नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से हुई सात लोगों की मौत ने राजधानी में भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर…
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से हुई सात लोगों की मौत ने राजधानी में भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी की इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। MCD ने दिल्ली के सभी जोन में भवनों के निरीक्षण के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में इमारतों की जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
6 सितंबर को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई। दुर्घटना के बाद 24 घंटे से अधिक समय तक राहत और बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव दलों ने लगातार अभियान चलाया।
हादसे ने राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी के बाद MCD ने अब पूरी दिल्ली में भवनों के निरीक्षण का फैसला लिया है।
MCD के आदेश के मुताबिक सभी जोन में भवनों का निरीक्षण किया जाएगा। संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में इमारतों की स्थिति की जांच करने और 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
इस जांच के दौरान भवनों की सुरक्षा और उनकी स्थिति से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी। तैयार की जाने वाली रिपोर्ट को दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में भी शामिल किया जाएगा। ऐसे में यह कार्रवाई सिर्फ विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का भी हिस्सा बनेगी।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कदम उठाया है। दक्षिणी जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
इस कार्रवाई के बाद अब निगाह इस बात पर है कि जांच में किन इमारतों को असुरक्षित पाया जाता है और उनके संबंध में MCD क्या कदम उठाता है।
पूरी दिल्ली की इमारतों की जांच के फैसले के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसी कार्रवाई हादसे से पहले नहीं की जा सकती थी? अगर संवेदनशील और जर्जर इमारतों की पहचान पहले हो जाती, तो क्या सत्य निकेतन जैसी घटना को टाला जा सकता था?फिलहाल MCD की जांच से यह तस्वीर सामने आने की उम्मीद है कि राजधानी में कितनी इमारतें सुरक्षित हैं और कितनी इमारतों को तत्काल मरम्मत, खाली कराने या अन्य सुरक्षा उपायों की जरूरत है।सात लोगों की मौत के बाद शुरू हुई यह व्यापक जांच अब दिल्ली की भवन सुरक्षा व्यवस्था की असली तस्वीर सामने ला सकती है। जनता की नजर 10 सितंबर को आने वाली रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
div
Source: Filmitics

