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यह मामला देवरिया जिला मुख्यालय के गोरखपुर रोड पर स्थित अब्दुल शाह गनी मजार और कब्रिस्तान से संबंधित है। मजार समिति पर सरकारी बंजर भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप है। जिला प्रशासन पहले से ही इस भूमि को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
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इसी बीच, मजार संचालन से जुड़ी संस्था ने तीन और चार जनवरी को उर्स के आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी थीं। प्रस्तावित आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और इसकी शिकायत सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी से की।
शिकायत मिलने के बाद विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिखा। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि जिस भूमि पर आयोजन प्रस्तावित है, वह पूरी तरह सरकारी है और उस पर किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन कानून के खिलाफ है। उन्होंने सरकारी भूमि पर ऐसे आयोजनों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
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उधर, उर्स आयोजन के लिए समिति के सदस्यों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को पत्र सौंपकर अनुमति मांगी थी। इस संबंध में सदर कोतवाली पुलिस ने जांच की। पुलिस जांच में यह सामने आया कि विवादित भूमि पर धार्मिक आयोजन होने से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है।
पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उर्स के आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और विवादित स्थल पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है।





