
छांगुर बाबा ATS की रिमांड पर है। टीम उसे लेकर बलरामपुर में उसके हवेली भी गई। लेकिन वह टीम को लगातार गुमराह कर रहा है। जितने भी सवाल उससे पूछ जा रहे हैं, उसमें वह किसी का भी सही जवाब नहीं दे रहा है। सूत्र बताते हैं कि छांगुर बाबा ने ATS की रिमांड में बताया है कि डोनेशन के पैसा का इस्तेमाल हो धर्म प्रचार के लिए करता था, न कि धर्मांतरण के लिए। धर्म के प्रचार के लिए उसने विदेश यात्राएं भी कीं।
ATS सूत्रों ने बताया कि छांगुर की पूछताछ के आधार पर 4 संदिग्धों के नेपाल से बने पासपोर्ट की जानकारी सामने आई है, जिनके जरिए उन्हें दुबई की यात्रा की और कराई गई। एटीएस अब इन चारों की तलाश और विदेश कनेक्शन की कड़ी पड़ताल कर रही है। डोनेशन और नेपाल के पासपोर्ट से दुबई तक की आवाजाही के प्रमाण की पुष्टि की जा रही है।
छांगुर और गैंग के खातों की पड़ताल शुरू
सूत्रों के अनुसार- पूछताछ में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा ने एटीएस को बताया- “जो करोड़ों के ट्रांजैक्शन हुए हैं, वे सब डोनेशन के तौर पर अलग-अलग खातों में आए। इसका उपयोग धार्मिक आयोजनों और प्रचार के लिए किया गया। एटीएस को संदेह है कि इसी धार्मिक आयोजन के नाम पर धर्म परिवर्तन की जमीन तैयार की जाती थी। बहरहाल, छांगुर और उसके गैंग के लोगों के खातों की पड़ताल शुरू हो गई है।’

कोठी से हुई पुष्टि, यहीं चलता था पूरा नेटवर्क
मंगलवार को एटीएस टीम ने छांगुर बाबा और नीतू उर्फ नसरीन को लेकर बलरामपुर के मधपुर गांव स्थित कोठी पर तीन घंटे की सघन जांच की। इस दौरान उस कमरे की पहचान कराई गई, जहां ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण कराया जाता था। नीतू की भूमिका पर फोकस किया गया कि कैसे वह गरीब महिलाओं और परिवारों को फंसाती थी। पूरे परिसर की फिजिकल वेरिफिकेशन और बयान से मेल कराई गई।
कोठी से लौटने के बाद दोनों आरोपियों को लखनऊ ATS मुख्यालय लाया गया, जहां इंटरनेशनल लेन-देन, फंडिंग नेटवर्क और रिक्रूटमेंट सिस्टम पर पूछताछ जारी है। शुक्रवार को तीसरा दिन है। ATS ने एनआईए कोर्ट से 10 जुलाई से 16 जुलाई तक की कस्टडी रिमांड ली है।

इन सवालों पर पूछताछ जारी
रोहरा दंपती की बेटी के जरिए विरासत कब्जाने की साजिश?
5 साल से धर्मांतरण का खेल खेलने वाला छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन अब सिर्फ एक आरोपी नहीं, एक सुनियोजित साम्राज्य का मास्टरमाइंड साबित हो रहा है। यूपी ATS की पूछताछ में जो खुलासे हो रहे हैं, वो न सिर्फ धर्मांतरण के जरिए अवैध कमाई तक सीमित हैं, बल्कि अब यह मामला एक नाबालिग लड़की के जरिए विरासत कब्जाने की साजिश तक पहुंच गया है।
बाबा ने धर्म, दहेज और दावा का ऐसा जाल बिछाया जिसमें भक्तों की भावनाएं, जमीनें और उनकी संतानें तक मोहरा बना दी गईं। अब मामला दुबई कनेक्शन से लेकर रोहरा दंपती, अहमद खान और 100 करोड़ की अवैध संपत्तियों की जांच तक पहुंच चुका है। सवाल है कि क्या ताबीज लेने के बाद रोहरा दंपती को बेटी हुई तभी वे छांगुर के मुरीद बन गए।
ATS प्रमुख अमिताभ यश ने कहा है कि बाबा के खिलाफ दर्ज FIR की कॉपी ईडी को सौंपी जा चुकी है और जल्द ही अवैध संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। लेकिन, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है-बाबा के निशाने पर रही रोहरा दंपती की नाबालिग बच्ची आखिर इस समय कहां है?

रोहरा की बेटी का निकाह कराकर संपत्ति कब्जाना चाहता था?
बताया जा रहा है कि नवीन रोहरा और नीतू नसरीन ने जब बाबा से संपर्क किया, तब उनके कोई संतान नहीं थी। ऐसे में सवाल है कि क्या बाबा ने उन्हें ताबीज दिया तब बच्ची पैदा हुई। उसके बाद शुरू हुआ भावनात्मक कब्जे का खेल। बाबा ने बच्ची को “अपनी कृपा” बताया। अब सामने आ रहा है कि वह उस बच्ची को ही अपने परिवार में मिलाकर करोड़ों की विरासत को कब्जे में रखना चाहता था।
ATS के मुताबिक, छांगुर बाबा की संपत्तियों के दस्तावेज मिलने के बाद जांच यूपी से बाहर के राज्यों और दुबई तक फैल गई है। बाबा ने धर्मांतरण से मिले विदेशी फंड को जमीनों और संपत्तियों में लगाया। अब ईडी इस पूरे ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।
छांगुर बाबा और नीतू उर्फ नसरीन 7 दिन की ATS रिमांड पर हैं। पूछताछ अब तक धर्मांतरण के नेटवर्क से निकलकर “बाबा की अगली पीढ़ी में प्रभाव बनाए रखने की योजना” तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, बाबा बलरामपुर के रोहरा दंपती की बच्ची को अपनी बेटी के बेटे से निकाह कराकर उसे ‘वंश की कड़ी’ बनाना चाहता था।
अहमद खान, जो खाता सीज होने पर काम आता था
मोहम्मद अहमद खान वही व्यक्ति बताया जा रहा है, जिसकी मदद से छांगुर बाबा का पैसा चलता रहा। जब छांगुर का खाता सीज हो गया था, तो मोहम्मद अहमद खान इसके लिए ट्रांजैक्शन करता था। सूत्रों के अनुसार, वही इस समय उस नाबालिग बच्ची की देखभाल भी कर रहा है।
शिकायत करने वालों को ही फंसाया गया
स्थानीय लोगों का दावा है कि बाबा की कोठी में रोजाना बाहरी लोगों का आना-जाना था। जब लोगों ने इसकी शिकायत की, तो उल्टे उन्हीं पर मुकदमे लाद दिए गए। बाबा के संरक्षकों में कुछ अफसरों और नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब ATS के सामने ये 5 सबसे अहम सवाल
- नाबालिग लड़की कहां है? क्या वह किसी खतरे में है?
- क्या संपत्ति हस्तांतरण उसी के नाम या संबंध में था?
- अहमद खान और उसके सहयोगियों की भूमिका क्या थी?
- बाबा के पीछे कौन था जो उसे संरक्षण दे रहा था?
- क्या ये एक पीढ़ीगत ‘कब्जा सिंडिकेट’ है जो धर्म की आड़ में चल रहा था?

