Skip to content
September 24, 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
मां को गालियां दीं, लेकिन मैं उन्हें माफ करता हूं… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी की देश से बड़ी अपील, राष्ट्रपति ने पेपर लीक कानून संशोधन को दी मंजूरी, राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतों का रास्ता साफ *RBI का नया नियम : अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर देना होगा एकसमान ब्याज, चाहे सरकारी हो या प्राइवेट… अब चढ़ावा आठ सदस्यीय निगरानी टीम के हवाले, नई व्यवस्था 25 जुलाई से लागू विदिशा ट्रस्ट ने ‘वाइब्रेंट विदिशा’ के 15वें संस्करण का आयोजन किया; लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र स्थित हुसड़िया चौराहे के पास एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल कम डालने के आरोप को लेकर विवाद हिंसक हो गया। बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में मोहर्रम का जुलूस देख रहे एक युवक पर पुरानी रंजिश के चलते चाकू से हमला किया गया। विश्व योग दिवस पर प्रेरणा वाटिका पार्क में हुआ भव्य योग कार्यक्रम।
अंतराष्ट्रीय

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन चुनाव में लखनऊ जिला अध्यक्ष की कुर्सी के लिए खींचतान तेज हो गई है।

January 30, 2025 · admin · 1 मिनट पढ़ें

div class=”f3e032cb”div

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन चुनाव में लखनऊ जिला अध्यक्ष की कुर्सी के लिए खींचतान तेज हो गई है। 40 से अधिक नेताओं ने दावेदारी की है। चुनावी गुणा-गणित के बीच लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।

div class=” cf559a0e b06c8b9b ”
div id=”Ad–28928716–Bhaskar–Article–M.DAB_AS_MID_300x250″ class=”fbad50ce”div
div

बीजेपी लखनऊ जिलाध्यक्ष पद के चुनाव में वर्तमान जिला अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह भी मजबूती दावेदारी पेश कर रहे है। उन्होंने संगठन और प्रदेश नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए दोबारा नामांकन किया है। यह राह उनके लिए आसान नहीं दिख रही है, क्योंकि कई वरिष्ठ नेता और दावेदार खुलकर मैदान में उतर चुके हैं।

इनमें पूर्व जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी, अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष कामता प्रसाद रावत, किसान मोर्चा के अध्यक्ष अतुल मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष रवि प्रकाश तिवारी और मनोज प्रजापति जैसे दिग्गज शामिल हैं।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने जिला संगठन पर उठाए सवाल

मोहनलालगंज के पूर्व सांसद कौशल किशोर ने पार्टी के प्रदर्शन और नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 2024 लोक सभा चुनाव में अपनी हार के लिए मौजूदा जिला नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। कौशल किशोर का समर्थन किन दावेदारों के साथ है, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उनकी नाराजगी संगठन के लिए चुनौती बन सकती है।

div class=”f3e032cb “div
div class=”f46ba790″div

जमीनी पकड़ रखने वाले नेता को चुनना होगा

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार प्रभा शंकर ने कहा- बीजेपी के लिए यह चुनाव केवल नेतृत्व बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह आगामी लोकसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं की एकजुटता को भी परखेगा। मोहनलालगंज से मिली हार संगठन के कामकाज पर सवाल खड़े करती है। पार्टी को इस बार युवा और जमीनी पकड़ रखने वाले नेतृत्व पर भरोसा करना होगा।

ओबीसी चेहरे पर फिर भरोसा संभव

​​​​​​​पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि बीजेपी इस बार भी ओबीसी चेहरे पर भरोसा जता सकती है। निवर्तमान अध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी और विनय प्रताप सिंह जैसे नाम इस रेस में प्रमुख हैं। संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण जिले में नेतृत्व का चयन जातीय समीकरणों और प्रदर्शन के आधार पर होगा।

div class=”f3e032cb “बीजेपी लखनऊ ओबीसी मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने लखनऊ जिला अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।div
div class=”f46ba790″बीजेपी लखनऊ ओबीसी मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने लखनऊ जिला अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।div
divdiv

दिल्ली से लगेगी अंतिम मुहर

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी का प्रदेश नेतृत्व फिलहाल इस मुद्दे पर चुप है। माना जा रहा है कि 5 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के मतदान के बाद ही लखनऊ समेत प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव पर भी संगठन की नजरें हैं, जिसके चलते सूची पर विचार फिलहाल टाल दिया गया है।

संगठन बनाम क्षेत्रीय नेता

जिला अध्यक्ष पद के लिए हो रही खींचतान ने संगठन और क्षेत्रीय नेताओं के बीच तनातनी को उजागर किया है। जहां विनय प्रताप सिंह ने अपनी उपलब्धियों का हवाला देते हुए पद पर बने रहने का दावा किया है, वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी जैसे वरिष्ठ नेता भी अपनी दावेदारी मजबूत मान रहे हैं।

div class=”f3e032cb “खींचतान ने संगठन और क्षेत्रीय नेताओं के बीच तनातनी को उजागर किया।div
div class=”f46ba790″खींचतान ने संगठन और क्षेत्रीय नेताओं के बीच तनातनी को उजागर किया।div
divdiv

कुर्सी की जंग में बढ़ा सस्पेंस

इन सबके बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर प्रदेश नेतृत्व किसके पक्ष में फैसला करता है। क्या संगठन का अनुशासन कायम रहेगा, या फिर क्षेत्रीय नेताओं की खींचतान बीजेपी को नई रणनीति बनाने पर मजबूर करेगी।

नेताओं की नाराजगी को संभालना चुनौती

प्रभा शंकर का कहना है- लखनऊ जैसे बड़े और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले में नेतृत्व का चयन आगामी चुनावी रणनीति को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। कौशल किशोर जैसे नेताओं की नाराजगी को संभालना भी पार्टी के लिए चुनौती है।

लखनऊ जिला अध्यक्ष पद के लिए जो भी फैसला होगा, वह बीजेपी के आंतरिक समीकरणों और प्रदेश नेतृत्व की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा। फिलहाल, इस चुनावी जंग में हर दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटा है।

शेयर करें:

संबंधित खबरें

और खबरें