राजधानी लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल और. आयुक्त गौरव कुमार आमने सामने जनता बिजी है महँगाई बेरोजगारी में वी लखनऊ नगर निगम कार्यालय में नेता एक आईएएस आमने सामने?

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लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। टकराव के बीच मेयर ने लखनऊ के विकास कार्यों यानी जनता के मुद्दों की फाइल ही लौटा दी। 4 और 9 सितंबर के सदन में आए मुद्दों को नगर निगम प्रशासन ने पास कर दिया था। उन पर मेयर ने साइन नहीं किए। साथ ही कहा कि सही से चर्चा नहीं हुई थी। एजेंडों पर फिर से सदन बुलाया जाए।

इस पर नगर आयुक्त ने भी जवाब लिखा कि यह नियम में नहीं है। किसी पेश किए गए मुद्दे पर 6 महीने के भीतर दोबारा सदन बुलाया जाएगा तो यह सदन की अवहेलना होगी। ऐसे में 14 नवंबर को होने वाले कार्यकारिणी के सदन पर अब असमंजस की स्थिति बन गई है। जानकार मानते हैं कि दोनों के बीच इस द्वंद्व से निगम की अगली बैठक में पार्षदों और अधिकारियों में तनातनी हो सकती है।

मेयर अधिकारियों के खिलाफ एक्शन में रहती हैं। पिछले दिनों नगर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई थी। (फाइल)
मेयर अधिकारियों के खिलाफ एक्शन में रहती हैं। पिछले दिनों नगर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई थी। (फाइल)

4 और 9 सितंबर को नगर निगम सामान्य सदन की बैठक हुई। उसमें पार्षदों की तरफ से कई प्रस्ताव पेश किए गए। इनमें कुछ पास, कुछ रद्द और कुछ में संशोधन के साथ नगर निगम प्रशासन ने फाइल (मिनट्स) तैयार की। उसके बाद फाइनल सिग्नेचर के लिए मेयर के पास फाइल भेज दी।

मेयर ने यह कहकर फाइल लौटा दी कि चपरासी से भेजवाई गई है। उसके बाद आरोप लगाया कि पहली बार में मना करने पर इसे ई-मेल के जरिए भेज दिया गया। फाइल को कोई भी अधिकारी लेकर नहीं आया, न ही इसपर चर्चा की गई। इसके बाद नगर आयुक्त के जवाब ने गतिरोध को बढ़ा दिया है।

मेयर ने ईमेल का जवाब दिया था कि सदन में इन मुद्दों पर सही से चर्चा नहीं की गई। इस वजह से फिर से सदन बुलाकर इन पर चर्चा की जाए। इस पर नगर आयुक्त ने जवाब लिखा-

यह सदन की अवमानना है। नियम-28 के अनुसार कोई भी मुद्दा चाहे पास हुआ हो या रद्द, उस पर अगले 6 महीने तक सदन बुलाकर चर्चा नहीं की जाएगी।

4 सितंबर को हुई सदन की बैठक में कई पार्षद जमीन पर बैठ गए थे। (फाइल)
4 सितंबर को हुई सदन की बैठक में कई पार्षद जमीन पर बैठ गए थे। (फाइल)

कार्यकारिणी की बैठक में हुई थी अनबन

नियमों के दांव पेच के बीच मेयर और नगर आयुक्त के बीच अधिकारों की लड़ाई को लेकर कार्यकारिणी बैठक में अनबन हुई थी। 4 सितंबर और 9 सितंबर को हुए नगर निगम के सामान्य सदन के मुद्दों पर अंतिम मुहर के लिए नगर निगम प्रशासन की तरफ से मेयर सुषमा खर्कवाल को सदन के मिनट्स भेजे गए, लेकिन मेयर ने इन पर साइन नहीं किए।

सामान्य सदन बुलाना मेयर के अधिकार में

मेयर सुषमा खर्कवाल सामान्य सदन बुला सकती हैं, लेकिन उनमें नए एजेंडे रहेंगे। अब देखने वाली बात होगी क्या मेयर सामान्य सदन बुलाती हैं या फिर उन्हीं मुद्दों पर डटी रहती हैं जो सदन से पास हुए। वहीं, विवाद के बीच शहर में पुनरीक्षित बजट को लेकर न तो कार्यकारिणी हो पा रही न ही सदन। ऐसे में शहर के विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं। पार्षद भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि शहर के विकास कार्य रुकने से परेशानी बढ़ रही है। मेयर की तरफ से अपने सरकारी आवास पर पार्षदों के साथ में की गई बैठक के बाद कार्यकारिणी और सदन की डेट का ऐलान किया गया था।

नगर आयुक्त और मेयर के बीच तकरार कम करने की कोशिश लखनऊ के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने भी की थी। (फाइल)
नगर आयुक्त और मेयर के बीच तकरार कम करने की कोशिश लखनऊ के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने भी की थी। (फाइल)

मेयर ने पार्षदों को एकजुट करने की कोशिश तेज की

मेयर सुषमा खर्कवाल ने पार्षदों को एकजुट करने का प्रयास तेज किया है। इस बीच 14 नवंबर को होने वाली कार्यकारिणी बैठक में भी अधिकारियों के खिलाफ पार्षद मोर्चा खोल सकते हैं। विवाद के चलते समाज में गलत संदेश जाने की भी चर्चा है।

सूत्रों के मुताबिक, शासन और सरकार के स्तर पर भी इस विवाद को लेकर नाराजगी जताई गई थी और विवाद समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे। चूंकि बैठक बुलाने का अधिकार मेयर के पास है, इसलिए उन्होंने खुद पत्र जारी किया है, लेकिन इसमें भी पेच फंस गया है। नगर आयुक्त विशेष परिस्थितियों में ही बिना बैठक के बजट शासन से मंजूर करा सकते हैं, लेकिन तब सदन को उसमें संशोधन का अधिकार नहीं रहता।

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