जयपुर व दिल्ली की बसें हो गईं ट्रांसपोर्ट कैरियर।
बिना बिल बीजक के आता है यह माल।
आखिर क्यों नही पहुंचती एआरटीओ की नजर।

रुपईडीहा। दो प्राइवेट बसें नित्य दिल्ली व जयपुर के लिए रुपईडीहा से शाम को चलती हैं। जयपुर व दिल्ली से ये बसें कानपुर, लखनऊ, बहराइच व नानपारा होती हुई सुबह रुपईडीहा पहुंचती हैं। ये बसें सवारी साधन न होकर मालवाही साधन बन गयी हैं।
हो यह रहा है कि इसके पूर्व भारतीय सीमा से सटे बांके, बर्दिया, सुर्खेत, दैलेख, दांग व कंचनपुर आदि जिलों के कपड़ा व्यापारी थोक व फुटकर रुपईडीहा से ही माल खरीदते थे। रुपईडीहा का व्यापारी जीएसटी आदि टैक्स अदा कर माल लाता है। जीएसटी बचाने के लिए अब नेपाल के व्यापारियों ने एक चालाकी भरा उपाय निकाल लिया। ये लोग इन बसों पर कपड़ों की गांठे लादकर सीधे रुपईडीहा पहुंचते हैं। फिर नेपाली कस्टम बचाकर कैरियर्स से ये सारा माल नेपालगंज मंगवा लेते हैं। अब इन नेपाली व्यापारियों को डबल फायदा हो गया। भारत का जीएसटी बचा व नेपाली कस्टम बचा।
विचारणीय विषय यह है कि दिल्ली से कानपुर, लखनऊ, बहराइच, नानपारा व रुपईडीहा तक इन बसों की छतों पर लदा माल किसी को दिखाई नही देता। इन बसों में बड़ी डिग्गियां भी बनी होती है। उनमें भी माल भरा रहता है। नानपारा मे जीएसटी कार्यालय पर इंस्पेक्टर, एसी, डीसी व कमिश्नर की तैनाती है। बावजूद इसके बेखटक यह माल रुपईडीहा मे उतारा जाता है व रुपईडीहा के गोदामों में डंप किया जाता है। रात में दोनो देशों के सीमावर्ती सुरक्षा कर्मियों की सेटिंग से सारा माल ऑफ रुट साईकलों व बाइक से नेपालगंज पहुंच जाता है।
कभी कभार एआरटीओ छापा मारकर बसों को पकड़ लेते हैं। परंतु यातायात नियमों का उलंघन करने वाली इन बसों को कभी नही छेड़ते। इससे उनकी भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है। रुपईडीहा से दो प्राइवेट बसें आर एस यादव की दिल्ली के लिए व अंशी कंपनी की जयपुर के लिए नित्य चलती हैं। इन दोनों की टिकटें भी ऑन लाइन बुक होती हैं। जिनके चालक व परिचालक बंडल गिन कर बिना रशीद दिए मनमानी वसूली करते रहते हैं।
इस संबंध में उपरोक्त जानकारी देते हुए भारतीय किसान परिषद बहराइच अध्यक्ष व मां राजेश्वरी चैरिटेबल ट्रस्ट ब्लॉक नवाबगंज के डायरेक्टर शिवपूजन सिंह ने बताया कि दिल्ली व जयपुर से सीधे रुपईडीहा तक पहुंचने वाली इन बसों के ऊपर डिग्गी मे लदे माल की जांच आजतक किसी संबंधित विभाग ने क्यों नही की। यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
श्याम कुमार मिश्रा रुपईडीहा
7/9/2025

