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September 7, 2026
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योगी-अखिलेश आमने-सामने! गाने से शुरू हुई 2027 की महाभारत, AI वीडियो पर मचा बवाल –

September 1, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

यूपी में चुनावी ज्वालामुखी अभी फटा भी नहीं था कि उसकी तपिश ने सियासत को झुलसाना शुरू कर दिया है! विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन योगी बनाम अखिलेश की ल…

यूपी में चुनावी ज्वालामुखी अभी फटा भी नहीं था कि उसकी तपिश ने सियासत को झुलसाना शुरू कर दिया है! विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन योगी बनाम अखिलेश की लड़ाई अब सीधे आमने-सामने आ चुकी है। और इस बार हथियार बना है—चुनावी गाना और AI वीडियो! एक तरफ बीजेपी ने अखिलेश यादव के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए अपने गाने में ‘टिपुआ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की ओर से सामने आए AI वीडियो को लेकर जबरदस्त राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है।

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इस वीडियो में साधु-संतों और भगवान राम मंदिर के चोरी से जुड़े कथित तौर पर आपत्तिजनक दृश्य दिखाए गए हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ को भगवा वस्त्र में गांजा पीते हुए दिखाया गया हैं। . बस फिर क्या था—बीजेपी ने इसे हाथों-हाथ लपक लिया। बीजेपी का आरोप है कि इस वीडियो ने अखिलेश यादव की सोच और हिंदू धर्म, भगवा रंग, भगवान राम और साधु-संतों को लेकर उनकी मानसिकता को उजागर कर दिया है। हालांकि, यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 2027 का यूपी चुनाव विकास और जनता के मुद्दों पर लड़ा जाएगा या फिर गानों, AI वीडियो और एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने पर? क्योंकि बिहार चुनाव का उदाहरण अभी बहुत पुराना नहीं है। वहां एक विवादित चुनावी गाने को बीजेपी ने तेजस्वी यादव के शासनकाल की कथित गुंडागर्दी से जोड़कर ऐसा मुद्दा बनाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने अपने भाषण में उसका जिक्र किया। बीजेपी ने उस नैरेटिव को चुनावी मुद्दा बना दिया और तेजस्वी के खिलाफ माहौल तैयार करने में उसे इस्तेमाल किया। अब वही सियासी प्रयोग यूपी में दोहराता हुआ दिखाई दे रहा है—लेकिन इस बार निशाने पर हैं योगी और अखिलेश। सवाल यह है कि AI के इस दौर में एक वीडियो और एक गाना चुनावी हवा का रुख कितना बदल सकता है? क्योंकि जनता सिर्फ रील और गाना नहीं देखती—वह सरकार का काम भी देखती है। चुनाव आएगा, मुद्दे आएंगे और फैसला भी जनता ही करेगी। लेकिन अगर राजनीति करनी है तो बेहतर होगा कि मुकाबला रोजगार, कानून-व्यवस्था, विकास, शिक्षा और जनता के मुद्दों पर हो—न कि भगवा, साधु-संत और AI की फूहड़ तस्वीरों के सहारे। अब देखना यही है—2027 में चलेगा विकास का मुद्दा या फिर गाने और AI वीडियो ही बनाएंगे चुनाव का माहौल

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Source: Filmitics

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