में मांगे गए तकनीकी, पात्रता, अनुभव और पूर्व-पात्रता से जुड़े दस्तावेज जेम पोर्टल पर उपलब्ध कराए थे। इसके बावजूद उसकी बोली को तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया।फर्म का आरोप है कि अयोग्यता के लिए दिए गए कुछ कारण अस्पष्ट हैं और दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति से उनका मिलान कराया जाना चाहिए।

‘दस्तावेज नहीं मिला’ बताने पर उठे सवाल

शिकायत में सबसे अहम सवाल उस दस्तावेज को लेकर उठाया गया है, जिसे तकनीकी मूल्यांकन में कथित तौर पर ‘नहीं मिला’ बताया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित कारोबार प्रमाणपत्र जेम पोर्टल पर अपलोड किया गया था।फर्म ने मांग की है कि जेम पोर्टल के मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, अपलोड टाइमलाइन और तकनीकी जांच के विवरण की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि दस्तावेज वास्तव में उपलब्ध था या नहीं।

47 लाख की पिछली खरीद भी जांच के दायरे में

शिकायत में पिछली एक्स-रे सामान जांच मशीन की खरीद का भी उल्लेख किया गया है। फर्म का दावा है कि उसकी निविदा अयोग्य घोषित होने के बाद टाइमवॉच की मशीन करीब 47 लाख रुपये में खरीदी गई।शिकायतकर्ता ने इस खरीद के टेंडर दस्तावेज, तकनीकी मूल्यांकन, तुलनात्मक विवरण, अयोग्यता के कारण, जेम अनुबंध और उस समय उपलब्ध बाजार एवं जेम दरों की जांच कराने की मांग की है।

अनुभवी फर्म को बाहर करने का दावा

फर्म का कहना है कि उसके पास 15 दोहरे दृश्य वाली एक्स-रे सामान जांच मशीनों की आपूर्ति और अनुभव से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक संबंधित मूल उपकरण निर्माता और मशीन को कारागार मुख्यालय द्वारा पहले खरीदा और स्वीकार भी किया जा चुका है।इसके बावजूद वर्तमान निविदा में अयोग्यता पर फर्म ने सवाल खड़े किए हैं और सभी बोलीदाताओं के अनुभव तथा पात्रता दस्तावेजों का स्वतंत्र तकनीकी समिति से दोबारा परीक्षण कराने की मांग की है।

आठ मशीनों की एकमुश्त आपूर्ति वाली शर्त पर भी सवाल

निविदा की पात्रता शर्तों में मूल उपकरण निर्माता द्वारा प्रस्तावित मॉडल की कम से कम आठ दोहरे दृश्य वाली एक्स-रे सामान जांच मशीनों की एक ही खरीद आदेश में आपूर्ति और उनके पिछले चार वर्षों से कार्यरत होने की शर्त का उल्लेख शिकायत में किया गया है।शिकायतकर्ता ने मोटवानी सहित संबंधित निर्माताओं के मूल खरीद आदेश, चालान, आपूर्ति रिकॉर्ड, स्थापना प्रमाण और मशीनों के चार वर्ष तक संचालन से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।करीब 100 पन्नों के पुनर्विचार आवेदन के बाद दोबारा अयोग्यताफर्म के अनुसार तकनीकी अयोग्यता के बाद उसने करीब 100 पन्नों के सहायक दस्तावेज के साथ पुनर्विचार आवेदन प्रस्तुत किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके लगभग दो दिन के भीतर ही उसकी निविदा को फिर से अयोग्य घोषित कर दिया गया।अब फर्म ने यह पता लगाने की मांग की है कि पुनर्विचार आवेदन कब प्राप्त हुआ, समिति के समक्ष कब रखा गया, दस्तावेजों की किस स्तर पर जांच हुई और निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।

पुराने सरकारी टेंडरों और दरों की भी जांच की मांग

शिकायत में मोटवानी और टाइमवॉच समेत संबंधित मूल उपकरण निर्माताओं के पुराने सरकारी और जेम खरीद आदेशों की भी जांच की मांग की गई है।फर्म ने खरीद आदेशों की संख्या, अनुबंध दरों और पूर्व खरीद की तुलना कर यह जांचने की मांग की है कि कहीं किसी कंपनी को प्राथमिकता देने या कीमतों में हेरफेर जैसी स्थिति तो नहीं रही।

मिलीभगत के आरोप, लेकिन जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत, कीमतों में हेरफेर और किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई है। इन आरोपों को फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, तकनीकी मूल्यांकन पत्रावलियों और जेम पोर्टल के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

एक ही दिन करोड़ों के कई टेंडर एक फर्म को देने का भी आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इससे पहले कारागार विभाग में एक ही दिन करोड़ों रुपये के कई काम एक ही फर्म को दिए गए। हालांकि शिकायत में इस दावे के समर्थन में विशिष्ट टेंडर नंबर, रकम और दस्तावेजों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।ऐसे में इस आरोप की भी मूल खरीद अभिलेखों के आधार पर स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।

संवेदनशील सुरक्षा उपकरणों की खरीद पर पारदर्शिता का सवाल

एक्स-रे सामान जांच मशीनें कारागारों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण मशीनें हैं। ऐसे में इनके चयन, तकनीकी पात्रता और सरकारी खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।शिकायतकर्ता ने तकनीकी समिति की हस्ताक्षरित मूल्यांकन पत्रावलियां, फाइल पर की गई टिप्पणियां, पुनर्विचार आवेदन के निस्तारण से जुड़े अभिलेख और जेम पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों का मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है।

अब जांच से सामने आएगा क्या हुआ?

शिकायत का मुख्य सवाल यही है कि क्या तकनीकी अयोग्यता तय करने की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई और सभी बोलीदाताओं के दस्तावेजों का समान तरीके से मूल्यांकन किया गया या नहीं।फर्म ने सभी निविदाकारों के तकनीकी दस्तावेजों का शर्तवार पुनर्मूल्यांकन कराने, पिछली खरीद की जांच करने और अयोग्यता के स्पष्ट कारण लिखित रूप में उपलब्ध कराने की मांग की है। अब पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच होने पर ही आरोपों की वास्तविकता और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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Source: Filmitics

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