कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के इंदिरानगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है…
कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के इंदिरानगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने मामले में मृतक की बहू शालू को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, शालू ने कथित तौर पर ससुर की हत्या के लिए पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम को 6 लाख रुपये की सुपारी दी थी।
पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों के बयान और मोबाइल कॉल डिटेल सामने आने के बाद मामले की दिशा बदल गई। हत्या से पहले के 21 दिनों में शालू और विशाल के बीच बातचीत के साथ-साथ शालू के पति सुब्रत और विशाल के बीच बड़ी संख्या में फोन कॉल सामने आने की बात पुलिस ने कही है।
हालांकि, शालू ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है।
कल्याणपुर के इंदिरानगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट की पहली मंजिल पर फ्लैट नंबर C-104 में 63 वर्षीय दवा कारोबारी विनीत मिनोचा रहते थे।
शनिवार देर रात बदमाशों ने कथित तौर पर फ्लैट में घुसकर उन पर चाकू से कई वार किए। पुलिस के मुताबिक, हमले में उन्हें 26 से अधिक चोटें आईं और उनकी मौत हो गई। वारदात के वक्त विनीत घर में अकेले थे।
रविवार तड़के करीब 4 बजे उनका बेटा सुब्रत, बहू शालू और परिवार के अन्य सदस्य पार्टी से वापस लौटे। घर के अंदर विनीत को मृत देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई।
सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
हत्या के बाद पुलिस ने अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के मुताबिक, फुटेज में विनीत का पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसका साथी राजकिशोर फ्लैट में जाते और कुछ समय बाद बाहर निकलते दिखाई दिए।
इसके बाद पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार, रविवार देर रात दोनों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया और उनके पैर में गोली लगी थी।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि हत्या शालू के कहने पर की गई थी। हालांकि, हत्या की पूरी साजिश में किसकी क्या भूमिका थी, इसे लेकर पुलिस की जांच जारी है।
विनीत की हत्या के बाद जब उनका बेटा और बहू घर पहुंचे तो परिवार के लोग सदमे में थे। इस दौरान शालू भी ससुर की मौत पर रोती हुई नजर आईं। उनके रोने और सदमे के वीडियो भी सामने आए थे।
शुरुआत में मामला किसी बाहरी हमलावर द्वारा की गई हत्या का लग रहा था। पुलिस ने भी पहले इसी दिशा में जांच शुरू की।
लेकिन इसके बाद पुलिस ने CCTV फुटेज, गार्ड से पूछताछ, पुराने कर्मचारियों की जानकारी और मोबाइल कॉल डिटेल की जांच शुरू की। इसी दौरान पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम का नाम सामने आया और जांच की दिशा बदल गई।
पुलिस के अनुसार, शालू घर में लगे सीसीटीवी कैमरों और घर के खर्च का हिसाब लिए जाने को लेकर अपने ससुर विनीत से नाराज थी। पुलिस का दावा है कि इसी नाराजगी के चलते कथित तौर पर हत्या की साजिश रची गई।
पुलिस के मुताबिक, शालू ने पूर्व कर्मचारी विशाल को 6 लाख रुपये की सुपारी देने की बात कही थी।
हालांकि, यह पुलिस का आरोप है और शालू की ओर से आरोपों की स्वीकारोक्ति नहीं हुई है। पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है।
डीसीपी एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, पूछताछ में यह बात सामने आई कि शालू ने विशाल से कथित तौर पर कहा था कि विनीत के सो जाने के बाद तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी जाए।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद हत्या को हार्ट अटैक से हुई सामान्य मौत का रूप देने की योजना थी।
कथित योजना के मुताबिक, शालू और उसके पति सुब्रत के घर लौटने के बाद विनीत की मौत को स्वाभाविक बताकर लोगों को गुमराह किया जाना था।
लेकिन पुलिस के अनुसार, घटनाक्रम योजना के मुताबिक नहीं हुआ।
पुलिस के मुताबिक, विशाल और राजकिशोर दंपती के बेडरूम में दरवाजे के पीछे छिपे हुए थे। ऑटोमेटिक लॉक सिस्टम की वजह से दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हो सका।
इसके बाद जब विनीत अपने कमरे की ओर जा रहे थे तो उनकी नजर बेटे के कमरे के अधखुले दरवाजे और अंदर जल रही लाइट पर पड़ी।
पुलिस के अनुसार, लाइट बंद करने के लिए जैसे ही विनीत कमरे में पहुंचे, उनका सामना दोनों आरोपियों से हो गया।
पुलिस के मुताबिक, कमरे में सामना होने के बाद विशाल ने विनीत पर चाकू से हमला किया, जबकि उसका साथी राजकिशोर उन्हें पकड़कर रखे हुए था।
इसके बाद दोनों आरोपी मौके से निकल गए। पुलिस अब हत्या की पूरी टाइमलाइन और सभी आरोपियों की कथित भूमिका को दूसरे साक्ष्यों से जोड़कर जांच रही है।
कानपुर के इस हत्याकांड में मोबाइल कॉल डिटेल भी जांच का अहम हिस्सा बनी है।
पुलिस के अनुसार, हत्या से पहले के करीब 21 दिनों में शालू और विशाल के बीच लगभग 30 बार फोन पर बातचीत हुई। वहीं शालू के पति सुब्रत और विशाल के बीच करीब 300 बार फोन कॉल हुई।
इस तरह दोनों के बीच कुल करीब 330 कॉल की जानकारी सामने आने की बात पुलिस ने कही है।
हालांकि, केवल कॉल की संख्या से बातचीत की प्रकृति या किसी अपराध में भूमिका साबित नहीं होती। पुलिस इन कॉल रिकॉर्ड को आरोपियों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर जांच कर रही है।
कॉल डिटेल में विशाल के साथ बड़ी संख्या में बातचीत सामने आने के बाद पुलिस ने सुब्रत से भी पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार, सुब्रत ने बताया कि विशाल पहले उनके परिवार के साथ काम कर चुका था और वह उसके जरिए छोटे-मोटे काम करवाते थे। इसी वजह से दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी।
फिलहाल पुलिस सुब्रत की भूमिका की जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हत्या में उसकी भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है और उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है।
जांच में एक और अहम बात सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार, अपार्टमेंट के गार्ड को विशाल का नाम ‘शुभम’ बताया गया था।
पुलिस का दावा है कि शालू ने गार्ड से कहा था कि शुभम बुके लेकर आएगा और उसे फ्लैट तक भेज दिया जाए।
इससे पुलिस को आशंका है कि विशाल की वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश की गई थी। बुके पहुंचाने के बाद शालू और सुब्रत अपने बेटे के साथ पार्टी के लिए निकल गए थे। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद दोनों हमलावर भी मौके से चले गए।
इस मामले में पुलिस ने शालू के अलावा पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और राजकिशोर को भी गिरफ्तार किया है। दोनों को कोर्ट के आदेश पर जेल भेजे जाने की बात सामने आई है।
अब पुलिस के सामने मुख्य सवाल हैं—
पुलिस इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही है।
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Source: Filmitics

