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अब 23 फरवरी तक में थानों में लगे CCTV कैमरों की पूरी रिपोर्ट चाहिए। अगली सुनवाई उसी दिन होगी। अगर उस दिन जांच रिपोर्ट नहीं पेश हो पाएगी तो आपको खुद ही व्यक्तिगत रूप से कोर्ट रूम में पेश होना पड़ेगा। वहीं पर आपसे पूरा जवाब लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता को थाने में प्रताड़ित किया गया
दरअसल, सुल्तानपुर के याचिकाकर्ता श्याम सुंदर अग्रहरि ने याचिका दाखिल की थी। उनके वकील शिवेंद्र सिंह राठौर ने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता एक दिव्यांग व्यक्ति है, जिसे हत्या के प्रयास के एक कथित मामले में कथित तौर पर फर्जी तरीके से फंसाया गया है।
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याचिका में सुल्तानपुर के मोतीगरपुर थाने में उसे प्रताड़ित किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इस याचिका की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस से थानों में लगे CCTV कैमरों के फुटेज मांगे थे, जिसके जवाब में बताया गया कि कैमरे काम नहीं कर रहे हैं।
एक ही जवाब, कैमरे बंद या खराब थे
इस पर न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने कहा कि यह एक ही बहाना बार-बार नहीं चलेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई (23 फरवरी) तक जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं होती है, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब भी थानों से सीसीटीवी फुटेज मांगी जाती है, तो एक ही जवाब मिलता है कि कैमरे बंद थे या खराब थे। न्यायालय ने इसे अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज समय पर प्रस्तुत न करने का प्रयास माना और उत्तर प्रदेश पुलिस के इस व्यवहार को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करार दिया।




