
मौलाना सैफ ने कहा- हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपने ईरानी भाइयों के गम में शामिल हों। रमजान के बाद ईद की नमाज़ में शांति के साथ अपना विरोध दर्ज कराएं। ईद-उल-फितर के दिन अपने बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज़ अदा करें, ताकि एकजुटता और शोक का संदेश दिया जा सके।
ईरान पर हुए हमले की निंदा की
भारत की कुछ राजनीतिक पार्टियों ने खुले तौर पर ईरान पर हुए हमले की निंदा की और आयतुल्लाह खामेनई का नाम लेकर श्रद्धांजलि दी। वहीं कुछ अन्य दलों ने इस मुद्दे पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी, कुछ ने तो इस हमले का विरोध भी नही किया और कुछ ने घुमा फिरा कर विरोध किया।
खामेनई का नाम लेकर संवेदना व्यक्त नहीं की
मौलाना सैफ़ अब्बास ने कहा- जिन सियासी संगठनों ने स्पष्ट रूप से ईरान या आयतुल्लाह खामेनई का नाम लेकर संवेदना व्यक्त नहीं की व्यक्तिगत रूप से उनके कार्यक्रमों से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।
इफ्तार पार्टियों में शामिल नहीं होंगे
मौलाना ने कहा- ऐसे लोगों की तरफ से इफ्तार पार्टियों में शामिल नहीं होंगे। ईद के दिन उनसे कोई मुलाकात नहीं करेंगे और न ही ऐसे लोगों की बधाई स्वीकार करेंगे। यह उनका निजी निर्णय है बाकी लोगों को अगर सही लगे तो इस फैसले में उनका साथ दें।

