
लखनऊ में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के मौके पर मीडिया संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शामिल होने के लिए आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर पहुंचे। इस मौके पर यूजीसी के मुद्दे को लेकर हंगामे जैसा माहौल बन गया।
नरेंद्र ठाकुर सवालों के जवाब नहीं दे पाए। संवाद में यह सवाल उठा कि आरएसएस यूजीसी के मुद्दे पर कोई आंदोलन क्यों नहीं कर रहा? इस पर नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि आरएसएस खुद कोई आंदोलन नहीं करता। उसका ऐसा कोई इतिहास नहीं है।
यह भी कहा कि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, इसलिए इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। इसको लेकर लोगों ने तर्क दिया कि आरएसएस ने ही राम मंदिर का आंदोलन किया। जब राम मंदिर का मुद्दा कोर्ट में चल रहा था, तब भी आरएसएस का आंदोलन जारी था।

हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर भी आरएसएस चुप क्यों?
कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर भी आरएसएस कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। इन सब सवालों के बीच मीडिया संवाद का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इसको लेकर आरएसएस के नरेंद्र ठाकुर ने यह कहा कि देश में कई जगह उन्होंने मीडिया संवाद किया है, लेकिन इस तरह का मीडिया संवाद उन्होंने कहीं नहीं देखा। इसको लेकर उनको दुख भी है। इस तनाव के बीच मीडिया संवाद बीच में ही समाप्त हो गया।

संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है
इससे पहले मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने संघ की कार्यशैली और विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ की कार्यपद्धति समय के साथ विकसित हुई है, लेकिन इसकी मूल भावना समाज को संगठित करने की रही है। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के मन में स्पष्ट लक्ष्य था, लेकिन उन्होंने अपने विचारों को सहयोगियों के साथ साझा कर सामूहिक रूप से आगे बढ़ाया।
ठाकुर ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि कार्य को कैसे बढ़ाया जाए, कौन से प्रयोग किए जाएं और समाज को जोड़ने के लिए कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए जाएं। उनका लक्ष्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना हैं , ताकि देश की बुनियाद मजबूत हो सके।

मीडिया और समाज के बीच बेहतर समन्वय संभव
कार्यक्रम में प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अशोक दुबे ने भी अपने विचार रखे और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया और समाज के बीच बेहतर समन्वय से सकारात्मक बदलाव संभव है। संवाद कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कई सवाल भी पूछे, जिनका वक्ताओं ने विस्तार से जवाब दिए।

