
बहराइच। स्थानीय पुलिस व एआरटीओ बहराइच ने शनिवार की सुबह अचानक छापा मारकर 11 अदद डग्गामार वाहन सीज किये। प्रभारी निरीक्षक रुपईडीहा रमेश सिंह रावत ने बताया कि यातायात नियमों का उलंघन करने वाले व अवैध डग्गामार वाहनों के संचालकों पर अंकुश लगाने के क्रम में एआरटीओ प्रवर्तन बहराइच ओपी सिंह के साथ जांच की गई व 11 वाहनों को एमवी एक्ट के तहत सीज किया गया। एआरटीओ ने बताया कि बार्डर खुलते ही 6 बजे नेपाल से आने वाले यात्रियों की छीना झपटी शुरू हो जाती है। जबकि रुपईडीहा के सेंट्रल बैंक चौराहे पर खाली खड़ी रहती। वहां तक इन यात्रियों को पहुंचने ही नही देते। जिससे रोडवेज की भारी क्षति होती है।

ओपी सिंह ने यह भी बताया कि बार्डर से लेकर रुपईडीहा के चकियारोड चौराहे तक डग्गामार वाहन खड़े रहते हैं। रोडवेज की बसों तक इन्ही की वजह से सवारियां नही पहुंच पा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आगे जांच तेज की जाएगी। अवैध चल रही बसें व अन्य वाहन जांच के दौरान गलत पाए जाने पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।
खबर का असर।

यूपी लाइव न्यूज ने 25 जुलाई को रुपईडीहा मे चल रहे अवैध वाहन के संचालन पर खबर प्रमुखता से चलाई थी। 11 वाहनों को अवैध पाए जाने पर खबर की पुष्टि हुई है। परंतु रुपईडीहा से गोआ, मुंबई, हैदराबाद, जयपुर, हरिद्वार व शिमला आदि क्षेत्रों के लिए चलने वाले वाहनों को एआरटीओ व पुलिस ने नही देखा।
रुपईडीहा के चारों ओर इन अवैध डग्गामार वाहनों का जाल फैला हुआ है। इस ओर अभीतक जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान न जाना अपने आप में प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। प्रमुख रूप से रुपईडीहा रोडवेज डिपो से जयपुर, शिमला, हरिद्वार व दिल्ली के लिए लगभग आधा दर्जन बसें नित्य खाली जा रही हैं। इन शहरों के लिए डग्गामार वाहनों की बढ़ती संख्या से रोडवेज की बसों को सवारियां नही मिल रही हैं। दर्जनों की संख्या में इन डग्गामार वाहनों के संचालक दिहाड़ी मजदूर रख रखे हैं।
नेपालगंज मे भी इन अवैध वाहन संचालकों ने भारी कमीशन पर एजेंट रख रखे हैं। वे रुपईडीहा से सटे नेपाली थाना जमुनहा तक सवारियों को भेज देते हैं। वहां से पैदल रिक्शा वाले इन सवारियों को हरिद्वार, शिमला, जयपुर, दिल्ली, गोआ व मुंबई के लिए चलने वाली डग्गामार बसों व अन्य वाहनों तक पहुंचाते रहते हैं। इसके एवज में इन्हें अच्छी खासी दिहाड़ी मिलती हैं।
नेपाली सवारियों के हितों को देखते हुए प्रदेश के परिवहन विभाग ने रुपईडीहा रोडवेज स्टैंड को डिपो का रूप दे दिया है। बसों की संख्या बढ़ा दी है। परंतु इन डग्गामार वाहनों की वजह से डिपो तक सवारियां नही पहुंच पा रही है। इन प्राइवेट वाहन स्टैंड पर कहीं कहीं यात्री सुविधाओं का नितांत अभाव है। न पीने का पानी है न ही शौचालय की सुविधा। अधिकारी आते रहते हैं व बदलते रहते हैं। परंतु इन अवैध वाहन संचालकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नही होती। सुना यह भी जाता है कि रोडवेज से अधिक किराया भी नेपाली यात्रियों से वसूला जाता है।
यही नही बसों में 3 पर चार व दो पर तीन सवारियां भी बैठी देखी गयी हैं। बार्डर पर बसे क्षेत्रवासी यह अमानवीय व्यवहार देखकर कहते हैं कि यह सारा कार्य पुलिस व परिवहन विभाग की लचर व्यवस्था के कारण जारी है।
श्याम कुमार मिश्रा रुपईडीहा
26/7/2025

