
रुपईडीहा। नेपाल सीमा से सटे रुपईडीहा बाजार में मार्गों पर ठेले ही ठेले नजर आते हैं। वाहनों को तो छोड़िए। राहगीर भी पैदल नही निकल सकते।

आदर्श नगर पंचायत रुपईडीहा, पुलिस व राजस्व कर्मी स्वयं देखते हैं। परंतु इस घोर जनसमस्या के प्रति सभी उदासीन हैं। इस समय स्टेशन रोड पर बनी दोनो ओर की नालियों पर परमानेंट ठेले खड़े रहते हैं। नगर पंचायत ने कई बार माइकिंग कर सचेत भी किया। परंतु इसका कोई प्रभाव नही पड़ा। दर्जनों की संख्या में स्टेशन रोड पर थाने से लेकर दोनो ओर सेंट्रल बैंक चौराहे तक दोनो ओर ठेले वालों का ही कब्जा बना हुआ है। सेंट्रल बैंक चौराहे से चकियारोड तक, थोक सब्जी मंडी के सामने व मालगोदाम रोड पर भी ठेले वालों ने कब्जा कर रखा है।
इन ठेलों पर क्रॉकरी, ड्राई फ्रूट्स, जूते चप्पल, होजरी, सर्दियों के गर्म कपड़े, कॉस्मेटिक आइटम, सब्जी, झोले व मोजे आदि सारा सामान ठेलों पर बिक रहा है। स्टेशन रोड से होकर रुपईडीहा डिपो की पचासों बसों का आना व जाना है। रास्ता न मिलने के कारण ठेले वालों से आएदिन बस चालकों व परिचालकों से विवाद होता रहता है। रुपईडीहा के ठेले तो कम हैं। बाहर के बड़े व्यापारियों ने यहां बड़े बड़े गोदाम ले रखे हैं। नाबालिग लड़कों को 5 सौ रुपये दिहाड़ी पर रखकर यह सारा सामान बिकवाते हैं। ठेले इनके अपने होते हैं। गोदाम बंद कर बाबागंज, नानपारा, बहराइच, मिहींपुरवा, मटेरा, रिसिया, नवाबगंज, चरदा, जमोग व लखीमपुर तक के बड़े व्यापारी इन ठेलों का संचालन करते हैं।
क्या कहते हैं एआरएम रुपईडीहा डिपो।
इस संबंध में जब एआरएम रुपईडीहा डिपो राम प्रकाश से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैंने इस संबंध में कई बार नगर पंचायत व पुलिस में शिकायतें की हैं। परंतु ठेलों की समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ठेले वालों आईडी देखी जाए। कम से कम बाहरी ठेले ही कम हों। बसों का आवागमन बुरी तरह बाधित है।
नीरज कुमार बरनवाल रुपईडीहा
1/1/2026

