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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिसकर्मियों पर जमीन कब्जाने और वास्तविक मालिक को धमकी देने के आरोपों से जुड़े एक मामले में डीसीपी गोमती नगर की जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अब पुलिस कमिश्नर को इस मामले की खुद जांच करने और अगली सुनवाई पर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने अरविंद कुमार शर्मा की याचिका पर यह आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है।
पुलिस कमिश्नर को जांच करने का आदेश
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को एक विशेष बिंदु पर भी जांच करने का निर्देश दिया है। इसमें यह पता लगाना है कि गोमती नगर थाने के तत्कालीन मालखाना इंचार्ज अवधेश सिंह ने अपनी पत्नी के नाम पर याचिकाकर्ता की जमीन के एक किलोमीटर के दायरे में कोई अन्य जमीन खरीदी है या नहीं, और क्या वह याचिकाकर्ता को अपनी जमीन जबरन बेचने के लिए परेशान कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अविरल जायसवाल ने बताया कि याचिकाकर्ता अरविंद कुमार शर्मा ने खरगापुर में कुल 2250 वर्ग फीट जमीन वर्ष 2004 और 2008 में खरीदी थी। वर्ष 2018 से सलीम नामक एक व्यक्ति उन्हें इस जमीन से बेदखल करने का प्रयास कर रहा है।
जमीन बेचने का दबाव डाला
याचिकाकर्ता ने इसकी शिकायत आला अधिकारियों से की थी। 2 नवंबर 2020 को जब कुछ लोग जबरन जमीन पर कब्जा करने आए, तो याचिकाकर्ता के बेटे ने पुलिस को फोन किया। आरोप है कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज खरगापुर ने याचिकाकर्ता और उनके बेटे पर उन्हीं लोगों को जमीन बेचने का दबाव डालना शुरू कर दिया था, जो उन्हें बेदखल करना चाहते थे।
पुलिस ने याचिकाकर्ता को धमकाया था
इस दौरान गोमती नगर थाने के तत्कालीन मालखाना इंचार्ज अवधेश सिंह ने याची के बेटे को धमकी दी कि वह जमीन उन्हें बेंच दे। अन्यथा निर्माण उसने कराया है, उस पर बुलडोजर चला दिया जाएगा। गोमती नगर थाने के ही एक अन्य दरोगा अरविन्द पंत पर भी याची के बेटे को धमकाने का आरोप है।
कहा गया कि इतनी धमकियों के बावजूद जब याची अपनी जमीन बेचने को तैयार नहीं हुआ तो मालखाना इंचार्ज अवधेश सिंह की पत्नी उर्मिला सिंह के नाम सलीम के पिता मो. हनीफ़ द्वारा एक बैनामा किया गया, उक्त बैनामा में याची के जमीन की चौहद्दी अंकित की गई।
प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया
आरोप है कि अब स्थानीय पुलिस व उक्त पुलिसकर्मी याची को जमीन से बेदखल करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, जबकि शिकायत के बावजूद पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं मामले को सिविल विवाद मानते हुए, सीजेएम, लखनऊ ने भी याची के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।




