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अंतराष्ट्रीय

अमेरिकी रिपोर्ट ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत को हराया पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला नहीं माना कांग्रेस बोली क्या पीएम विरोध जताएंगे ?

By admin · November 20, 2025 · 1 min read

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष का इस्तेमाल अपने हथियारों की मार्केटिंग के लिए किया था। (फोटो- AI जनरेटेड) - Dainik Bhaskar
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष का इस्तेमाल अपने हथियारों की मार्केटिंग के लिए किया था। (फोटो- AI जनरेटेड)

एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 4 दिन की लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में पाकिस्तान को बड़ी सैन्य कामयाबी मिली थी।

इस रिपोर्ट में पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला न मानकर ‘विद्रोही हमला’ माना गया है। 800 पन्नों की इस रिपोर्ट को यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने जारी किया है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट का विरोध जताते हुए इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे और विरोध जताएंगे? हमारी कूटनीति को एक और बड़ा झटका लगा है।

रिपोर्ट में किए गए दावे का स्क्रीनशॉट

दावा- राफेल की इमेज को नुकसान

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने कम से कम 6 भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराया, जिनमें राफेल जेट भी शामिल हैं। इससे राफेल की इमेज को नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट कहती है कि वास्तविक रूप से सिर्फ तीन भारतीय विमानों के गिराए जाने की पुष्टि होती है।

USCC का कहना है कि चीन ने भारत-पाकिस्तान युद्ध का इस्तेमाल अपने आधुनिक हथियारों को लाइव वॉर में टेस्ट करने और दुनिया को दिखाने के लिए किया।

लड़ाई के बाद दुनियाभर में चीनी दूतावासों ने अपने हथियारों की तारीफ की और कहा कि पाकिस्तान ने इनके इस्तेमाल से भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराया।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष के 5 महीने बाद चीन ने इंडोनेशिया को 75 हजार करोड़ रुपए में 42 J-10C फाइटर जेट बेचने की डील की थी।

दावा- पाकिस्तान को चीन से खुफिया इंटेलिजेंस मिले

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस लड़ाई में चीन से मिले हथियारों का इस्तेमाल किया और अपने सैन्य फायदे को दुनिया के सामने रखा। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने चीन के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइलें और J-10 फाइटर जेट का इस्तेमाल किया।

भारत का दावा है कि पाकिस्तान को इस दौरान चीन से खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस) भी मिली। हालांकि पाकिस्तान ने इसे नकार दिया और चीन ने इस पर कुछ भी साफ नहीं कहा। रिपोर्ट के मुताबिक 2019–2023 के बीच पाकिस्तान के 82% हथियार चीन से आए हैं।

रिपोर्ट जारी करने वाली USCC के बारे में जानिए

  1. 90 के आखिरी दशक में जब चीन बहुत तेजी से आर्थिक और तकनीकी तौर पर ताकतवर हो रहा था तो अमेरिका में इसे लेकर चिंता बढ़ी।
  2. अमेरिकी नेता यह मानने लगे कि चीन से आने वाले आर्थिक फायदे और सुरक्षा खतरे दोनों को साथ-साथ समझना जरूरी है।
  3. ऐसे में चीन पर नजर रखने के लिए एक कमेटी बनाई गई जिसका काम यह पता लगाना था कि चीन की आर्थिक या तकनीकी गतिविधि अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं बन रहीं।
  4. USCC खुद कोई कार्रवाई नहीं करती, बस रिपोर्ट बनाकर अमेरिका की संसद को देती है।
  5. आयोग की सिफारिशों को अंतिम रिपोर्ट में शामिल करने के लिए, उन्हें कम से कम 8 सदस्यों (दो-तिहाई) के समर्थन की जरूरत होती है।

चीनी मीडिया ने रिपोर्ट पर सवाल उठाए

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने USCC की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। अखबार लिखता है कि USCC ने एक बार फिर से चीन की आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्र में हो रही तरक्की को ऐसे दिखाया गया है कि जैसे वह दुनिया के लिए खतरा हो।

अभी का रवैया दिखाता है कि यह रिपोर्ट राजनीतिक मकसद से लिखी गई है और हकीकत का पूरी निष्पक्षता से विश्लेषण नहीं करती। आयोग के भीतर चीन को लेकर भारी गलतफहमियां और अहंकार मौजूद है। अखबार आगे लिखता है कि अमेरिका को चीन को और ज्यादा बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है।

अखबार का कहना है कि चीन की हथियार इंडस्ट्री के विकास को लेकर आरोप लगाना या उसे गलत तरीके से पेश करना, किसी भी संप्रभु देश के अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने के मूल अधिकार को नकारने जैसा है।

अखबार ने लिखा- अमेरिका सप्लाई चेन को हथियार जैसे इस्तेमाल करता है

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है कि सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का काम चीन का नहीं बल्कि अमेरिका का है। अमेरिका ने चिप टेक्नोलॉजी पर रोक, मिलिट्री इक्विपमेंट पर बैन, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करना और अपने सहयोगी देशों पर दबाव डालकर चीन के खिलाफ मोर्चा खड़ा करने की कोशिश की है।

इसके मुकाबले चीन का रिएक्शन सिर्फ अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में है, न कि दुनिया को नुकसान पहुंचाने के लिए। चीन की दुर्लभ खनिज नीति सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए बनाई गई है, न कि निर्यात रोकने के लिए।

आखिरकार यह रिपोर्ट दिखाती है कि बदलती दुनिया को समझने में अमेरिका को मुश्किल हो रही है। हर साल एक जैसी बातें दोहराना, तथ्यों को नजरअंदाज करना और राजनीतिक पूर्वाग्रह पकड़े रहना, इन सबने इस रिपोर्ट की प्रतिष्ठा दुनियाभर में कमजोर कर दी है।

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