दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मॉब लिंचिंग का मामला दर्ज किया है. वो घर के बाहर बज रहे तेज़ संगीत का विरोध कर रहे थे.
मणिपुर के रहने वाले संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की रविवार रात कुछ लोगों के कथित हमले में लगी चोटों के कारण सोमवार को मौत हो गई. चोंगथम दिल्ली के आश्रम इलाक़े में रह रहे थे
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अभियुक्तों की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि मामले में 7 वयस्कों और एक नाबालिग को गिरफ़्तार किया गया है
पुलिस ने बताया कि सभी अभियुक्त अलग-अलग ढाबों और फूड स्टॉल पर काम करते हैं. पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मॉब लिंचिंग का मामला दर्ज किया है
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, चोंगथम के बेटे याइफाबा ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि अस्पताल ले जाते समय उनके पिता ने उन्हें बताया था कि पास के एक ढाबे के लोगों ने उन पर हमला किया. शिकायत के मुताबिक़, इनमें से कुछ लोगों ने पहले भी ज़्यादा शोर करने की शिकायत करने के बाद सिंह को धमकी दी थी
इंफाल के रहने वाले सिंह गिटारिस्ट और संगीतकार थे. वह रॉक बैंड्स का हिस्सा रह चुके थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से काम नहीं कर रहे थे. वह कई वर्षों से संगीत प्रस्तुत करते रहे थे और संगीत शिक्षक भी थे
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता एन. बीरेन सिंह ने कहा कि वह इस घटना से बहुत दुखी और बेहद चिंतित हैं
मॉब लिंचिंग का मामला
एन. बीरेन सिंह ने कहा, “अब घटना के संबंध में सबूत सामने आ रहे हैं. मैं दिल्ली पुलिस से अपील करता हूँ कि वह तेज़ी से और उचित कार्रवाई करे, मामले की पूरी तरह जांच करे और जल्द से जल्द इंसाफ़ सुनिश्चित करे.”
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दिल्ली पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है. इसमें नस्ल, जाति या समुदाय के आधार पर पांच या उससे अधिक लोगों के समूह से हत्या करना शामिल है. साथ ही बीएनएस की धारा 3(5) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है
पीटीआई के अनुसार, सनलाइट कॉलोनी पुलिस थाने को मणिपुर के रहने वाले सी विक्रम सिंह की पिटाई की सूचना देने वाली पीसीआर कॉल मिली थी
पुलिस ने बताया कि सिंह के बेटे याइफाबा उन्हें होली फैमिली अस्पताल ले गए, जहाँ बाद में चोटों के कारण उनकी मौत हो गई
दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स सोसाइटी ने सिंह की मौत पर शोक जताया और उन्हें सम्मानित मणिपुरी संगीतकार बताया
छात्र संगठन ने कहा, “रिपोर्टों के मुताबिक़, किलोकरी, नई दिल्ली स्थित अपने घर के बाहर छह लोगों के एक समूह के कथित तौर पर शराब पीने और हंगामा करने के बाद सिंह नीचे आए थे. जब उन्होंने उनसे शोर कम करने के लिए कहा, तो कथित तौर पर समूह ने उन पर हमला कर दिया. उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण बाद में उनकी मौत हो गई.”
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार रात करीब 11:30 बजे याइफाबा और उनकी मां घर पर थे, तभी उन्होंने तेज़ आवाजें और सिंह के चीखने की आवाज सुनी. याइफाबा ने बताया कि जब उन्होंने दरवाज़ा खोला तो उन्होंने चार-पांच लोगों को अपने पिता पर हमला करते देखा. वे उन्हें लात और घूंसों से मार रहे थे. जब उन्होंने शोर मचाया और हमलावरों को रोकने की कोशिश की तो वे वहां से भाग गए. याइफाबा ने कहा कि उन्होंने कुछ हमलावरों के चेहरे देखे थे.”
कांग्रेस ने कहा- अनदेखी के कारण हुई हत्या
याइफाबा और उनकी मां सिंह को टैक्सी से एक निजी अस्पताल ले गए, जहां सोमवार सुबह उनकी मौत हो गई. उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए एम्स ले जाया गया
कांग्रेस नेता और सांसद पवन खेड़ा ने इस मौत पर कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण ऐसा हो रहा है
पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा है, ”मणिपुर के रहने वाले संगीतकार सी. विक्रम सिंह ने दिल्ली में अपने घर के बाहर हो रहे शोर और हंगामे पर आपत्ति जताई. उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया. इसे शराब के नशे में हुई हिंसा की एक अलग-थलग घटना कहकर ख़ारिज किया जा सकता है. लेकिन मामला इससे कहीं ज़्यादा गंभीर है.”
”यह घटना उन वर्षों के बाद हुई है, जब सरकार ने तेज़ आवाज़ में बजने वाले डीजे सार्वजनिक हंगामे और नियमों की खुलेआम अनदेखी को सामान्य और जायज बनाने का काम किया है. क़ानून को लगातार और समान रूप से लागू करने के बजाय, सत्ता में बैठे लोगों ने अक्सर इस पर आंखें मूंद लीं, जिससे सज़ा से बचने की संस्कृति को बढ़ावा मिला. हो सकता है कि विक्रम सिंह की जान लेने वाला डंडा सरकार के हाथ में न रहा हो. लेकिन उनकी हत्या तक पहुँचाने वाला माहौल बनाने की ज़िम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती.”
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Source: BBC News हिन्दी

