मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 27 एजेंडों पर मुहर लगी, बैठक में राज्य के पुलों और स्टेट ह…
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 27 एजेंडों पर मुहर लगी, बैठक में राज्य के पुलों और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स की व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया, इसके अलावा राज्य के 264 नगर निकायों के लिए अगले पांच वर्षों में करीब 9,169 करोड़ रुपये की राशि को भी मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने फैसलों की जानकारी दी, उन्होंने बताया कि पहले चरण में 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 पुलों और 55 स्टेट हाईवे का चयन किया गया है, इन सड़कों और पुलों से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स की वसूली की जाएगी, टोल वसूली शुरू करने से पहले कई जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इनमें वाहनों का ट्रैफिक सर्वे, ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे और टोल प्लाजा के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन शामिल है, टोल बूथ और संबंधित व्यवस्था विकसित करने के लिए करीब 30 करोड़ 94 लाख रुपये के अनुमानित खर्च को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट ने शहरी स्थानीय निकायों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। अब नगर निकायों को मिलने वाली राशि में उनके प्रदर्शन और संसाधन जुटाने की क्षमता को भी महत्व दिया जाएगा, मंत्री नीतीश मिश्रा के मुताबिक, जो अर्बन लोकल बॉडी बेहतर प्रदर्शन करेंगे और अपने संसाधनों को प्रभावी तरीके से जुटाएंगे, वे अतिरिक्त राशि के लिए पात्र होंगे, 16वें वित्त आयोग के तहत बिहार के सभी 264 नगर निकायों के लिए आगामी पांच वर्षों के लिए करीब 9,169 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, 15वें वित्त आयोग में आवंटन का एक हिस्सा क्षेत्रफल के आधार पर दिया जाता था, अब इसमें बदलाव करते हुए उस हिस्से को प्रदर्शन आधारित किया गया है हालांकि, कुल आवंटन का करीब 90 फीसदी हिस्सा अभी भी जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होगा, इसके अलावा नए शहरों के जुड़ने या ग्रामीण इलाकों के शहरीकरण की स्थिति में 2,000 रुपये प्रति व्यक्ति के आधार पर वन टाइम इंसेंटिव ग्रांट का भी प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट के फैसले में पटना नगर निगम के लिए वेस्ट वाटर मैनेजमेंट यानी अपशिष्ट जल प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है, इसके तहत करीब 5,000 करोड़ रुपये की योजना का प्रावधान है। इसमें 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होने की बात कही गई है, कुल 9,169 करोड़ रुपये में से करीब 50 फीसदी राशि वेस्ट वाटर मैनेजमेंट पर खर्च की जाएगी, बाकी 50 फीसदी राशि शहरी स्थानीय निकायों के लिए चिन्हित 18 अलग-अलग कार्यों पर खर्च होगी।
बिहार कैबिनेट के इन फैसलों का असर सीधे सड़क परिवहन और शहरी विकास पर पड़ सकता है, एक ओर पुलों और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स लागू होने से इन मार्गों से गुजरने वाले वाहन मालिकों पर अतिरिक्त खर्च आ सकता है, वहीं दूसरी ओर नगर निकायों के लिए बड़े फंड और प्रदर्शन आधारित व्यवस्था से शहरों में बुनियादी सुविधाओं, जल निकासी और अपशिष्ट जल प्रबंधन को बेहतर करने की कोशिश की जाएगी, अब देखने वाली बात होगी कि टोल व्यवस्था कब लागू होती है और नगर निकाय प्रदर्शन आधारित फंडिंग का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
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Source: Filmitics

