BJP सांसद बोले-लखनऊ में अफसर बांग्लादेशियों को ID बांट रहे डकैती चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं CM योगी डिपोर्ट करवाएं

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राजधानी लखनऊ में सैकड़ों बांग्लादेशी घुस आए हैं। इनके बच्चे चौराहों पर गुब्बारे-पेन बेचते, भीख मांगते मिल जाएंगे। इतना ही नहीं नगर निगम के अफसरों ने इन्हें ID देकर लखनऊ का निवासी बना दिया है। यहां झोपड़ियों में रोहिंग्या रह रहे। पुलिस इनका वेरिफिकेशन नहीं कर पा रही। ये देश के लिए खतरा हैं। काम की आड़ में आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे हैं।

ये बातें भाजपा के राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने लखनऊ में कहीं। दरअसल, वे रोज की तरह गुरुवार को भी मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। इस दौरान उन्होंने कुछ सफाईकर्मियों का वीडियो बनाया। उन्होंने दावा किया कि ये सभी बांग्लादेशी हैं।

उन्होंने कहा- गोमती नगर विस्तार की सर्विस रोड पर मैं मॉर्निंग वॉक करने निकलता हूं तो ये लोग मुझे सफाई करते मिलते हैं। उसके बाद दिन भर बैठे रहते हैं। पूछने पर ये लोग कहते हैं कि असम से आए हैं, लेकिन हैं ये लोग बांग्लादेशी। उन्होंने सीएम योगी से ऐसे घुसपैठियों को बांग्लादेश डिपोर्ट करने की मांग की।

इसे लेकर यूपी के पूर्व डीजीपी का वीडियो भी सामने आया है। भाजपा सांसद बृजलाल का यह बयान इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि यूपी में योगी आदित्यनाथ वाली भाजपा सरकार है।

बृजलाल ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर क्या कुछ कहा, वो 

सांसद बृजलाल ने सफाईकर्मियों को खड़ा कर उनसे एक-एक कर नाम और एड्रेस पूछा।
सांसद बृजलाल ने सफाईकर्मियों को खड़ा कर उनसे एक-एक कर नाम और एड्रेस पूछा।

ये सब बांग्लादेशी अनधिकृत रूप से रह रहे

बृजलाल ने कहा- लखनऊ में इतने बांग्लादेशी रह रहे हैं, लेकिन इसकी चिंता न तो नगर निगम को है, न ही लखनऊ पुलिस को। देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत देश का गजवा-ए-हिंद करने की साजिश पर कुछ लोग काम कर रहे हैं। दुखद है कि नगर निगम ने इन्हें सफाईकर्मी के रूप में तैनात कर रखा है।

राज्यसभा सांसद बृजलाल ने कहा- लखनऊ में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रह रहे हैं।

गोमती नगर विस्तार में बांग्लादेशियों की झोपड़ी मिल जाएंगी

गोमतीनगर विस्तार में खाली जमीनों और गोमती नदी की तलहटी, नालों के किनारे इन बांग्लादेशियों की बहुत झोपड़ियां मिल जाएंगी। ये खुद को असम के बोंगाई, नलबाड़ी, बरपेटा और नौगांव का बताते हैं।

ये सब उन्हीं गांवों के नाम हैं, जहां कांग्रेसी सरकारों में ऐसे लोगों को वोट बैंक के तौर पर योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया था। इंदिरा गांधी इन्हीं बांग्लादेशियों के सहारे 1983 का असम चुनाव जीतना चाहती थीं। इनकी संख्या उस समय लगभग 40 लाख थी। ऑल असम स्टूडेंट यूनियन, ऑल असम गण संग्राम की मांग थी कि पहले इन विदेशियों को बाहर करो।

संगठनों का कहना था कि इंदिरा गांधी अपनी जिद पर अड़ी रहीं, जिसका परिणाम 12 फरवरी 1983 को नेल्ली दंगा हुआ। उसमें 3000-4000 लोग मारे गए थे। मैं खुद अपनी PAC बटालियन के साथ बोंगाई आदि गांवों में रहा हूं। वहां के बारे में अच्छे से जानता हूं। ये लोग बांग्लादेशी हैं। इनकी भाषा बताती है कि ये असमी नहीं हैं।

इस बार गर्मी की शुरुआत में लखनऊ की झोपड़ियों की बस्तियों में आग लगी थी। यह तस्वीर अप्रैल में सआदतगंज इलाके की है। यहां 18 झोपड़ियां राख हो गईं।
इस बार गर्मी की शुरुआत में लखनऊ की झोपड़ियों की बस्तियों में आग लगी थी। यह तस्वीर अप्रैल में सआदतगंज इलाके की है। यहां 18 झोपड़ियां राख हो गईं।

डकैती और चोरी जैसे वारदात कर रहे

लखनऊ में रह रहे ये बांग्लादेशी देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा हैं। जब से बांग्लादेश में कट्टरपंथियों और पाकिस्तान समर्थक सरकार बनी है, तब से यह खतरा बहुत बढ़ गया है। बांग्लादेशी अपराधी गैंग डकैती, चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं, बांग्लादेशी आतंकी संगठन ‘HUJI’ (हरकत-उल-जिहाद अल- इस्लामी) ने देश में कई जगहों पर आतंकी घटना की है। उत्तर प्रदेश भी इसका भुक्तभोगी है। खूंखार हूजी आतंकी बाबू भाई आदि अब भी उत्तरप्रदेश की जेलों में हैं।

2007 में हूजियों ने ही लखनऊ, अयोध्या में ब्लास्ट किए

23 नवंबर, 2007 को लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या की न्यायालयों में हुए बम ब्लास्ट में हूजी का भी हाथ था। बांग्लादेशी आतंकी संगठन ‘JMB’ (जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश) भारत में भी सक्रिय है। अगर इन अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को भारत से नहीं भगाया तो बांग्लादेशी आतंकी संगठनों को लखनऊ सहित देश में ठिकाना बनाने में मदद मिलेगी।

अप्रैल में केसरीखेड़ा में 80 से ज्यादा झोपड़ियां जल गई थीं। पता चला था कि रेलवे से रिटायर्ड वायरमैन रामबाबू यादव ने चार बीघा जमीन पर अवैध रूप से बांग्लादेशियों को बसा दिया था।
अप्रैल में केसरीखेड़ा में 80 से ज्यादा झोपड़ियां जल गई थीं। पता चला था कि रेलवे से रिटायर्ड वायरमैन रामबाबू यादव ने चार बीघा जमीन पर अवैध रूप से बांग्लादेशियों को बसा दिया था।

‘योगी निर्णय लें, पुलिस को जानकारी नहीं’ पूर्व डीजीपी ने कहा- उत्तर प्रदेश में केवल सीएम योगी आदित्यनाथ ही कड़ा निर्णय लेकर इन्हें वापस बांग्लादेश भेज सकते हैं। पुलिस को भी इनकी जांच में पर्याप्त जानकारी नहीं है। टीम बनाकर इसकी जांच होनी चाहिए। इनके डॉक्यूमेंट लेकर असम भेजने चाहिए, तभी पूरी जानकारी मिल सकेगी। अपने को असमी बताने वाले इन बांग्लादेशियों की दूसरी-तीसरी पीढ़ी का भी पता नहीं चलेगा, क्योंकि ये सभी घुसपैठिए हैं।

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