लखनऊ हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार पर 15-15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना अधिकारियों द्वारा न्यायालय की कार्यवाही में ?

Date:

 

लखनऊ हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार पर 15-15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना अधिकारियों द्वारा न्यायालय की कार्यवाही में सहयोग न करने और जवाब दाखिल करने में लापरवाही बरतने के कारण लगाया गया। कोर्ट ने अधिकारियों के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि अधिकारी न्यायालय की कार्यवाही में सहयोग न करने को अपनी आदत बना चुके हैं। इससे कोर्ट का कीमती समय बर्बाद होता है और वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी होती है।

किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम का मुद्दा उठाया

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने पारित किया। यह फैसला नैतिक पार्टी द्वारा वर्ष 2014 में दाखिल एक जनहित याचिका पर आया, जिसमें किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम का मुद्दा उठाया गया था।

एक अधूरा और निरर्थक शपथ पत्र दाखिल किया

न्यायालय ने पाया कि 2 अगस्त 2024 को पारित आदेश के बाद दायर किए गए अनुपूरक शपथ पत्र में उन विशिष्ट बिंदुओं को संबोधित नहीं किया गया था, जिन पर निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने इसे केवल औपचारिकता निभाने के लिए दायर किया गया एक अधूरा और निरर्थक शपथ पत्र बताया।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि यह पहला मामला नहीं है, जहां ऐसा हुआ है। न्यायालय ने जोर दिया कि न केवल संबंधित विभाग, बल्कि राज्य के अधिवक्ताओं को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा तैयार किए गए शपथ पत्र वास्तव में अदालत के प्रश्नों का उत्तर दें।

किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम तक को नहीं पढ़ा

कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी ने किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम तक को नहीं पढ़ा, अन्यथा शपथ पत्र में वास्तविक जागरूकता उपायों का उल्लेख होता, न कि केवल औपचारिक वाक्यों का। न्यायालय ने इस स्थिति को न्यायिक कार्यवाही में लगभग असहयोग के बराबर बताया। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर के सप्ताह में निर्धारित की गई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related