लखनऊ। बेटी की शादी का खर्च हो या बच्चों की पढ़ाई का बोझ, सीमित आमदनी वाले मछुआरा परिवारों के सामने अक्सर आर्थिक चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे परिवारों को राहत दे…
लखनऊ। बेटी की शादी का खर्च हो या बच्चों की पढ़ाई का बोझ, सीमित आमदनी वाले मछुआरा परिवारों के सामने अक्सर आर्थिक चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मत्स्य पालक कल्याण कोष के तहत मिलने वाली सहायता का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। अब पात्र मछुआरा परिवारों को बेटी की शादी के लिए 51 हजार रुपये की जगह 1 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत पात्र मछुआरा परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए कुल 1 लाख रुपये की सहायता निर्धारित की गई है। इसमें 60 हजार रुपये बेटी के बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजे जाएंगे। इसके अलावा 25 हजार रुपये शादी के उपहार और 15 हजार रुपये विवाह आयोजन के लिए निर्धारित किए गए हैं।इस फैसले का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरा परिवारों को बेटी के विवाह के दौरान होने वाले खर्च में सहायता उपलब्ध कराना है। सरकार की ओर से सहायता को सीधे बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था से पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार ने केवल विवाह सहायता तक ही योजना को सीमित नहीं रखा है। मछुआरा परिवारों के कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले बच्चों को भी छात्रवृत्ति देने का प्रावधान किया गया है। पात्र विद्यार्थियों को 10 महीने तक हर महीने 150 रुपये की सहायता मिलेगी। इसके अलावा 750 रुपये की वार्षिक अतिरिक्त सहायता भी निर्धारित की गई है।
इस योजना में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में सरकार का फोकस परिवार की तत्काल आर्थिक जरूरत के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा को जारी रखने पर भी दिखाई देता है।
हालांकि, इस सहायता का लाभ हर मछुआरा परिवार को नहीं मिलेगा। इसके लिए पात्रता की शर्तें निर्धारित की गई हैं। परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही योजना के तहत निर्धारित अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना भी जरूरी होगा।
योगी सरकार के इस फैसले को मछुआरा समुदाय के लिए सामाजिक और आर्थिक सहायता के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ विवाह के समय मिलने वाली सहायता को लगभग दोगुना कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ किशोर बच्चों की पढ़ाई के लिए भी नियमित आर्थिक सहयोग का प्रावधान किया गया है।अब सवाल यह है कि बढ़ी हुई आर्थिक सहायता से मछुआरा परिवारों को जमीनी स्तर पर कितना फायदा मिलता है। फिलहाल, सरकार के इस फैसले ने बेटी की शादी और बच्चों की शिक्षा, दोनों से जुड़ी आर्थिक चिंताओं को एक साथ संबोधित करने की कोशिश की है।
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Source: Filmitics

