Skip to content
September 3, 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
मां को गालियां दीं, लेकिन मैं उन्हें माफ करता हूं… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी की देश से बड़ी अपील, राष्ट्रपति ने पेपर लीक कानून संशोधन को दी मंजूरी, राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतों का रास्ता साफ *RBI का नया नियम : अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर देना होगा एकसमान ब्याज, चाहे सरकारी हो या प्राइवेट… अब चढ़ावा आठ सदस्यीय निगरानी टीम के हवाले, नई व्यवस्था 25 जुलाई से लागू विदिशा ट्रस्ट ने ‘वाइब्रेंट विदिशा’ के 15वें संस्करण का आयोजन किया; लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र स्थित हुसड़िया चौराहे के पास एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल कम डालने के आरोप को लेकर विवाद हिंसक हो गया। बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में मोहर्रम का जुलूस देख रहे एक युवक पर पुरानी रंजिश के चलते चाकू से हमला किया गया। विश्व योग दिवस पर प्रेरणा वाटिका पार्क में हुआ भव्य योग कार्यक्रम।
anya

लखपति दीदी’ बन प्रदेश की 28 लाख से अधिक महिलाएं बनीं परिवार की आर्थिक धुरी –

September 3, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहीं हैं। कभी घर की चारदीवारी और खेती-किसानी में सहयोग तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं…

उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाएं आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रहीं हैं। कभी घर की चारदीवारी और खेती-किसानी में सहयोग तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब बचतकर्ता से उद्यमी और परिवार की सहयोगी से उसकी आर्थिक ताकत बन रही हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस बदलाव को व्यापक आधार दिया है। प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बने हैं और इनमें से 28 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण समृद्धि का नया चेहरा बन गई हैं। यह बदलाव केवल महिलाओं की आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पूंजी, उत्पादन, बाजार और रोजगार का नया चक्र भी खड़ा कर रहा है।

आजीविका मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका विशाल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि गांवों में विकसित हो रहा सामुदायिक आर्थिक तंत्र है। छोटी-छोटी बचत से शुरू हुआ महिलाओं का सफर अब बैंकिंग, ऋण, उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता तक पहुंच गया है।योगी सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की पहली सीढ़ी बनाया है। समूहों से आगे 65,544 ग्राम संगठनों और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का ढांचा खड़ा कर महिलाओं को ऐसा संस्थागत आधार दिया गया है, जो उनकी आजीविका को स्थायित्व और कारोबार को विस्तार दे रहा है।

ग्रामीण आजीविका मिशन की बुनियाद सामूहिकता की उस ताकत पर टिकी है, जिसमें महिलाएं संगठित होकर अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाती हैं। स्वयं सहायता समूह में नियमित छोटी बचत से शुरुआत होती है। यही बचत वित्तीय अनुशासन पैदा करती है और आगे बैंक ऋण तथा दूसरे संस्थागत वित्त तक पहुंच का रास्ता खोलती है।

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था ने उस ग्रामीण महिला के लिए भी उद्यमिता के द्वार खोले हैं, जिसके पास न बड़ी पूंजी थी और न बाजार तक सीधी पहुंच। खेती से जुड़ी गतिविधियों से लेकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और सेवा क्षेत्र तक महिलाएं आय के नए स्रोत विकसित कर रही हैं। इससे उनकी भूमिका परिवार की अतिरिक्त कमाई करने वाली सदस्य से आगे बढ़कर आर्थिक फैसलों में भागीदार की बन रही है।

इस परिवर्तन की सबसे सशक्त तस्वीर प्रदेश की 28.16 लाख ‘लखपति दीदियां’ हैं। इन महिलाओं का लखपति बनना महज आय का एक आंकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संरचना में आ रहे बदलाव का संकेत है। नियमित और टिकाऊ आमदनी ने महिलाओं को परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए पूंजी तैयार करने की क्षमता भी दी है। महिला की आय बढ़ने का प्रभाव परिवार और गांव दोनों पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर खर्च की क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय बाजार में मांग भी पैदा होती है। यही वजह है कि लखपति दीदी अभियान को केवल महिला सशक्तीकरण के दायरे में देखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नीचे से ऊपर की ओर समृद्धि पैदा करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से सवा करोड़ परिवारों का जुड़ना मिशन के विस्तार की व्यापकता का बड़ा उदाहरण है। इतने बड़े स्तर पर ग्रामीण परिवारों को संगठित करने से गांवों में महिलाओं की सामूहिक आर्थिक शक्ति तैयार हुई है। छोटे स्तर पर पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार की जिन चुनौतियों का सामना अकेली महिला के लिए कठिन होता था, योगी सरकार के सहयोग और सामूहिक शक्ति ने उनका समाधान आसान किया है।

इस मॉडल की विशेषता यह भी है कि गरीब परिवार की आजीविका को चरणबद्ध ढंग से मजबूत किया जाता है। पहले महिला को समूह से जोड़ना, फिर बचत और वित्तीय अनुशासन विकसित करना और उसके बाद ऋण, कौशल, उत्पादन तथा बाजार से जोड़ना, यही क्रम आत्मनिर्भरता की बुनियाद तैयार कर रहा है।

स्वयं सहायता समूहों को दीर्घकालिक और संस्थागत मजबूती देने के लिए प्रदेश में 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 संकुल स्तरीय संघों का नेटवर्क खड़ा किया गया है। इस व्यवस्था ने गांव की महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के संचालन और आर्थिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी भागीदार बनाया है।

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्राम संगठन स्थानीय स्तर पर समूहों के बीच समन्वय, वित्तीय अनुशासन और आजीविका गतिविधियों को मजबूती देते हैं, जबकि संकुल स्तरीय संघ उन्हें बड़े बाजार, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। इसी मजबूत ढांचे के सहारे मिशन की ‘आत्मनिर्भर महिला, आदर्श परिवार और समृद्ध संस्था’ की अवधारणा गांवों में मूर्त रूप ले रही है।

div

Source: Filmitics

शेयर करें:

संबंधित खबरें

और खबरें

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *