
गंभीर अपराधों में लापरवाही करने के मामले में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ी कार्रवाई की है। विभूतिखंड थाने के प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह और समिट बिल्डिंग चौकी इंचार्ज सूर्यसेन कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों अफसरों पर कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी तय की गई।
हसनगंज प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह को सौंपी कमान
पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सिंगर के आदेश पर एसीपी विभूतिखंड की जांच में पाया गया कि सुनील कुमार सिंह और सूर्यसेन कुमार सिंह ने 30 अगस्त 2025 को दर्ज गंभीर मामलों में कोई ठोस और सार्थक कार्रवाई नहीं की।
थाना विभूतिखंड में पंजीकृत 2 मामलों में कार्रवाई ढीली रही। नतीजतन दोनों पर निलंबन की गाज गिरी। विभूतिखंड की कमान फिलहाल हसनगंज प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह को सौंपी गई है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लखनऊ में 48 घंटे में दो बार क्लबों के बाहर बवाल
लखनऊ में विभूति खंड में देर रात पार्टी कल्चर की आड़ में अपराध का खेल लगातार बढ़ रहा है। 48 घंटे के भीतर राजधानी के दो अलग-अलग बार-क्लब्स से हिंसा और गोलीबारी के मामले सामने आए हैं। एक केस में पार्टी कर लौट रहे युवक पर नशे में धुत बदमाशों ने गोली चला दी।
वहीं दूसरे मामले में पब्लिक रिलेशन मैनेजर पर बार से लौटते वक्त हमला कर पिस्टल से सिर फोड़ दिया गया। दोनों मुकदमे विभूतिखंड थाने में दर्ज हुए हैं। पुलिस कमिश्नर इन दोनों मुकदमों की जांच में लापरवाही को देखते हुए समिट चौकी प्रभारी और इंस्पेक्टर विभूति खंड को निलंबित कर दिया है।

पहला केस: टिकल पिंक क्लब में मारपीट और गोलीबारी
रौनक सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह 30 अगस्त की रात करीब 1:30 बजे दोस्तों के साथ टिकल पिंक क्लब गया था। वहां पहले से मौजूद शिव और कैफ अपने साथियों के साथ शराब के नशे में गाली-गलौज कर रहे थे। जब रौनक ने विरोध किया तो आरोपियों ने 4-5 साथियों के साथ मिलकर मारपीट शुरू कर दी।
मारपीट के बाद जब रौनक बाहर निकला तो बदमाशों ने उस पर जान से मारने की नीयत से गोली चला दी और धमकी देकर फरार हो गए। पीड़ित ने यह भी बताया कि पूरी वारदात क्लब के CCTV कैमरे में कैद है।
दूसरा केस: द हाइप रूम बार मैनेजर पर पिस्टल से हमला
13 अगस्त को द हाइप रूम बार में हुए हंगामे की वजह से PR मैनेजर मो. हम्जा खान पर बदला लेने की वारदात हुई। उनकी तहरीर के मुताबिक, अजीत पांडेय, प्रथम शर्मा, सौरभ शुक्ला और राज बार में आए और झगड़ा किया। 29/30 अगस्त की रात आरोपियों ने हम्जा को बाहर निकलते वक्त घेर लिया।साइबर हाइट्स के पास हमलावरों ने गाड़ी रोकी, पिस्टल से शीशा तोड़ा और जानलेवा हमला कर दिया। पिस्टल की बट से सिर पर वार कर दिया गया, जिससे हम्जा लहूलुहान होकर बेहोश हो गए। हमलावर उन्हें मरा समझकर भाग निकले।
दोनों मुकदमों में पुलिस की लापरवाही सवालों में
दोनों मामलों में पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। पहले केस में गोली चलने के बावजूद तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई। दूसरे केस में 13 अगस्त की शिकायत को हल्के में लिया गया, जिसका नतीजा यह निकला कि 29/30 अगस्त को बड़ा हमला हो गया।
निलंबित दोनों अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। पुलिस कमिश्नर ने कहा- थानों और चौकियों पर बैठे अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी अपराध पर सख्ती से नियंत्रण करना है, इसमें ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

